Vinesh Phogat Retirement : विनेश फोगाट ने लिया संन्यास, पहलवान ने हमेशा किया संघर्ष
Vinesh Phogat : विनेश फोगाट हरियाणा के छोटे से गांव चरखी दादरी की रहने वाली हैं. उनके परिवार में कई पहलवान हैं और उनके पिता राजपाल फोगाट खुद एक पहलवान थे. उनकी दो चचेरी बहनें गीता और बबिता काॅमनवेल्थ गेम में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. उनके गांव में लड़कियों का पहलवान बनना अच्छा नहीं माना जाता था, लेकिन उनके चाचा और पिता ने समुदाय के खिलाफ जाकर अपनी बेटियों को पहलवानी सिखाई.
Vinesh Phogat Retirement : पेरिस ओलंपिक से अयोग्य घोषित होने के बाद निराश और दुखी भारतीय पहलवान विनेश फोगट ने गुरुवार को कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी. उन्होंने भावुक सोशल मीडिया पोस्ट में मां को याद किया. उन्होंने लिखा कि उनकी हिम्मत टूट चुकी है. विनेश फोगाट ने संन्यास का एलान करते हुए अपने करोड़ों प्रशंसकों को चौंका दिया.
इससे पहले विनेश ने सोशल मीडिया पर एक भावुक मैसेज शेयर किया था. भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट ओलंपिक में अपना फाइनल मुकाबला नहीं खेल सकी क्योंकि उन्हें अयोग्य करार दिया गया. विनेश फोगाट का वजन 50 किलोग्राम से 100 ग्राम ज्यादा था, जिसकी वजह से उन्हें अयोग्य करार दिया गया. विनेश के अयोग्य होते ही करोड़ों भारतीयों के सपने चूर हो गए, जो मंगलवार की रात से परवान पर थे. विनेश फोगाट ने मंगलवार की रात को सेमीफाइनल मुकाबला जीतकर 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में प्रवेश किया था. अपनी इस जीत के साथ ही विनेश फोगाट पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई थीं, जो देश के लिए सोने का मुकाबला खेलने वाली थीं.
विनेश फोगाट हरियाणा के गांव चरखी दादरी की रहने वाली हैं
विनेश फोगाट हरियाणा के छोटे से गांव चरखी दादरी की रहने वाली हैं. उनके परिवार में कई पहलवान हैं और उनके पिता राजपाल फोगाट खुद एक पहलवान थे. उनकी दो चचेरी बहनें गीता और बबिता काॅमनवेल्थ गेम में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. उनके गांव में लड़कियों का पहलवान बनना अच्छा नहीं माना जाता था, लेकिन उनके चाचा और पिता ने समुदाय के खिलाफ जाकर अपनी बेटियों को पहलवानी सिखाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलवाई.
बचपन से ही सीखे पहलवानी के दावपेंच
विनेश फोगाट ने देश के लिए कई मैच खेले और पदक जीतकर आईं. 29 साल की विनेश फोगाट ने बचपन से ही पहलवानी के दावपेंच सीखें और देश को एशियन गेम्स 2018 में देश के लिए सोना जीता. इसके अलावा उन्होंने 2014 में 48 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था. वर्ल्ड चैंपियनशिप में विनेश फोगाट ने 2022 और 2019 में देश के लिए कांस्य पदक जीता था. यह दोनों पदक उन्होंने 53 किलोग्राम वर्ग के मुकाबले में हासिल किया था. काॅमनवेल्थ गेम्स 2014 में उन्हें 48 किलोग्राम, 2018 में 50 किलोग्राम और 2022 में 53 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक मिला था. इसके अलावा भी कई मुकाबलों में विनेश फोगाट का नाम रौशन किया था.
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पुराने दोस्त सोमवीर राठी से की शादी
विनेश फोगाट की शादी 13 दिसंबर 2018 में उनके पुराने दोस्त सोमवीर राठी से हुई है. सोमवीर राठी भी हरियाणा के ही रहने वाले हैं, दोनों ने एक दूसरे को काफी समय तक डेट किया था और उसके बाद शादी की. सोमवीर राठी ने भी राष्ट्रीय मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीता है. विनेश और सोमवीर रेलवे के कर्मचारी हैं और कामकाज के दौरान ही इनकी मुलाकात हुई थी और दोनों को प्यार हो गया, बाद में इन्होंने शादी कर ली.
बृजभूषण सिंह पर लगाया यौन शोषण का आरोप

विनेश फोगाट उस समय भी बहुत चर्चा में थी जब उन्होंने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया था. पहलवानों के इस आंदोलन को नेतृत्व करने वालों में विनेश फोगाट का नाम भी शामिल था. विनेश काफी दिनों तक इस आंदोलन का हिस्सा रही थीं. रियो ओलंपिक में 2016 के दौरान विनेश फोगाट को घुटने में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि उनका करियर समाप्त हो सकता है. लेकिन घुटने की सर्जरी के बाद विनेश फोगाट ने वापसी की और दिल्ली में 2017 में 55 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता. 2018 में काॅमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर विनेश ने तमाम आशंकाओं को खारिज कर दिया. अब जबकि विनेश फोगाट को अयोग्य करार दिया गया है, तो उम्मीद की जा रही है वो एक बार फिर इस सदमे से उबरेंगी और अपनी जीवटता से देश को पदक दिलाएंगी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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