पुण्यतिथि पर विशेष : अज्ञेय ने नयी कविता को साहित्य जगत में स्थापित किया
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Apr 2018 4:08 PM
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, जिन्हें हम ‘अज्ञेय’ के रूप में ज्यादा जानते हैं हिंदी साहित्य के एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने प्रयोग को बढ़ावा दिया. इनका जन्म 7 मार्च, 1911 को उत्तर प्रदेश के कसया में हुआ था और निधन 4 अप्रैल, 1987 को हुआ. अज्ञेय प्रयोगवाद एवं नयी कविता को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने […]
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, जिन्हें हम ‘अज्ञेय’ के रूप में ज्यादा जानते हैं हिंदी साहित्य के एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने प्रयोग को बढ़ावा दिया. इनका जन्म 7 मार्च, 1911 को उत्तर प्रदेश के कसया में हुआ था और निधन 4 अप्रैल, 1987 को हुआ. अज्ञेय प्रयोगवाद एवं नयी कविता को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि हैं. इन्होंने अनेक जापानी हाइकु कविताओं का अनुवाद किया. इन्होंने कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध, नाटक, यात्रावृत्तांत और संस्मरण लिखे. उन्हें एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर के रूप में भी जाना जाता है. इन्हें साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाजा गया था. आज अज्ञेय की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनकी कुछ कविताएं:-
मानता हूँ मैं पराजय है तुम्हारी याद।
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