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जन्मदिन पर विशेष : जब हरिवंश राय बच्चन की कविता सुन रो पड़ीं थी तेजी और ...

Updated at : 27 Nov 2017 11:36 AM (IST)
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जन्मदिन पर विशेष : जब हरिवंश राय बच्चन की कविता सुन रो पड़ीं थी तेजी और ...

हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन" हिंदी भाषा साहित्य के स्तंभों में से एक हैं, आज उनकी जयंती है. बच्चन साहब को ‘हालावाद’ का प्रवर्तक माना जाता है, वे हिंदी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं. उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है. बच्चन जी की गिनती हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों […]

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हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन" हिंदी भाषा साहित्य के स्तंभों में से एक हैं, आज उनकी जयंती है. बच्चन साहब को ‘हालावाद’ का प्रवर्तक माना जाता है, वे हिंदी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं. उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है. बच्चन जी की गिनती हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है. उनकी जयंती पर आज उनके जीवन का एक रोचक प्रसंग याद आता है. हरिवंश राय की पहली पत्नी श्यामा का निधन हो चुका था. ऐसे में वे अकेले हो गये थे. अपनी आत्मकथा क्या भूलूं क्या याद करूं में हरिवंश राय बच्चन ने तेजी बच्चन से अपनी मुलाकात का जिक्र किया है. वे अपने दोस्त प्रकाश के घर बरेली गये थे. यहां उनकी मुलाकात तेजी सूरी से हुई और उनके प्रेम संबंधों की शुरुआत हुई.

अपनी आत्मकथा क्या भूलूं क्या याद करूं में वे लिखते हैं-“वो 31 दिसंबर की रात थी. सभी ने इच्‍छा जाहिर की कि नया साल मेरे काव्‍य पाठ से शुरू हो. आधी रात बीत चुकी थी, मैंने केवल एक-दो कविताएं सुनाने का वादा किया था. सबने ‘क्‍या करुं संवेदना लेकर तुम्‍हारी’ वाला गीत सुनना चाहा, जिसे मैं सुबह सुना चुका था. ये कविता मैंने बड़े सिनिकल मूड में लिखी थी. मैंने गीत सुनाना शुरू किया. मैं एक पलंग पर मैं बैठा था, मेरे सामने प्रकाश बैठे थे और मिस तेजी सूरी उनके पीछे खड़ी थीं.

गीत सुनाते-सुनाते न जाने मेरी आवाज में कहां से वेदना भर आयी. मैंने ‘उस नयन से बह सकी कब इस नयन की अश्रु-धारा..’ लाइन पढ़ी ही थी कि मिस सूरी की आंखें नम हो गयीं और उनके आंसू टप-टप प्रकाश के कंधे पर गिर रहे थे. ये देखकर मेरा गला भर आता है. मेरा गला रुंध जाता है. मेरे भी आंसू नहीं रुक रहे थे. ऐसा लगा मानो, मिस सूरी की आखों से गंगा-जमुना बह चली है और मेरे आंखों से जैसे सरस्‍वती.”

हरिवंश राय बच्चन और तेजी सूरी की यह मुलाकात ऐसी हुई कि दोनों पति-पत्नी बन गये और आजीवन साथ रहे. तेजी बच्चन रंगमंच और गायन से जुड़ी थीं. इनके दो पुत्र हुए अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन.
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