हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला- झारखंड में अब 20 लाख लोगों को मिलेगा खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ

झारखंड पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों में से चतुर्थ वर्गीय कर्मी सिपाही, हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक एवं निरीक्षक के एक माह के मूल वेतन के बराबर दिये जाने वाले क्षतिपूर्ति अवकाश को फिर से बहाल कर दिया गया है.
हेमंत सोरेन की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुकों की संख्या 15 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी. कैबिनेट की बैठक में आज कुल 38 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी.
कैबिनेट की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकार की देते हुए कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभुकों को अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक की अवधि के लिए 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति लाभुक प्रति माह मुफ्त वितरित करने के लिए खाद्यान्न के परिवहन एवं वितरण पर राज्य सरकार 36 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
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झारखंड सरकार की कैबिनेट में झारखंड पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों को एक महीने के मूल वेतन के बराबर मानदेय का भुगतान किया जायेगा. कैबिनेट सचिव ने बताया कि झारखंड पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों में से चतुर्थ वर्गीय कर्मी सिपाही, हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक एवं निरीक्षक के एक माह के मूल वेतन के बराबर दिये जाने वाले क्षतिपूर्ति अवकाश को फिर से बहाल कर दिया गया है.
कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में सचिव ने बताया कि झारखंड राज्य में नये खुले 134 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए चिकित्सा पदाधिकारी एवं पारा मेडिकल कर्मियों के लिए 1990 पदों का सृजन किया जायेगा. इसके साथ ही 1990 पदों के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी गयी है.
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कैबिनेट सचिव ने बताया कि डिग्री कॉलेज टुंडी, डिग्री कॉलेज गोमिया और डिग्री कॉलेज आरएसपी 2 धनबाद में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए 87 पदों की स्वीकृति दी गयी है.
सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए एससी, एसटी अल्पसंख्यक एवं दिव्यांग वर्ग के युवाओं को ऋण सह अनुदान उपलब्ध कराने, ऋण की वसूली गारंटर के मापदंड में बदलाव किया गया है. इस फैसले से गारंटर नहीं मिलने पर होने वाली कठिनाई दूर हो जायेगी. उन्होंने बताया कि पहले सरकारी, अर्द्ध सरकारी, निजी संस्था में कार्यरत, सेवानिवृत्त कर्मी, आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी गारंटर बन सकते थे. अब निर्वाचित, पूर्व निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी गारंटर बन सकेंगे.
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