आर्द्रा नक्षत्र 2026: मिथिला में क्यों मनाया जाता है ‘अरदरा’, खीर और आम से जुड़ी है खास मान्यता

Updated:
विज्ञापन

आर्द्रा नक्षत्र में मिथिला की परंपरा

Ardra Nakshatra 2026: आर्द्रा नक्षत्र 2026 के आरंभ के साथ मिथिला में अरदरा पर्व मनाया जा रहा है. खीर-आम का भोग, कुलदेवी पूजा और गमैया पूजा की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है.

विज्ञापन

Ardra Nakshatra 2026: वैदिक ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र का विशेष महत्व माना गया है. वर्ष 2026 में 22 जून से आर्द्रा नक्षत्र का आरंभ हो चुका है. यह नक्षत्र केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मिथिला की लोक संस्कृति, कृषि परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. इसी समय मानसून की सक्रिय शुरुआत होती है और मिथिला के किसान धान की रोपाई का कार्य आरंभ करते हैं. इस मौसम में मनाया जाने वाला ‘अरदरा’ पर्व लोगों के बीच विशेष उत्साह का विषय होता है.

विज्ञापन

बारिश, खेती और आर्द्रा नक्षत्र का संबंध

रांची से ज्योतिषविद रमाकांत झा बताते हैं कि मिथिला क्षेत्र में आर्द्रा नक्षत्र को वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. किसान इस अवधि को खेती-किसानी के लिए शुभ मानते हैं और धान की रोपाई की तैयारियां तेज हो जाती हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र प्रकृति में नई ऊर्जा और उर्वरता लेकर आता है, इसलिए इसका कृषि जीवन से गहरा संबंध माना जाता है.

कुलदेवी पूजा और खीर-आम का विशेष भोग

आर्द्रा नक्षत्र के अवसर पर मिथिला के कई घरों में कुलदेवी की पूजा की जाती है. पूजा के बाद खीर और आम का भोग अर्पित किया जाता है तथा परिवार के सभी सदस्य इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. मान्यता है कि इस दिन खीर और आम का सेवन शुभ फल प्रदान करता है. चूंकि इस समय तक अधिकांश आम पक जाते हैं, इसलिए आम का विशेष महत्व माना जाता है.

आर्द्रा नक्षत्र और नाग से जुड़ी मान्यता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र के देवता भगवान रुद्र और इसके स्वामी राहु हैं. लोक मान्यताओं में यह नक्षत्र सांपों के प्रजनन और उनकी वृद्धि से भी जुड़ा माना गया है. मिथिला में प्रचलित एक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में खीर का सेवन करता है, उसे पूरे वर्ष सर्पदंश का भय कम रहता है. हालांकि यह धार्मिक और लोकविश्वास पर आधारित मान्यता है.

ये भी पढ़ें: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश, राहु के नक्षत्र में शुरू होगा बदलाव का दौर, जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा असर

गमैया पूजा का सामुदायिक महत्व

मिथिला के कई गांवों में आर्द्रा नक्षत्र के दौरान सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसे ‘गमैया पूजा’ कहा जाता है. इस अवसर पर गांव के लोग एकत्र होकर कुलदेवी की आराधना करते हैं और सामूहिक रूप से खीर का वितरण किया जाता है. आम और खीर का प्रसाद विशेष रूप से उन लोगों को भी दिया जाता है जिनके पास आम के पेड़ नहीं होते. इसके पीछे भावना यह है कि फलों के राजा आम का स्वाद हर व्यक्ति तक पहुंचे.

लोक परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम

आर्द्रा नक्षत्र का यह पर्व मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें कृषि, प्रकृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम देखने को मिलता है. खीर-आम का प्रसाद, कुलदेवी की पूजा और गमैया पूजा की परंपरा आज भी मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola