Jharkhand : क्या झारखंड बन सकता है भारत का 'डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग' हब? विश्लेषण

Updated:
विज्ञापन

CM Hemant Soren, Sanjay Seth

Defence-Cluster-in-Jharkhand-Explainer पाकिस्तान के विदेश मंत्री का यह बयान कि "भारत को पूर्वी सीमा से हमले का सामना करना पड़ सकता है", अगर रक्षा की पर्याप्त तैयारी न हो, तो यह इलाका भारत के लिए युद्ध का नया मैदान बन सकता है. हालांकि, यहां कुछ मौके भी हैं. झारखंड में एक स्थिर सरकार है. सरकारों को ज़मीनी हकीकत समझने की ज़रूरत है.

विज्ञापन

Defence Cluster in Jharkhand : जोहार. आज 23 जून है. आज का लेख केवल एक आम राजनीतिक चर्चा नहीं है. यह कई अहम बातों को उजागर करने का एक मौका है. ऐसी बातें जिनमें गंभीर चिंतन और अपार अवसर, दोनों शामिल हैं. इसका संबंध भारत की पूर्वी सुरक्षा, औद्योगिक तैयारी और स्थानीय अवसरों के भविष्य से है. साथ ही, यह बांग्लादेश में बदलते सियासी माहौल और भारत-बांग्लादेश संबंधों के बिगड़ते स्तर पर भी बात करता है. 

नतीजतन, पूर्वी सीमा पर बढ़ते सुरक्षा दबावों के कारण झारखंड जैसे राज्य को नए सिरे से देखने की ज़रूरत है. हालांकि झारखंड की सीमा किसी दूसरे देश से नहीं लगती. फिर भी हमें उस स्थिति पर विचार करना चाहिए जब भारत को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. आने वाले वर्षों में, पश्चिमी सरहद के साथ-साथ पूर्वी मोर्चे पर भी हमलों का खतरा हो सकता है. ऐसी स्थिति में, केवल सैन्य कार्रवाई काफी नहीं होगी; बल्कि औद्योगिक तैयारी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्थानीय बुनियादी ढाँचे में सुधार भी उतने ही ज़रूरी होंगे. 

इस संदर्भ में, झारखंड का विशेष महत्व है. इसकी खनिज संपदा, औद्योगिक आधार, कुशल मानव संसाधन और रक्षा निर्माण क्षमताएँ अपार संभावनाओं को दर्शाती हैं, जो इस राज्य को भविष्य के राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे का एक संभावित स्तंभ बनाती हैं.

बांग्लादेश और पूर्वी सीमा की त्रासदी

बांग्लादेश में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. तारीख थी 1 जुलाई 2024. हालात बिगड़ गए. ढाका में विरोध प्रदर्शन चरम पर पहुंच गया. प्रधानमंत्री हसीना को किसी तरह बचाया गया. तारीख थी 5 अगस्त 2024. फिर मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की कमान संभाली. अब तारीख थी 8 अगस्त 2024. तब से आज का दिन है, नई-दिल्ली और ढाका का रिश्ता डॉलर-रूपए जैसा हो गया है. दोनों, ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर चल रहें हैं.

बांग्लादेश के लोकल मुद्दे हमारे लिए सुरक्षा संकट में बदल गए हैं. नहीं तो बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन भला ये क्यों कहते, की यूनुस के राज में भारत के साथ संबंध खराब हो गए थे. यह फरवरी 2026 की बात है. अमेरिका के ईरान पर हमसे से पहले.

हालांकि, इसी दौर में ढाका ने रावलपिंडी के साथ अपने संबंध गहरे किए. राजनीतिक, व्यापार और रक्षा क्षेत्रों में, हर जगह. और रावलपिंडी मैंने यूं ही नहीं लिखा है. इस्लामाबाद और रावलपिंडी का शहमात जानने के लिए मेरी किताब पढ़ें.

