कोजागरी लक्ष्मी पूजा कल, मिथिलांचल व बंग समुदाय में पूजा का खास महत्व

Published at :04 Oct 2017 7:16 AM (IST)
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कोजागरी लक्ष्मी पूजा कल, मिथिलांचल व बंग समुदाय में पूजा का खास महत्व

आस्था. मिथिलांचल व बंग समुदाय में पूजा का खास महत्व है रांची : कोजागरी लक्ष्मी पूजा पांच अक्तूबर को है़ मिथिलांचल एवं बंग समुदाय में इस पूजा का खास महत्व है़ बंग समुदाय में इस पूजा को लक्खी पूजा कहा जाता है़ कोजागरी लक्ष्मी पूजा शरद पूर्णिमा को मनायी जाती है. इस बार बुधवार को […]

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आस्था. मिथिलांचल व बंग समुदाय में पूजा का खास महत्व है
रांची : कोजागरी लक्ष्मी पूजा पांच अक्तूबर को है़ मिथिलांचल एवं बंग समुदाय में इस पूजा का खास महत्व है़ बंग समुदाय में इस पूजा को लक्खी पूजा कहा जाता है़ कोजागरी लक्ष्मी पूजा शरद पूर्णिमा को मनायी जाती है. इस बार बुधवार को पूर्णिमा पड़ रहा है, जो गुरुवार को रात 12़ 52 बजे तक है़
दुर्गा बाड़ी के सचिव सह पुजारी गोपाल भट्टाचार्या के अनुसार, बुधवार को पूर्णिमा पड़ने के कारण गुरुवार को सुबह से ही पूजा की जा सकती है़ किंतु यह पूजा रात को जग कर करने की प्रथा है़ इसलिए शाम सात बजे से पूजा की जा सकती है़ रात में जग कर इस पूजा को करने के कारण ही इसे कोजागरी लक्ष्मी पूजा या लक्खी पूजा कहा जाता है़ दुर्गा बाड़ी में लक्खी पूजा शाम सात बजे आरंभ हो जायेगी़ चूड़ा एवं नारियल का भोग चढ़ाया जायेगा़
गुरुवार को पूजा पड़ने के कारण विशेष महत्व
गुरुवार को लक्खीवार माना जाता है़ गुरुवार को लक्खी पूजा पड़ने से इस पूजा का महत्व और भी बढ़ गया है़ गुरुवार को मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है़ बंग समुदाय में फसल तैयार हो जाने के उपलक्ष्य में यह पूजा मनायी जाती है़ इसलिए पूजा में विशेष रूप से धान को मां लक्ष्मी को अपृत किया जाता है़
मां लक्ष्मी को चूड़ा, खोई व नारियल का भोग लगाया जाता है़ वहीं यह पूजा व्यापारियों के लिए भी खास महत्व रखती है़ बंग समुदाय में इस दिन व्यापारी नया खाता-बही का आरंभ करते है़ं घरों में सत्यनारायण की पूजा करायी जाती है़ वही महिलाएं व्रत रख नये वस्त्र पहन कर मां लक्ष्मी की पूजा करती है़ं इस दिन रात भर दरवाजा बंद नहीं करने की परंपरा भी है़
मिथिलांचल में नवविवाहितों के लिए कोजागरी महत्वपूर्ण
मिथिलांचल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा का खास महत्व है़ इस पर्व को समाज में उत्सव की तरह मनाया जाता है़ खास कर नवविवाहितों के घर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है़ इस दिन नवविवाहितों के लिए ससुराल पक्ष से नये कपड़े, गहने व उपहार आते है़ं पान व मखाना का वितरण किया जाता है़ घर पर भोज का आयोजन होता है़
लक्खी पूजा को लेकर बंग समुदाय में खासा उत्साह
लक्खी पूजा मेरे परिवार के लिए बहुत ही खास है़ दुर्गा पूजा के बाद यह पूजा होती है़ लक्खी पूजा के बाद ही दुर्गा पूजा के अवसर पर बाहर से आये परिवार के सदस्य वापस जाते है़ं इस पूजा के लिए मेरा बेटा और भतीजा दिल्ली से आया. परिवार के सभी सदस्य एक साथ मां लक्खी की पूजा-अर्चना करते है़ं
त्वरित कांति रॉय, साउथ ऑफिस पाड़ा
लख्खी पूजा हमारे लिए बहुत ही खास है़ घर पर नये मेहमान के आने से पूजा का उत्साह मेरे परिवार के लिए दोगुना हो गया है़ लक्खी पूजा के बाद मेरे बेटे का एक वर्ष पूरा होगा़ इसलिए मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लेकर ही बेटे का जन्मदिन मनायेंगे़ इस पूजा को लेकर घर में सब बहुत ही खुश है़ं पूजा को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है.
मानस बनर्जी, सेक्टर टू
लक्खी पूजा के प्रति मेरी बहुत श्रद्धा है.मैं बड़ी आस्था के साथ यह पूजा करती हू़ं मेरी दो बेटियां हैं,जिन्हें मैं मां लक्ष्मी का ही रूप मानती हू़ं इसलिए इस पूजा को धूमधाम से मनाती हू़ं रात को घर पर नये वस्त्र पहन कर मां लक्खी की पूजा-अर्चना करती हू़ं मां को चूड़ा, गुड़ व नारियल का भोग लगाती हू़ं इसकी तैयारी में जुट गयी हूं.
तनु श्री मुखर्जी, निवारणपुर
मेरी दो बेटियां हैं, जो मेरे लिए लक्ष्मी स्वरूप है़ं इसलिए मां लक्ष्मी की पूजा बड़े ही धूमधाम से मेरे घर पर की जाती है़ पूरा परिवार इस पूजा में शरीक होता है़ बंग समुदाय में यह पर्व का खास महत्व है़ मां दुर्गा की पूजा के बाद हम मां लक्ष्मी की पूजा को लक्खी पूजा के रूप में मनाते है़ं इस पूजा में घर से सभी सदस्य बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.
प्याली बोस, मेन रोड
घर की सभी महिलाएं पारंपरिक परिधान में एकजुट होकर मां लक्ष्मी की आराधना करती है़ं एक साथ मिल कर बंगाल की पारंपरिक परिधान में उपस्थित होकर बड़े-बजुर्गों के निर्देशन में पूजा-अर्चना की जाती है़ इस अवसर पर घर पर भोग वितरण का आयोजन होता है. काफी संख्या में लोग प्रसाद खाने आते हैं.
प्रोभाती कोनार, दीपाटोली
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