पटना महावीर मंदिर के ज्योतिषाचार्य ने तय किया ग्रहण और भद्रा काल के बीच होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

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चंद्र ग्रहण और होलिका दहन

Holika Dahan 2026: होलिका दहन और होली के मुहूर्त पर पटना महावीर मंदिर के ज्योतिषाचार्य ने जानकारी दी. उनका कहना है कि शास्त्रों के अनुसार दो मार्च की रात में ही होलिका दहन करना सही है.

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Holika Dahan 2026: पटना महावीर मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉ. मुक्ति कुमार झा एवं “गोपिकृष्ण मिथिला पंचांग” के प्रधान सम्पादक ने चंद्र ग्रहण और भद्रा काल के संयोग के बीच होलिका दहन का विशेष शुभ मुहूर्त निर्धारित किया है. ग्रहण और भद्रा के साए के बावजूद तय इस सीमित समय में ही विधि-विधान से होलिका दहन करना शुभफलदायी माना जाएगा. महावीर मंदिर पटना के ज्योतिषाचार्य डॉ. मुक्ति कुमार झा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पूर्णमासी में होलिका दहन की जाती है. प्रतिपदा में होली खेली जाती है. इस बार पूर्णिमा तिथि दो और तीन मार्च को पड़ रही है. दो मार्च 2026 को भद्रा है, वैसे तो भद्रोपरान्त रात्रिशेष 05:10 मिनट उपरि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है, लेकिन लोकाचार को ध्यान में रखते हुए रात 11 बजकर 57 मिनट से सुबह 05 बजकर 10 मिनट के बीच होलिका दहन का शुभ मुहूर्त बन रहा है और चार मार्च का होली खेली जाएगी.

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भद्रा में होलिका दहन वर्जित, केवल लोकाचार संभव

ज्योतिषाचार्य डॉ मुक्ति कुमार झा ने बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति में होली सिर्फ एक लोकानुरंजक उत्सव नहीं बल्कि धर्म, दर्शन, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का समन्वित महापर्व है. पटना महावीर मंदिर के ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र विभाग द्वारा फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, संवत् 2082 (ईस्वी सन् 2026) के अवसर पर होलिका पर्व के आयोजन के विषय में शास्त्रीय, ज्योतिषीय एवं धर्मशास्त्रीय प्रमाणों के गहन परीक्षण के बाद होलिका दहन धर्मशास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा यानी कि श्रवणी एवं फाल्गुनी पूर्णिमा में भद्रा काल में दहनादि कृत्य वर्जित है. दो मार्च को भद्रा है और भद्रा में होलिका दहन नहीं हो सकता लेकिन लोकाचार का पालन किया जा सकता है.

दो मार्च को आधी रात से होलिका दहन शास्त्र सम्मत

ज्योतिषाचार्य डॉ. मुक्ति कुमार झा ने बताया कि ने कहा कि जब रात में पूर्णिमा मिलेगी तभी होलिका जलाई जाएगी, लेकिन पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आरंभ होता है यदि पूरी रात भद्रा मिल रही तो भद्रा का मुख भाग छोड़ कर धर्मसिंधु के अनुसार आधी रात से पहले ही भद्रा में भी होलिका जलाई जा सकती है, इस साल पूणिमा का आरंभ 2 मार्च की शाम 5 बजकर 32 मिनट से हो रहा है और इसकी समाप्ति 3 मार्च की शाम 4 बजकर 45 मिनट हो रही है. दो मार्च को ही पूर्णिमा के साथ भद्रा भी लग रहा है. उसका मुख भाग साम 05 बजकर कर 32 मिनट से सुवह 05 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, इसीलिये दो मार्च को सुवह 05 बजकर 10 उपरि शास्त्र सम्मत होगा, वैसे मध्य रात्रि में भी होलिका दहन करने से कोई दोष नहीं है. भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन शुभ है.

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