शरीर की सुनो

Published at :11 May 2016 5:54 AM (IST)
विज्ञापन
शरीर की सुनो

शरीर के साथ लड़ना नहीं है, तुम्हें उसे केवल समझना है. शरीर बहुत प्राचीन है, कभी तुम एक पत्थर की तरह जीते थे. तब शरीर तो था लेकिन मन सोया हुआ था. फिर तुम एक पेड़ हुए; शरीर था, उसकी पूरी हरियाली और फूलों के साथ. लेकिन मन अभी भी गहरी नींद सोया था. फिर […]

विज्ञापन

शरीर के साथ लड़ना नहीं है, तुम्हें उसे केवल समझना है. शरीर बहुत प्राचीन है, कभी तुम एक पत्थर की तरह जीते थे. तब शरीर तो था लेकिन मन सोया हुआ था. फिर तुम एक पेड़ हुए; शरीर था, उसकी पूरी हरियाली और फूलों के साथ. लेकिन मन अभी भी गहरी नींद सोया था. फिर तुम बाघ हुए, पशु हुए; शरीर ऊर्जा से इतना ओत-प्रोत था, लेकिन मन काम नहीं कर रहा था. तुम पक्षी हुए, मनुष्य हुए. शरीर लाखों साल से कार्यरत है.

शरीर ने अत्यधिक प्रज्ञा इकट्ठी कर ली है. शरीर बहुत प्रज्ञावान है. इसलिए यदि तुम बहुत ज्यादा खाते हो, तो शरीर कहता है, ‘रुक जाओ!’ मन इतना बुद्धिमान नहीं है. मन कहता है, ‘स्वाद अच्छा है, थोड़ा अधिक लो.’ अगर तुम मन की सुनते हो, तो मन शरीर का नुकसान करता है. यदि तुम मन की सुनोगे, तब मन पहले तो कहेगा,‘खाये जाओ.’ क्योंकि मन बच्चा है. वह नहीं जानता कि वह क्या कह रहा है. वह नया-नया आया है. उसके भीतर कोई शिक्षा नहीं है. वह बुद्धिमान नहीं है. शरीर की सुनो. जब शरीर कहता है, भूख लगी है तब खाओ.

जब शरीर कहता है, रुक जाओ, तब रुको. जब तुम मन की सुनते हो, तो यह ऐसा है, जैसे एक छोटा बच्चा एक बूढ़े आदमी को राह दिखा रहा है, वे दोनों गड्ढे में गिरेंगे. अगर तुम मन की सुनोगे, तो पहले तुम इंद्रियों में गिर जाओगे और फिर तुम उससे ऊब जाओगे. हर इंद्रिय तुम्हारे लिए दुख ले आयेगी और हर इंद्रिय अधिक चिंता, क्लेश और पीड़ा ले आयेगी. अगर तुमने बहुत ज्यादा खा लिया, तो पीड़ा होगी और फिर उलटी हो जायेगी.

पूरा शरीर अस्त-व्यस्त हो जाता है. तब मन कहता है, ‘भोजन बुरा है, इसलिए उपवास करो.’ और उपवास सदा खतरनाक होता है. अगर तुम शरीर की सुनो तो वह कभी ज्यादा नहीं खायेगा और न कभी कम खायेगा. कुछ वैज्ञानिकों ने इस मसले पर बहुत सुंदर तथ्य की खोज की है: छोटे बच्चे तभी खाते हैं, जब वे भूखे होते हैं, वे तभी सोते हैं, जब उन्हें नींद आती है.

वे अपने शरीर की सुनते हैं. लेकिन उनके माता-पिता उनमें बाधा डालते हैं. वे जबरदस्ती करते हैं कि यह भोजन का समय है, या लंच का समय है, या सोने का समय है. वे उनके शरीर को मुक्त नहीं छोड़ते.

– आचार्य रजनीश ओशो

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola