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महालया आज : आ रही हैं मां, शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 से

Updated at : 08 Oct 2018 5:35 AM (IST)
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महालया आज : आ रही हैं मां, शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 से

या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः, पापात्मनां कृतधियां ह्दयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा, तां त्वां नताः स्म परिपालय देवी विश्वम।। जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप से, पापियों के यहां दरद्रितारूप से, शुद्ध अंतःकरणवाले पुरुषों के हृदय में बुद्धि रूप से और कुलीन मनुष्य में लज्जारूप से निवास करती है, उन भगवती दुर्गा […]

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या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः, पापात्मनां कृतधियां ह्दयेषु बुद्धिः।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा, तां त्वां नताः स्म परिपालय देवी विश्वम।।
जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप से, पापियों के यहां दरद्रितारूप से, शुद्ध अंतःकरणवाले पुरुषों के हृदय में बुद्धि रूप से और कुलीन मनुष्य में लज्जारूप से निवास करती है, उन भगवती दुर्गा को हम नमस्कार करते हैं. देवी! आप संपूर्ण विश्व का पालन कीजिए़
आज महालया है़ मान्यता है कि आज मां अपने मायके लौटती हैं. उन्हीं के आगमन की खुशी को महालया के रूप में मनाया जाता है. बंगाली मूर्तिकार इसी दिन मां का नेत्र दान करते हैं. इसके साथ ही श्रद्धालु पूजा की तैयारी शुरू कर देते हैं. बांग्ला भाषा-भाषी श्रद्धालु प्रात: मां की पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं. मां के आगमन की खुशी में एक-दूसरे को बधाई देते हैं. बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं. वहीं विभिन्न नदी तालाबों में जाकर घर के बड़े वृद्ध तर्पण करेंगे. इसके बाद ब्राह्मण व गरीबों को भोजन करा कर उनका आशीर्वाद लेंगे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन ऐसा करने से पितर आशीर्वाद देकर लौट जाते हैं अौर पूरे साल भर परिवार की रक्षा करते हैं.
पितरों का तर्पण कल
मंगलवार को पितरों का तर्पण किया जायेगा. आज सुबह 10.47 बजे के बाद से अमावस्या लग जायेगी. इसके बाद से अमावस्या से संबंधित श्राद्ध अौर ब्राह्मण भोजन कराया जायेगा. जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो.
इसके अलावा जिन लोगों को अपने मृत परिवारजनों की तिथि याद नहीं है, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जायेगा. कल सिर्फ पितरों का तर्पण अौर कुश का त्याग होगा. पंडित कपिलदेव मिश्र ने कहा कि वाराणसी पंचांग के अनुसार सोमवार को दिन के 10.47 बजे तक चतुदर्शी है अौर इसके बाद से अमावस्या लग जायेगी.
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 से
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 अक्तूबर से होगा़ तैयारी अंतिम चरण में है. इस बार मां का आगमन नाव और गमन हाथी पर हो रहा है, जिसे शुभ माना जा रहा है़ इस दिन प्रतिपदा सुबह 7.56 बजे तक ही है.
हालांकि उदया तिथि में प्रतिपदा मिलने के कारण पूरा दिन यह तिथि मान्य होगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दिन के 11.37 बजे से 12.23 बजे तक है. यह भी कलश स्थापना के लिए उपयुक्त समय है. वाराणसी पंचांग के अनुसार 7.56 बजे के बाद से द्वितीया लग जायेगी. इसलिए प्रतिपदा युक्त द्वितीया में भी कलश की स्थापना की जा सकती है.
चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में नवरात्र आरंभ होने के कारण कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त श्रेष्ठकर है. मिथिला पंचांग के अनुसार भी मां का आगमन नौका और गमन हाथी पर हो रहा है. आगमन और प्रस्थान दोनों शुभ माना गया है. इस पंचांग के अनुसार कलश स्थापना के दिन से ही मां का आगमन शुरू हो जाता है. कलश स्थापित कर मां के अलावा अन्य देवी देवता का आह्वान किया जाता है. इस दिन सूर्योदय प्रातः 5: 47 पर होगा, इसके बाद से पूजा अर्चना शुरू हो जायेगी. प्रतिपदा सुबह 8.06 बजे तक है.
दुर्गा बाटी में 15 को कल्पारंभ
दुर्गा बाटी में 15 अक्तूबर सुबह 8.42 बजे के बाद कल्पारंभ होगा. इसी दिन सभी बांग्ला मंडपों में भी यह अनुष्ठान शुरू हो जायेगा. इसके बाद शाम में देवी का आमंत्रण और अधिवास होगा. बांग्ला के अनुसार इस बार मां का आगमन घोड़ा पर हो रहा है. फल छत्रभंग अौर मां का गमन झूला व फल मड़क है.
16 अक्तूबर : इस दिन महासप्तमी है. सुबह 6.45 बजे के अंदर नवपत्रिका प्रवेश होगा. पूजा सह चंडी पाठ आरंभ 7.10 मिनट के अंदर, भोग निवेदन 9.40 , पुष्पांजलि 10.10 बजे, संध्याआरती शाम 6.40 बजे , संध्या भोग शाम 7.45 बजे है.
17 अक्तूबर : इस दिन महाअष्टमी है. सुबह सात बजे पूजा सह चंडी पाठ का शुभारंभ होगा. सुबह 9.30 बजे कुंवारी पूजा, भोग निवेदन सुबह 10.15, पुष्पांजलि दिन के 10.30 से 11.15 बजे तक है. संध्या आरती शाम सात और संध्या भोग रात आठ बजे है.
18 अक्तूबर : महानवमी के दिन सुबह 7.15 बजे पूजा सह चंडी पाठ का आरंभ होगा. भोग निवेदन 9.30 बजे, पुष्पांजलि 10.10 बजे, संध्या आरती शाम सात बजे और भोग निवेदन रात आठ बजे है.
19 अक्तूबर : पूजा सुबह सात बजे शुरू होगी. पुष्पांजलि व मंत्रागिक विसर्जन सुबह 8.35 बजे के अंदर करना है. कलश विसर्जन दिन के 11.40 बजे के बाद और प्रतिमा निरंजन शाम 5.45 बजे के बाद करना है.
17 को संधि पूजा : 17 को संधि पूजा है. इस दिन 12.03 बजे के बाद से पूजा शुरू होगी. बलिदान 12.27 बजे के बाद है. पूजा का समापन 12.56 मिनट के अंदर होगा.
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