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सूतक काल में होलिका दहन होगा या नहीं? जानें सही मुहूर्त

Updated at : 28 Feb 2026 12:47 PM (IST)
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Chandra Grahan Sutak Kaal And Holika Dahan

होलिका दहन के दिन चंद्रग्रहण ? जानें सूतक काल

Chandra Grahan Sutak kaal 2026: 3 मार्च 2026 को होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और भद्रा काल साथ हैं. जानें सूतक समय, सही मुहूर्त, और दोष से बचने के शास्त्रीय नियम क्या हैं.

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Chandra Grahan Sutak kaal 2026: हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा और सत्य की जीत का स्मरण किया जाता है. लेकिन वर्ष 2026 में 3 मार्च को होलिका दहन के दिन भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है. ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि शुभ कार्य कब करें और दोष से कैसे बचें.

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

 शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक

कुल अवधि: 2 घंटे 28 मिनट

ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण समाप्ति के तुरंत बाद का समय होलिका दहन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा. इसलिए ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धि करके ही होलिका दहन करना उचित है.

 चंद्र ग्रहण और सूतक काल का समय

भारतीय समयानुसार 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव चंद्रोदय के साथ शाम 06:26 बजे से दिखाई देगा और 06:46 बजे समाप्त होगा. हालांकि ग्रहण की प्रारंभिक अवस्था दोपहर 02:16 बजे से शुरू हो जाएगी. इस दिन सूतक काल का विशेष महत्व रहेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल सुबह 09:39 बजे से शुरू होकर शाम 06:46 बजे तक रहेगा. सूतक के दौरान पूजा-पाठ, हवन, और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. इसलिए होलिका दहन की प्रक्रिया ग्रहण और सूतक काल समाप्त होने के बाद ही करना शास्त्रसम्मत माना गया है.

भद्रा और ग्रहण का प्रभाव

भद्रा काल में भी कोई शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता. इस वर्ष भद्रा और चंद्र ग्रहण का संयोग एक साथ होने से सावधानी और भी आवश्यक हो जाती है. शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि ग्रहण और सूतक के दौरान धार्मिक अनुष्ठान स्थगित कर देने चाहिए. हालांकि ग्रहण के समय मंत्र जाप और ध्यान करना अत्यंत शुभ माना गया है. यह समय आत्मचिंतन और ईश्वर स्मरण के लिए श्रेष्ठ होता है.

ये भी पढ़ें: चंद्र ग्रहण और होलिका दहन एक साथ, पहले क्या करें? जानें शास्त्रों का सही नियम

 दोष से मुक्ति के सरल नियम

  • भद्रा और सूतक के दोष से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
  • ग्रहण काल में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का मानसिक जाप करें.
  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर शुभ मुहूर्त में होलिका पूजन करें.
  • होलिका की अग्नि में अनाज, गुड़ और नारियल अर्पित करें.
  • मान्यता है कि इन उपायों से ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर की बाधाएं दूर होती हैं.

3 मार्च 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है, क्योंकि इस दिन होलिका दहन के साथ चंद्र ग्रहण और भद्रा काल का संयोग बन रहा है. शास्त्रों के अनुसार पहले ग्रहण और सूतक समाप्त होने दें, फिर शुद्धि के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें. नियमों का पालन करने से न केवल दोष से बचाव होगा, बल्कि घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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