भीतर का उजाला है गुरु
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jun 2016 7:03 AM (IST)
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अगर आप बिना किसी मार्ग-दर्शन के आगे बढ़ेंगे तो इधर-उधर ही भटकते रह जायेंगे, भले ही आपकी मंजिल अगले कदम पर ही हों. बस इसी मार्ग-दर्शन के लिए आपको गुरु की जरूरत पड़ती है. यह बात और है कि इस काम में आपको अनंत काल लग सकता है, क्योंकि आप गुरु को खोजने नहीं जाते. […]
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अगर आप बिना किसी मार्ग-दर्शन के आगे बढ़ेंगे तो इधर-उधर ही भटकते रह जायेंगे, भले ही आपकी मंजिल अगले कदम पर ही हों. बस इसी मार्ग-दर्शन के लिए आपको गुरु की जरूरत पड़ती है.
यह बात और है कि इस काम में आपको अनंत काल लग सकता है, क्योंकि आप गुरु को खोजने नहीं जाते. अगर आपकी इच्छा गहरी हो जाये, अगर आप अपने अस्तित्व की प्रकृति को न जानने के दर्द से तड़प रहे हैं, तो आपको गुरु खोजने की जरूरत नहीं होगी. वह खुद आपको खोज लेंगे. जब अज्ञानता का पीड़ा आपके भीतर एक चीख बन कर उभरे, तो शर्तिया गुरु आप तक पहुंच जायेंगे. गुरु कोई व्यक्ति नहीं होता, वह तो बस एक संभावना है. गुरु शब्द दो अक्षरों से मिल कर बना है. गु और रु, ‘गु’ के मायने हैं अंधकार और ‘रु’ का मतलब है भगानेवाला. कोई भी चीज या इंसान, जो आपके अंधकार को मिटाने का काम करता है, वह आपका गुरु है. यह कोई ऐसा इंसान नहीं है, जिससे आपको मिलना जरूरी हो. गुरु तो एक रिक्तता है, एक विशेष प्रकार की ऊर्जा है.
यह जरूरी नहीं है कि गुरु कोई व्यक्ति हो. एक सच्चा जिज्ञासु, एक ऐसा साधक जिसके दिल में गुरु को पाने की प्रबल इच्छा होती है, वह हमेशा उसे पा ही लेता है. जब भी कोई वास्तव में याचना करता है, तो अस्तित्व उसका उत्तर जरूर देता है. भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को ईश्वर का बोध करा सकता है. यह एकमात्र ऐसी संस्कृति है, जहां इस बात को लेकर कोई एक मान्यता नहीं है कि ईश्वर क्या है. अगर आप अपने पिता को ईश्वर की तरह देखने लगें, तो आप उनके सामने ही सिर नवा सकते हैं.
अगर अपनी मां में ईश्वर के दर्शन होते हैं, तो आप उसके सामने सिर झुका सकते हैं. अगर किसी को फूल में ईश्वर नजर आता है, तो वह उसकी पूजा कर सकता है. लोगों को अपने-अपने ईश्वर की कल्पना करने की पूरी आजादी है. इसीलिए इसे इष्ट-देव कहा जाता है. दुनिया में सबसे ऊंचा लक्ष्य भगवान कभी नहीं रहा, सबसे ऊंचा लक्ष्य हमेशा मुक्ति रहा है. इंसान की मुक्ति सबसे महत्वपूर्ण चीज रही है और गुरु ही मुक्ति का मार्ग दिखा सकता है.
– सद्गुरु जग्गी वासुदेव
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