यूनुस राज भारत के लिए चिंता का सबब बना हुआ था. खुफिया रिपोर्टों के हवाले से कुछ जानकारियां मिली. बांग्लादेशी अधिकारियों ने पाकिस्तानी जहाजों के लिए जरुरी चेकिंग को ख़त्म कर दिया. लोडिंग के बाद की जांच को हटा दिया. और पाकिस्तानी वीजा आवेदकों के लिए सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता को हटा दिया. बांग्लादेश वायु सेना (BAF) में गुप्त गतिविधियों की खबरें थीं. मामला पाकिस्तान से जा जुड़ा. पाकिस्तान ने इसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जोड़ा. आप बेहतर जानते हैं क्यों? TTP, BLA, आज़ादी…

पाकिस्तान की चेतावनी: पूर्वी सीमा पर हमले का खतरा

“भारत को भविष्य में अपनी पूर्वी सीमा पर हमले का सामना करना पड़ेगा.” पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का ये बयान भारत की चिंता बढ़ने के लिए काफी है. यह चेतावनी सिर्फ़ कहने भर की बात नहीं है. यह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की रणनीतिक सोच को दिखाती है. यह ऑपरेशन मई 2025 में चलाया गया था. जिसमें भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की जान गई थी) के जवाब में हमले किये थे. हमले पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हुए थे.

बांग्लादेश का सैन्य आधुनिकरण, आंच झारखण्ड तक

अब इसे भी समझिए. म्यांमार के साथ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा लगभग 271 किलोमीटर है. भारत के साथ यह 4000 किलोमीटर से ज़्यादा है. लेकिन, वे अपनी सुरक्षा को बढ़ा रहें हैं. भारत ने कभी बांग्लादेश पर हमला नहीं किया. हाँ, लेकिन इसे पाकिस्तान से आज़ाद जरूर कराया है. यह हैरानी की बात है कि बांग्लादेशी वायु सेना के आधुनिकीकरण और एयरस्ट्रिप (खासकर मयमनसिंह डिवीज़न में) के विकास की बात हो रही है. यह इलाका भारत के रणनीतिक रूप से संजीदा “चिकन्स नेक” या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है. यह भारत की मुख्य भूमि को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है.

पूर्वी सीमा की चिंता और झारखंड की नई भूमिका

इन घटनाओं को केवल बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीति या, भारत-बांग्लादेश संबंधों के उतार-चढ़ाव के रूप में देखना काफी नहीं होगा. बदलते समय के हिसाब से पिछले कुछ दशकों में पूर्वी भारत में असामान्य बदलाव दिखाई दिए हैं. ये नई-दिल्ली के लिए एक गंभीर संकेत हैं. सिलिगुड़ी कॉरिडोर के आसपास हलचल बढ़ रही है. बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ पिघली है. और स्थानीय शक्ति संतुलन में बदलाव. यह सब बताते हैं कि भारत की पूर्वी सीमा अब केवल डिप्लोमेसी का विषय नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुका है.

ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरता है कि यदि सैन्य दृष्टि से पूर्वी क्षेत्र का महत्व बढ़ रहा है, तो भारत की तैयारी कहां है? क्या देश की रक्षा और औद्योगिक संरचना अभी भी पश्चिमी सीमा के अनुभवों पर आधारित रहेगी, या पूर्वी भारत को भी राष्ट्रीय सुरक्षा की नई रणनीति में केंद्र स्थान मिलेगा?

यही से झारखंड की कहानी शुरू होती है. लंबे समय तक खनिज संपदा, स्टील उत्पादन और श्रम बल के रूप में जाना जाने वाला यह राज्य, अब एक नई भूमिका निभाने की क्षमता रखता है. बोकारो-जमशेदपुर का औद्योगिक आधार, ईस्टर्न कॉरिडोर जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग संभावनाएं और लेबर फाॅर्स इसे नागरिकता दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं.

यह केवल सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि आर्थिक अवसर का भी प्रश्न है. यदि पूर्वी भारत को आने वाले दशक की रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है, तो झारखंड को उस चुनौती के समाधान का हिस्सा भी बनाया जा सकता है. सवाल यह नहीं है कि खतरे मौजूद हैं या नहीं; सवाल यह है कि भारत अपनी तैयारी आज से शुरू करता है या संकट के इंतजार में बैठा रहता है.

रियलिटी चेक 1: झारखंड के लिए खतरे का आकलन 

युद्ध के एक नए मोर्चे की संभावना: अगर रक्षा की पर्याप्त तैयारी न हो, तो क्या झारखंड में युद्ध का एक नया मोर्चा खुल सकता है? यह सिर्फ़ काल्पनिक घबराहट की बात नहीं है, यह एक रणनीतिक संभावना है जिस पर नीति-निर्माताओं को ध्यान देना होगा।

इंडस्ट्रियल हब पर खतरे: भारत के पूर्वी औद्योगिक केंद्र को अभूतपूर्व जोखिम का सामना करना पड़ रहा है:

भारत का रक्षा भंडार: क्या पूर्वी सीमा तैयार है?

