चैत्र नवरात्र में मंत्रोच्चारण से बदलें भाग्य: दुर्गा सप्तशती के 5 कल्याणकारी मंत्र

मां दुर्गा के सामने मंत्रोच्चारण करते हुए भक्त (एआई-निर्मित तस्वीर)
Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि के दौरान मंत्रो के उचार का विशेष महत्व है. मान्याता है कि जो भी भक्त सच्च मन और श्रद्धा के साथ इस दुर्गा सप्तशती में वर्णित मंत्रो का जाप करता है, उस पर माता की कृपा बनी रहती है. साथ ही साधक की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
Chaitra Navratri: देवीमाहात्म्य यानी दुर्गा सप्तशती में ‘श्लोक’, ‘अर्धश्लोक’ और ‘उवाच’ आदि को मिलाकर कुल लगभग 700 मंत्र बताए गए हैं. यह ग्रंथ मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति कराने वाला माना जाता है. जो व्यक्ति जिस भावना और उद्देश्य के साथ, श्रद्धा और विधि के अनुसार इसका पाठ करता है, उसे उसी के अनुसार फल अवश्य प्राप्त होता है. इस सत्य को बहुत से लोगों ने अपने अनुभव से प्रमाणित भी किया है. आइए जानते हैं तंत्र साधक एवं ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु से दुर्गा सप्तशती के 5 कल्याणकारी मंत्र.
सामूहिक कल्याण के लिए
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या,
निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां,
भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
विश्व के अशुभ एवं भय के विनाश के लिए
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो,
ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय,
नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥
विश्व की रक्षा के लिए
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः,
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा,
तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
विश्व के अभ्युदय (उन्नति) के लिए
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं,
विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्।
विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति,
विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥
विश्वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिए
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद,
प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं,
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
पांचों देवी मंत्रों का श्रद्धा और विधि से पाठ करने पर जीवन में अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. इनसे व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सुख-शांति और कल्याण का वातावरण बनता है. ये मंत्र भय, चिंता और अशुभ प्रभावों को दूर करके मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं. इनके प्रभाव से घर-परिवार की सुरक्षा बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है.
ये बुद्धि, विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करते हैं. इनका नियमित जप जीवन में उन्नति, सफलता और नए अवसर प्रदान करता है. व्यक्ति के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है. कठिन समय और विपत्तियों में ये मंत्र रक्षा कवच का कार्य करते हैं. मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है. समग्र रूप से, ये मंत्र धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति में सहायक माने जाते हैं.
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By Neha Kumari
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