संसार तो एक भ्रम है
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 May 2016 12:32 AM (IST)
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इस संसार के तीन आधारभूत दृष्टिकोण हैं. पहला दृष्टिकोण भौतिकवाद का है, जिसमें लोग इस संसार को वास्तविक रूप में देखते हैं. दूसरा वह है, जिसमें दुनिया पूरी तरह से एक भ्रम है. तीसरा यह है कि संसार भगवान की पवित्र संपत्ति है. यह वास्तविक है, लेकिन यह प्रत्यक्षीकरण में अस्थायी है. अब यह अवधारणा, […]
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इस संसार के तीन आधारभूत दृष्टिकोण हैं. पहला दृष्टिकोण भौतिकवाद का है, जिसमें लोग इस संसार को वास्तविक रूप में देखते हैं. दूसरा वह है, जिसमें दुनिया पूरी तरह से एक भ्रम है. तीसरा यह है कि संसार भगवान की पवित्र संपत्ति है. यह वास्तविक है, लेकिन यह प्रत्यक्षीकरण में अस्थायी है.
अब यह अवधारणा, कि वास्तविकता में संसार ही केवल एक सत्य है, यह हमारे चेतना को सोचने की इजाजत देता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि जो हम चाहते हैं, वह जब तक हम पाते नहीं, तब तक हम क्या करते हैं. अगर हम लोगों को दुख देते हैं, नैतिक मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों को कुचल कर पैसा, प्रसिद्धि, सत्ता, कामुकता और भावनात्मक सुख पाते हैं, तो यह सब उचित है. क्योंकि कहा गया है, ‘खाओ पियो और मगन रहो, शायद कल आये ही नहीं.’ जब हम इस बात पर विश्वास करते हैं कि संसार ही केवल एक वास्तविकता है, तो हमारे तथाकथित नैतिक सिद्धांत कमजोर हो जाते हैं.
उसके बाद हम फिर लालच, ईर्ष्या, वासना, क्रोध, अहंकार और भ्रम जैसी भावनाओं से पीड़ित हो जाते हैं. संसार कुछ नहीं बल्कि एक भ्रम है. वास्तविकता में इस संसार का कोई अस्तित्व नहीं है. जो ऐसा सोचते हैं उनके लिए मौत के बाद मुक्ति के बारे में सोचने के लिए यह एक अच्छी प्रेरणा है, क्योंकि अगर दुनिया ही एक भ्रम है, तो यह बात मायने नहीं रखती कि हम जीते हैं या मरते हैं. बस यह मायने रखता है कि जितनी जल्दी संभव हो, हमें इस संसार से मुक्ति मिल जाये. आज संसार के पर्यावरण और पारिस्थितिकी की स्थिति अधिक संकटपूर्ण है.
अगर हम अपने चारों ओर के पर्यावरण के संकट को देखें, तो इस सिद्धांत का महत्व समझ में आयेगा. हमें किसी और दृष्टिकोण से देखना चहिए जैसे कि किसे इस संकट की परवाह है, क्योंकि इसका तो अस्तित्व ही नहीं है. अगर यह दुनिया भ्रम है तो कोई भी पानी और हवा को गंदा करे, कोइ फर्क नहीं पड़ता. हमारी प्रेरणा तो इस सनकी, दूषित और दंडित दुनिया से मुक्ति पाना है और यह बात मायने नहीं रखती कि हम पीछे छोड़ कर क्या जाते हैं, क्योंकि यह संसार तो एक भ्रम है. हमारा कर्म केवल मुक्ति पाने के लिए है.
– राधानाथ स्वामी
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