मौजूदा पूर्वी सीमा रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर:

भारत ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तीन पूरी तरह से चालू मिलिट्री गैरीसन (सैन्य ठिकाने) बनाकर अपनी पूर्वी सुरक्षा स्थिति को काफी मजबूत किया है: बमुनी (धुबरी, असम के पास), किशनगंज (बिहार), चोपड़ा (पश्चिम बंगाल).

एयर और मिसाइल डिफेंस शील्ड में ये शामिल हैं:

  • हाशिमारा एयरबेस से ऑपरेट होने वाले राफेल फाइटर जेट
  • तेज़ गति और सटीक हमले की क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल रेजिमेंट
  • S-400 ट्रायम्फ लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (पांच में से चार स्क्वाड्रन जून 2026 तक मिल जाएंगे)
  • MRSAM (मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल) और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम
  • झारखंड के देवघर में केंद्र सरकार ने ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की यूनिट स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी.

हालांकि, अभी भी कुछ बड़ी कमियां हैं:

1.   ड्रोन भंडार: आधुनिक युद्ध में दुश्मनों के खिलाफ डर पैदा करने के लिए, भारत को 100,000 कामिकेज़ ड्रोन (‘शाहेद 136’ जैसे) की ज़रूरत है. लेकिन मौजूदा खरीद योजनाओं में कुल मिलाकर सिर्फ़ 1,000 UAV शामिल हैं. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने भारत के आक्रामक हथियारों के भंडार में कम से कम 100,000 कामिकेज़ ड्रोन शामिल करने की पुरज़ोर वकालत की है. जिसका लक्ष्य मार्च 2027 तक उत्पादन पूरा करना है. कामिकेज़ (Kamikaze) ड्रोन, जिन्हें ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ या ‘सुसाइड ड्रोन’ भी कहा जाता है, ऐसे वन-वे (एकतरफ़ा) बिना पायलट वाले हवाई वाहन होते हैं जिनमें पहले से ही विस्फोटक लगे होते हैं. इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि ये हवा में मंडराते हुए किसी टारगेट का पता लगा सकें और सीधे उससे टकराकर फट सकें.

2.   ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ड्रोन की खरीद: सेना ने 1,000 सर्विलांस ड्रोन और 1,000 कामिकेज़ यूनिट खरीदने की योजना की घोषणा की, जिसकी कीमत ₹10,000–15,000 करोड़ है. लेकिन सेना की ज़रूरत सालाना 50,000 यूनिट तक बढ़ सकती है.

3.   झारखंड में मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स: क्षमता होने के बावजूद, झारखंड में कोई बड़ा मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स नहीं है. DRDO के पूर्व अधिकारी कर्नल (रिटायर्ड) JK सिंह ने एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें झारखंड को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के संभावित केंद्र के तौर पर पहचाना गया है. उन्होंने जमशेदपुर-चाइबासा में आर्मर प्लेट फाउंड्री, आदित्यपुर में गोला-बारूद यूनिट और रांची और धनबाद में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाने की सिफारिश की है.

4.   फाइटर जेट की लैंडिंग के लिए एक्सप्रेसवे: उत्तर प्रदेश के उलट, जहां फाइटर जेट एक्सप्रेसवे पर उतर सकते हैं, झारखंड में ऐसा डुअल-यूज़ (दोहरे इस्तेमाल वाला) इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. 21 मई 2015 को, भारतीय वायु सेना (IAF) के मिराज 2000 फाइटर जेट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की.

आपदा में अवसर वाला रियलिटी चेक 2: झारखंड के लिए मौके

1.   स्थिर सरकारें: विज़न और महत्वाकांक्षाएं

झारखंड में अब लंबे समय के लिए स्थिर राज्य और केंद्र सरकारें हैं, जिससे एक लंबी अवधि का विज़न तैयार करना मुमकिन हो पाया है. झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार औद्योगिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाती है. और केंद्र सरकार में संजय सेठ (रक्षा राज्य मंत्री) से भी उम्मीदें बंधती है की इस क्षेत्र में झारखण्ड में कुछ विकास होगा.

