Mughal Harem Stories : मुगल हरम में राजा से अधिक किन्नरों का चलता था राज, राजकुमारियों के थे खास; लेकिन प्रेम की सजा थी मौत

Edited by Rajneesh Anand
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मुगल हरम में किन्नर

Mughal Harem Stories : मुगल हरम में शासन राजा का चलता था, उसके बाद अगर किसी का महत्व बहुत अधिक था, तो वे किन्नर. हरम की औरतें राजा से प्रेम तो बहुत करती थीं, लेकिन किन्नर वो जरिया था, जो उनके अधूरे सपनों को पूरा करते थे. इस वजह से हरम की औरतें किन्नरों से खासा लगाव रखती थीं. मुगल हरम पर लिखी किताब में इतिहासकार किशोरी शरण लाल लिखते हैं कि कुछ किन्नर बहुत सुंदर थे; वे दाढ़ी नहीं रखते थे. उन्हें उनकी त्वचा के रंग के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था जैसे संदली (चंदन के रंग का), बादामी (बादाम के रंग का) और काफूरी (कपूर के रंग का). काफूरी बहुत गोरे थे जैसा कि उनके नामकरण से पता चलता है.

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Mughal Harem Stories : मुगल हरम इतिहास की ऐसी जगह है, जहां शानो-शौकत है. प्रेम है, नफरत भी है. साजिश है, राजनीति है और दुख भी बहुत है. कुल मिलाकार मुगल हरम ऐसी जगह है जहां कई रहस्य हैं. हरम का सिरमौर बादशाह होता है और हरम में उसकी पसंदीदा औरतें रहती थीं. पसंदीदा महिलाओं में उनकी मां से लेकर बेटी तक होती थी, कहने का आशय यह है कि हरम सिर्फ राजा की रानियों के लिए ही नहीं था, इस जगह में उसकी मां और बेटी भी रहती थी, जिनसे वह बहुत प्रेम करता था. इतनी खास और रहस्यमयी जगह की सुरक्षा की जिम्मेदारी राजा ने वीर पुरुषों को नहीं बल्कि ताकतवर हिजड़ों को सौंप रखा था.

किन्नरों के हवाले क्यों होता था हरम?

कोई भी राजा हरम तब आता था जब उसे सुख की चाह होती थी. बाकी समय वह राजनीतिक कामकाज में व्यस्त होता था. इस वजह से कई बार ऐसा भी होता था कि राजा कई दिनों तक हरम नहीं आता था, उस स्थिति में रानियों से राजा का संपर्क नहीं होता था. चूंकि मुगल बादशाह अपनी रानियों को लेकर बहुत पसेजिव होते थे इसलिए वे यह बिलकुल भी नहीं चाहते थे उनके हरम में किसी पुरुष का प्रवेश हो. उन्हें इस बात की शंका रहती थी कि अगर रानियों से पुरुषों का संपर्क हुआ, तो रानियों से उनका संबंध स्थापित हो जाएगा. इस वजह से राजा ने सभी पुरुषों का हरम में प्रवेश वर्जित कर रखा था. सुरक्षा में भी पुरुषों की तैनाती नहीं की गई थी, बल्कि इसके लिए वैसे हिजड़ों यानी किन्नरों का प्रयोग किया गया था, जो शरीर से काफी मजबूत होते थे. इनमें सबसे ज्यादा वैसे किन्नर होते थे, जो पुरुष होते थे और उनका बधियाकरण उन्हें किन्नर बनाया जाता था.

किन्नरों से भी हरम की औरतों के बन जाते थे संबंध?

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मुगल हरम में राजकुमारियोें और किन्नर की निकटता

मुगल बादशाह ने हरम की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी किन्नरों को सौंप रखी थी. जितना राजा उनसे स्नेह रखते थे, रानियां भी उनसे काफी अपनापन रखती थीं. ये किन्नर रानियों के बहुत खास होते थे, इसकी वजह यह थी कि ये किन्नर ही वो जरिया थे, जिनके जरिए हरम की औरतें अपनी ख्वाहिशों को पूरा करती थीं. किन्नर के पास सुरक्षा की तमाम जिम्मेदारी होती थी, इसलिए औरतें प्रेम संबंध को पूरा करने के लिए उनकी मदद लेती थीं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादातर किन्नर पहले पुरुष हुआ करते थे, सिर्फ बधियाकरण के द्वारा उन्हें किन्नर बनाया जाता था. इस वजह से वे भावनात्मक रूप से महिलाओं के साथ लगाव रखते थे. हरम की महिलाएं भी इस तरह के लगाव की उम्मीद करती थीं, इसलिए हरम की कई औरतों के संबंध किन्नरों से रहे.

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हरम की औरतों से संबंध बनाने पर किन्नरों को मिलती थी सजा

हरम में किन्नरों को बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था. उन्हें खान की उपाधि दी जाती थी. किन्नरों को प्रशासक, गवर्नर, सेना कमांडर और मनसबदार के पद पर नियुक्त किया जाता था. उन्हें पुरुषों की तरह ही ट्रीट किया जाता था. इतिहासकार किशोरी शरण लाल ने अपनी किताब The Mughal Harem में लिखा है कि इटली के लेखक और यात्री निकोलाओ मनुची ने जो किन्नरों का जिक्र किया है उनके सभी नाम पुरुषों के हैं जैसे दानिश, दानियाल, दौलत, युसूफ, अलमान, मकबूल. किसी भी किन्नर को बानू, बेगम या बाई के नाम से संबोधित नहीं किया जाता था. इस वजह से किन्नरों में पुरुषों की भावनाएं ही प्राथमिक होती थीं. अगर किसी किन्नर को किसी महिला से नजदीकी हो जाती थी तो उसे सजा दी जाती थी.

किशोरी शरण लाल लिखते हैं कि एक किन्नर के साथ एक कुलीन स्त्री को नजदीकी बनाते देखा गया था, तो उसे तीन दिन और दो रात तक जमीन में दबा दिया गया था. उसके हाथ से ऊपर का हिस्सा तपती धूप में जल रहा था और पूरा शरीर मिट्टी में दबा हुआ था. अगर इसके बाद भी वह स्त्री बच जाती तो उसे माफ कर दिया जाता था, लेकिन किन्नर को हाथी के पैरों तले दबा दिया गया था. एक अन्य घटना कुछ ऐसी है कि जहांगीर ने एक हिजड़े को अपनी एक त्यागी हुई महिला को चूमते हुए पकड़ लिया था. इस घटना से वह इतना नाराज हुआ कि उसने उस औरत को जमीन में गड़वा दिया, सिर्फ उसका सिर बाहर था और फिर उसके सामने ही किन्नर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे. इन घटनाओं के बावजूद हरम में किन्नरों का बहुत महत्व था और वे राजा और राजकुमारियों और रानियों के खास बने हुए थे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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