World Book Day 2026 : किताबें, जिन्हें जीवन में एक बार पढ़ना तो बनता है 

Published by :Preeti Singh Parihar
Published at :23 Apr 2026 3:30 PM (IST)
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world book day

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दुनिया भर में आज 23 अप्रैल को 'विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस' मनाया जा रहा है. यूनेस्को ने इस दिवस की शुरुआत पुस्तकों को सभी के लिए सुलभ बनाने और युवाओं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए की थी. आज किताबों के इस खास दिन बात हिंदी साहित्य के कुछ ऐसे उपन्यासों की, जिन्हें हर किसी को जीवन में एक बार जरूर पढ़ना चाहिए...

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World Book Day 2026 : किताबों का एक बड़ा संसार है, जिसमें अकादमिक किताबों के साथ-साथ कथा-साहित्य, आत्मकथा, यात्रा वृत्तांत समेत अनेक विधाओं में लिखी असंख्य किताबें शामिल हैं. आज ‘विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस’ पर, जो किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने का दिन है, क्यों न हिंदी साहित्य की ऑल टाइम बेस्ट किताबों की बात की जाये, जिनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें हर किसी को एक बार तो जरूर पढ़ना चाहिए.

गोदान

हिंदी कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद के वैसे तो सभी उपन्यास आज भी बेहद चर्चित और लोकप्रिय हैं, लेकिन ‘गोदान’ के बारे में कहा जाता है कि यह उपन्यास सबसे पहले और खासतौर पर पढ़ा जाना चाहिए. वर्ष 1936 में प्रकाशित यह उपन्यास भारत के गांवों के उस यथार्थ को बयां करता है, जो आज आजादी के इतने दशकों बाद भी नहीं बदला है.  

राग दरबारी

वर्ष 1968 में प्रकाशित यह उपन्यास हिंदी साहित्य का एक कालजयी व्यंग्य उपन्यास है. साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजे गये श्रीलाल शुक्ल के इस उपन्यास में शिवपालगंज के बहाने गांव की राजनीति और गुटबाजी को बखूबी बयां किया गया है. यह उपन्यास पढ़कर आपको पता चलेगा कि कैसे ‘भारत की प्रगति का पहिया फाइलों के नीचे दबा हुआ है.’

शेखर एक जीवनी

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का यह उपन्यास शेखर के बचपन से लेकर उसके युवावस्था तक के मानसिक और बौद्धिक विकास की यात्रा है. इस यात्रा में स्वतंत्रता एक अहम पहलू है, फिर चाहे वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता हो या सामाजिक एवं राजनीतिक स्वतंत्रता. युवा पाठकों के लिए तो यह एक बेहद मुफीद उपन्यास है.  

कितने पाकिस्तान

इतिहास के पन्नों में झांकते हुए सांप्रदायिकता, धर्म और इंसानियत के सवालों के जवाब ढूंढता कमलेश्वर का यह उपन्यास पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. यह लेखक की कल्पना और यथार्थ का एक अद्भुत मेल है, जो विभाजन की त्रासदी के साथ आये सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की बात करता है.  

खिलेगा तो देखेंगे

यूं तो विनोद कुमार शुक्ल का सबसे लोकप्रिय उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ है, लेकिन ‘खिलेगा तो देखेंगे’ उससे पहले पढ़े जाने की दरकार रखने वाला एक जरूरी उपन्यास है, जो बताता है कि प्रकृति, सरलता और अभाव के बीच जीवन कितना शांत और सुखमय हो सकता है. यह बताता है कि जिंदगी की असल खूबसूरती प्रतीक्षा में है और खुशी बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि हमारे देखने के नजरिये और आपसी संबंधों की गर्माहट में होती है.

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Preeti Singh Parihar

लेखक के बारे में

By Preeti Singh Parihar

Senior Copywriter, 15 years experience in journalism. Have a good experience in Hindi Literature, Education, Travel & Lifestyle...

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