2.   इंफ्रास्ट्रक्चर: झारखंड की स्ट्रेटेजिक एसेट्स

3.   लो-कॉस्ट डिटरेंस इक्विपमेंट: मॉडर्न वॉरफेयर का नया पैराडाइम

o   लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “लो-कॉस्ट ड्रोन्स और लोइटरिंग म्यूनिशन्स क्रिटिकल फोर्स मल्टीप्लायर्स के रूप में उभरे हैं”। यह बयान मॉडर्न वॉरफेयर के पैराडाइम शिफ्ट को दिखाता है, जो हाई-कॉस्ट ट्रेडिशनल सिस्टम्स से लो-कॉस्ट, मास-प्रोड्यूस्ड सिस्टम्स के ट्रांज़िशन को रिप्रेजेंट करता है। भारत ने इंडिजिनाइजेशन के लिए US$234 मिलियन (लगभग Rs. 2215 करोड़) ड्रोन इंसेंटिव प्रोग्राम अनाउंस किया, जो डोमेस्टिक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को एक्सीलरेट करेगा।

o   भारत का नया ड्रोन-सेंट्रिक मिलिट्री डॉक्ट्रिन मई 2025 वॉर के बाद कैपेबिलिटी, स्ट्रैटेजी और प्रिपेयर्डनेस में गैप्स को एक्सपोज़ करता है। रैपिड शिफ्ट टू ड्रोन-सेंट्रिक डॉक्ट्रिन गैप्स को एक्सपोज़ करता है, जो पॉलिसी मेकर्स को तुरंत एक्शन लेने की ज़रूरत को दिखाता है।

झारखंड की चौथी औद्योगिक नीति: रणनीतिक केंद्र के लिए कामिकेज़ ड्रोन विनिर्माण

झारखंड की चौथी औद्योगिक नीति (2021) कामिकेज़ ड्रोन निर्माण के लिए आदर्श आधार प्रदान करती है। नीति के मुख्य अंश:

1. प्रोत्साहन आधारित विनिर्माण नीति


2. खनिज आधारित विनिर्माण लाभ


3. स्टार्टअप नीति और प्रोत्साहन-लिंक्ड विनिर्माण

वर्तमान प्रगति: झारखंड में ड्रोन निर्माण के वास्तविक दुनिया के उदाहरण

  • रांची में समृद्धि इंफॉर्मेटिक्स कंपनी भारतीय सेना के लिए ड्रोन निर्माण कंपनी है, और बोकारो में प्लांट तैयार है – पहली शिपमेंट 100 ड्रोन्स की हो चुकी है.
  • सेना अनुबंध: भारतीय सेना के लिए निगरानी और आत्मघाती ड्रोन.
  • यह समृद्धि इंफॉर्मेटिक्स परियोजना झारखंड की चौथी औद्योगिक नीति के तहत पूंजी निवेश सब्सिडी और रोजगार सृजन प्रोत्साहन का लाभ ले रही है.

केंद्र सरकार की संबंधित नीतियां: रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण (Indigenisation) की क्रांति

1. रक्षा उत्पादन और संवर्धन नीति (DPPP) 2024

  • आयात पर रोक: 3,000 से अधिक रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक
  • PLI योजना: रक्षा विनिर्माण के लिए ₹7,000 करोड़ की PLI योजना
  •  विदेशी निवेश: ऑटोमैटिक रूट से 74% FDI

2. ड्रोन प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम (2025)

  • US$234 मिलियन का प्रोत्साहन कार्यक्रम: घरेलू ड्रोन विनिर्माण के लिए
  • R&D फंडिंग: ड्रोन तकनीक के लिए ₹500 करोड़
  • परीक्षण बुनियादी ढांचा: 5 ड्रोन परीक्षण केंद्र

3. रक्षा के लिए ‘मेक इन इंडिया’ सिद्धांत

  • प्राथमिकता वाला क्षेत्र: रक्षा विनिर्माण को प्राथमिकता वाला क्षेत्र घोषित करना
  • MSME सहायता: रक्षा क्षेत्र की MSME इकाइयों के लिए 15% सब्सिडी
  • आदिवासी क्षेत्रों की भागीदारी: आदिवासी क्षेत्रों में रक्षा विनिर्माण के लिए विशेष प्रोत्साहन

