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झारखंड में नक्सलियों के गढ़ बूढ़ा पहाड़ पर फहराया गया तिरंगा, DGP बोले- जवानों ने दिखाया अदम्य साहस

Updated at : 19 Sep 2022 9:01 AM (IST)
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झारखंड में नक्सलियों के गढ़ बूढ़ा पहाड़ पर फहराया गया तिरंगा, DGP बोले- जवानों ने दिखाया अदम्य साहस

बूढ़ा पहाड़ पर कल तिरंगा फहराया गया. झारखंड के डीजीपी नीरज सिंन्हा कल वहां पर स्थित पुलिस कैंप का निरीक्षण करने पहुंचे थे. जहां वे पुलिस के जवानों से मिले और उन्हें पुरस्कृत किया. इस दौरान उन्होंने अभियान में शामिल जवानों को पुरस्कृत किया

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रांची : झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा रविवार को हेलीकॉप्टर से बूढ़ा पहाड़ पहुंचे और तिरंगा फहराया. बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराने के बाद डीजीपी वहां तैयार कैंप का निरीक्षण करने पहुंचे थे. वे बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने में शामिल सीआरपीएफ व झारखंड पुलिस के जवानों से मिले और उन्हें पुरस्कृत किया. डीजीपी ने कहा : आपके अदम्य साहस ने बूढ़ा पहाड़ को नक्सलमुक्त किया. आपने विपरित परिस्थितियों में भी कार्य जारी रखा. पूरे क्षेत्र को नक्सलमुक्त करने के अभियान में जुटे रहे. हर जवान की वीरता व साहस प्रशंसनीय है.

इस दौरान एडीजी अभियान संजय आनंद लाठकर, आइजी सीआरपीएफ अमित कुमार, आइजी अभियान एवी होमकर, स्पेशल ब्रांच की एसपी शिवानी तिवारी भी मौजूद रहे. वहां से लौटने के बाद आइजी अभियान ने बताया कि बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ऑक्टोपस शुरू किया गया था. नक्सलियों ने पहाड़ पर पहुंचनेवाले सभी मार्ग पर आइइडी लगा रखी थी.

पुलिस ने सतर्कतापूर्वक पहाड़ के प्रत्येक इलाके में कब्जा जमाया. अभियान के दौरान चार और पांच सितंबर को पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से नक्सलियों के एक बड़े बंकर पर कब्जा जमाया. वहां से 106 लैंडमाइंस और भारी मात्रा में गोली बरामद की गयी थी. नक्सली इलाके से भाग निकले हैं. प्रतिकूल मौसम में भी अभियान जारी है.

डीजीपी ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं 

बूढ़ा पहाड़ पर डीजीपी ने ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया. उनके बीच रोजमर्रा की वस्तुओं का वितरण भी किया. ग्रामीणों ने डीजीपी से पशुपालन की इच्छा जतायी. साथ ही अस्पताल, स्कूल, सड़क व पानी की सुविधा की मांग रखी. डीजीपी ने इस दिशा में पहल कराने का आश्वासन दिया. डीजीपी से मिल कर एक व्यक्ति ने गांव लौटने पर खुशी जतायी. कहा कि उसकी गांव में एक किराना दुकान थी. नक्सली हमेशा मारपीट करते थे, इस कारण पांच साल पहले गांव छोड़कर चला गया था.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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