कब है फाल्गुन पूर्णिमा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

फाल्गुन पूर्णिमा
Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है. साल 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, इसे लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है. ऐसे में इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं फाल्गुन पूर्णिमा की सही तिथि और इसकी शुरुआत से जुड़ी पौराणिक कथा.
Falgun Purnima 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि का खास महत्व है. इस दिन होलिका दहन किया जाता है. इसके अगले दिन खुशी और उल्लास के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को पड़ रही है. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन शाम के समय लोग होलिका की विधि-विधान से पूजा करते हैं और शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा करते हैं. श्रद्धालु अग्नि में नई फसल, जैसे जौ और गेहूं, अर्पित करते हैं.
फाल्गुन पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
- फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 02 मार्च 2026, सोमवार, 05:19 बजे
- फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्त: 03 मार्च 2026, मंगलवार, 04:33 बजे
- भद्रा काल प्रारंभ: 02 मार्च 2026, सोमवार, 05:18 बजे
- भद्रा काल समाप्त: 02 मार्च 2026, सोमवार, 16:56 बजे
- होलिका दहन मुहूर्त: 02 मार्च 2026, सोमवार, 05:52 बजे से 08:20 बजे तक
- अवधि: 2 घंटे 28 मिनट
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक शक्तिशाली असुर राजा था. उसने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर यह वरदान प्राप्त किया कि न कोई इंसान, न कोई जानवर उसे मार सके; न वह दिन में मरे, न रात में; और न ही घर के अंदर या बाहर मर सके.
इस वरदान के अहंकार में वह स्वयं को भगवान मानने लगा और अपनी प्रजा को उसकी पूजा करने के लिए कहता था. लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र ‘प्रह्लाद’ भगवान विष्णु का परम भक्त था. उसने अपने पिता को भगवान मानने से इनकार कर दिया. जिस कारण से हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने की कई कोशिशें की. उन्होंने प्रह्लाद पहाड़ से नीचे फेंकना, हाथियों के पैरों तले कुचलवाना, लेकिन हर बार विष्णु जी की कृपा से प्रह्लाद बच गया.
अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली. होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकती. उसके पास एक विशेष चादर थी जिसे ओढ़ने पर आग उसे छू भी नहीं सकती थी. योजना बनी कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठेगी, जिससे प्रह्लाद जल जाएगा और होलिका बच जाएगी.
जब चिता जलाई गई, तो प्रह्लाद ने अपनी आँखें बंद कर भगवान विष्णु का नाम जपना शुरू किया. तभी चमत्कार हुआ, तेज हवा चली और वह चादर होलिका के शरीर से उड़कर प्रह्लाद पर आ गई. होलिका जलकर राख हो गई, और प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए.
मान्यता है कि जिस दिन यह घटना हुई, वह फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि थी. यही कारण है कि हर साल इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलीका दहन किया जाता है.
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लेखक के बारे में
By नेहा कुमारी
नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.
डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.
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