4. स्टार्टअप इंडिया रक्षा पहल

  • रक्षा स्टार्टअप फंड: ₹10,000 करोड़ का फंड
  • IPR सहायता: 100% IPR प्रतिपूर्ति (reimbursement)
  • बाजार तक पहुंच: सरकारी खरीद में प्राथमिकता

झारखण्ड सरकार की पहल

अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा: पूर्वी भारत के विनिर्माण भविष्य की नई धुरी

अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) भारत के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में से एक है. इस पहल के तहत, झारखंड के बोकारो में एक इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है. अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से 50,000 से ज़्यादा लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिलेगा. एक बड़े इंडस्ट्रियल हब के तौर पर, यहाँ पहले से ही ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. साथ ही, यह कोलकाता पोर्ट के पास है और यहाँ से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत तक आसानी से पहुँचा जा सकता है.

आगे का रास्ता: अब फैसले लेने का समय

झारखंड और बिहार आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं. बदलते भू-राजनीतिक माहौल और पूर्वी सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों के बीच केवल खतरे गिनाने से काम नहीं चलेगा. जरूरत है समय रहते तैयारी करने की.

यदि केंद्र और राज्य सरकारें रक्षा विनिर्माण, ड्रोन तकनीक, आधुनिक बुनियादी ढांचे और कौशल विकास पर ध्यान दें, तो यह क्षेत्र देश की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है. झारखंड के खनिज संसाधन, उपलब्ध भूमि और युवा आबादी इसे रक्षा उद्योग के लिए एक उपयुक्त केंद्र बना सकते हैं.

इसके साथ ही आदिवासी और सदान समुदायों को इस बदलाव का भागीदार बनाना भी जरूरी है. इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, नई तकनीकी क्षमताएँ विकसित होंगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. रक्षा क्षेत्र में निवेश केवल सुरक्षा को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पूर्वी भारत को केवल एक संवेदनशील सीमा क्षेत्र के रूप में देखा जाएगा, या उसे भारत के अगले रक्षा और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. आने वाले कुछ वर्षों में लिए गए फैसले इस प्रश्न का उत्तर तय करेंगे.

समय तेजी से बदल रहा है. ऐसे में दूरदर्शी नीति, मजबूत निवेश और स्पष्ट रणनीति ही झारखंड-बिहार को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकती है.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं:

इस अवसर पर उषा मार्टिन लिमिटेड के महाप्रन्धक (कॉर्पोरेट अफेयर्स, CSR एंड ESG & मीडिया रिलेशन्स) मयंक मुरारी का कहना है की “भारत की पूर्वी सीमा वर्तमान समय में अनेक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है. बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता, अवैध प्रवासन तथा सीमा प्रबंधन से जुड़े विवादों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है. दूसरी ओर, म्यांमार में जारी गृहयुद्ध और सैन्य शासन के विरुद्ध संघर्ष के कारण शरणार्थियों का प्रवाह, हथियारों की तस्करी तथा उग्रवादी गतिविधियों की आशंका बनी हुई है. पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर मणिपुर में जातीय तनाव और सीमापार प्रभावों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.

यद्यपि झारखंड किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा से नहीं जुड़ा है, फिर भी किसी व्यापक क्षेत्रीय संकट की स्थिति में इसकी सामरिक और आर्थिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है. राज्य में स्थित बोकारो स्टील प्लांट, कोयला खदानें, ताप एवं जल विद्युत परियोजनाएँ, रेलवे नेटवर्क तथा खनिजआधारित उद्योग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र के लिए आवश्यक आधार प्रदान करते हैं. संकट के समय इन संसाधनों की मांग और महत्व दोनों बढ़ सकते हैं.

ऐसी परिस्थितियों में झारखंड को अपनी नागरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा औद्योगिक अवसंरचना की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी. जिला स्तर पर संकट प्रबंधन तंत्र, अस्पतालों की आपात तैयारी, संचार एवं ऊर्जा प्रणालियों के बैकअप तथा आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है.

