पूजन के बाद आरती क्यों की जाती है? जानिए आरती का महत्व, सही विधि और आध्यात्मिक रहस्य

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हिंदू धर्म में आरती का महत्व

हिंदू धर्म में आरती का महत्व

Aarti in Hindu Worship: पूजन के बाद आरती करने की परंपरा हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण अंग है. जानें आरती का धार्मिक महत्व, सही विधि, दीप घुमाने के नियम और शुद्ध मंत्रोच्चारण का महत्व.

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Aarti in Hindu Worship: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा के बाद आरती करने का विशेष विधान है. इसे निरांजन, आरात्रिक या आरातिर्क भी कहा जाता है और यह षोडशोपचार पूजन का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. आरती के दौरान दीपक, भजन, घंटी, शंख, मंजीरा तथा करताल की ध्वनि के साथ ईश्वर की स्तुति की जाती है. लोकप्रिय आरती "ॐ जय जगदीश हरे" में एक पंक्ति "नारद करत निरांजन" है, जिसका उच्चारण कई लोग गलती से "नारद करत निरंजन" कर देते हैं. धार्मिक स्तुति में शब्दों का शुद्ध उच्चारण विशेष महत्व रखता है.

आरती करने की पारंपरिक विधि

आरती सामान्यतः घी या कपूर से प्रज्ज्वलित दीपक द्वारा की जाती है. दीपक को भगवान की प्रतिमा के सामने दाईं ओर से बाईं ओर घुमाया जाता है. पारंपरिक मान्यता के अनुसार दीप की लौ को चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुखमंडल पर एक बार और पूरे शरीर पर सात बार घुमाने का विधान बताया गया है. इसके बाद उपस्थित श्रद्धालु आरती की लौ पर हाथ फेरकर उसे अपने मस्तक और नेत्रों से स्पर्श करते हैं, जो ईश्वर के आशीर्वाद और दिव्य ऊर्जा को ग्रहण करने का प्रतीक माना जाता है.

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आरती का आध्यात्मिक संदेश

धार्मिक मान्यता है कि यदि पूजा में किसी प्रकार की त्रुटि रह जाए, तो श्रद्धापूर्वक की गई आरती उस पूजा को पूर्णता प्रदान करने का भाव व्यक्त करती है. आरती के बाद मूल मंत्र के साथ पुष्पांजलि अर्पित कर जय-जयकार की जाती है. शास्त्रीय परंपराओं में आरती के पांच स्वरूप बताए गए हैं—दीपमाला, जलयुक्त शंख, स्वच्छ वस्त्र, आम या पीपल के पत्ते तथा साष्टांग दंडवत. इन सभी का उद्देश्य ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करना है. आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से ईश्वर के साथ आत्मिक संबंध स्थापित करने का माध्यम भी मानी जाती है.


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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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