पूर्वी सीमा पर संकट गहराने की स्थिति में झारखंड प्रत्यक्ष युद्धक्षेत्र नहीं बनेगा, बल्कि भारत के लिए ऊर्जा, इस्पात, खनिज और परिवहन संसाधनों के एक महत्वपूर्ण सामरिक समर्थन केंद्र के रूप में उभर सकता है. राज्य की तैयारी और संसाधन क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. सोढ़ी के अनुसार “झारखंड एक लैंडलॉक राज्य है, जिसकी सीमा किसी भी दूसरे देश से नहीं लगती है. इसलिए, झारखंड को कोई तुरंत खतरा नहीं है. लेकिन, रणनीतिक नज़रिए से इसकी लोकेशन बहुत अहम है और यह नॉर्थईस्ट इंडिया को जोड़ने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर से ज़्यादा दूर नहीं है. इसीलिए, झारखंड में मिलिट्रीइंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स बनाना ज़रूरी है, जिससे ड्रोन बनाने और AI के विकास जैसे काम हो सकें. झारखंड के लोग मेहनती हैं, इसलिए उन्हें भी नौकरी और देश की सेवा करने का मौका मिलेगा.

दूसरी बात, चीन और पाकिस्तान की बढ़ती मिलीभगत से दो तरफा युद्ध (टूफ्रंट वॉर) के हालात बन सकते हैं. हो सकता है कि बांग्लादेश भारत के लिए कोई नया मोर्चा खोले, लेकिन हमें सबसे बुरे हालात के लिए भी तैयार रहना चाहिए. इस मामले में झारखंड की लोकेशन बहुत अच्छी है, क्योंकि इससे बॉर्डर वाले इलाकों तक लॉजिस्टिक्स की चेन छोटी हो जाएगी.

इंडियन एयर फ़ोर्स की रिटायर्ड विंग कमांडर और वोरान प्राइवेट लिमिटेड की COO, आकांक्षा पांडेय ने कहा कि “झारखंड ज़मीन से घिरा हुआ (लैंडलॉक) राज्य है. इसकी सीमा बांग्लादेश, म्यांमार या चीन से नहीं लगती है. अस्थिरता मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम, मेघालय, मिज़ोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश यानी असल पूर्वोत्तर और पूर्वी सीमावर्ती राज्यों में है.

हवाई हमले का खतरा नहींबल्कि ज़्यादा वास्तविक खतरा यह है कि बांग्लादेश में मौजूद हथियारबंद गुटों और पूर्वोत्तर के उग्रवादी समूहों के बीच हथियारों की तस्करी और फ़ंड जुटाने में सहयोग, पहले से मौजूद माओवादी नेटवर्क के ज़रिए झारखंड तक फैल सकता है. अप्रैल 2026 में चतराहज़ारीबाग़ सीमा पर हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने चार माओवादियों को मार गिराया, जिससे पता चलता है कि राज्य का आंतरिक सुरक्षा ढांचा अभी भी सक्रिय है, भले ही इसे नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया हो.

पूर्वी सिंहभूम ज़िले में जादूगोड़ा की भूमिगत खदान भारत के परमाणु रिएक्टरों के लिए कच्चा माल सप्लाई करती है. भारत का यूरेनियम उत्पादन लगभग पूरी तरह से झारखंड में ही होता है, जिसमें जादूगोड़ा, बगजाता, नरवापहाड़, तुरामडीह, मोहलडीह, भाटिन और बंदुहुरंग शामिल हैं. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए परमाणुईंधन चेन का एक अहम हिस्सा है.

राज्य सरकार अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमोट कर रही है: दावोस 2026 और यूके में, झारखंड खुद को अहम खनिजों — जैसे लौह अयस्क, तांबा, कोयला, बॉक्साइट, यूरेनियम, चूना पत्थर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिज — के केंद्र के तौर पर पेश कर रहा है. ये खनिज रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़रूरी हैं.”

यह भी पढ़ें : एक सा चेहरा, बोली, खाना और इतिहास: भोले भारत ने कभी पाकिस्तानी एजेंडा नहीं समझा

विज्ञापन
Achal Priyadarshy

लेखक के बारे में

By Achal Priyadarshy

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 31 पुस्तकों के लेखक हैं। उन्होंने अपने अकादमिक और बौद्धिक जीवन में भारत की जनजातीय परंपराओं, ज्ञान प्रणालियों और वैश्विक राजनीति को केंद्र में रखा है। इन्होंने ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI), रांची तथा झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक “Tribal Bravehearts” के लिए "शब्द-शिल्पी सम्मान" से सम्मानित किया गया। शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola