कौन हैं विष्णु गुप्ता, जिन्होंने अजमेर शरीफ को दरगाह नहीं संकटमोचन महादेव मंदिर बताया?

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Vishnu Gupta

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Ajmer Sharif Dargah : अजमेर शरीफ का दरगाह, दरगाह नहीं बल्कि संकटमोचन महादेव मंदिर है. यह दावा हमारा नहीं बल्कि हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता का है, जिन्होंने अपने दावे के पक्ष में अजमेर की अदालत में याचिका दाखिल किया है. हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता का दावा है कि उनका उद्देश्य देश में हिंदू धर्म का उत्थान करना है. वे शरिया कानून के खिलाफ हैं और लव जिहाद का अंत चाहते हैं.

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Ajmer Sharif Dargah : संभल के जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताकर कोर्ट में याचिका दाखिल करने और अदालत के आदेश पर सर्वे के दौरान हिंसा की खबरों के बीच 27 नवंबर को अजमेर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो ना सिर्फ लोगों को चौंका रही है बल्कि कई तरह के सवाल भी खड़े कर रही है. हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने यह दावा किया है कि अजमेर शरीफ का ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का दरगाह एक शिव मंदिर है और इसका सर्वे कराया जाना चाहिए. अजमेर की अदालत ने विष्णु गुप्ता की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है.

Video : दरगाह में मांगी पूजा की अनुमति

हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता का दावा है कि अजमेर का दरगाह दरअसल एक प्राचीन शिवमंदिर है. उन्होंने यह मांग की है कि दरगाह का नाम संकट मोचन महादेव कर दिया जाए और लोगों को यहां पूजा की अनुमति दी जाए. अजमेर की निचली अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और अजमेर शरीफ की दरगाह समिति को नोटिस जारी किया है और कहा है कि इस मामले में अब 20 दिसंबर को सुनवाई होगी.

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विष्णु गुप्ता के दावे ने देश में मचाया बवाल

अजमेर शरीफ दरगाह

हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में बाल कृष्ण की ओर से मुकदमा दाखिल किया है. उस वक्त भी वे चर्चा में थे और अब एक बार फिर वे अजमेर शरीफ को शिव मंदिर बताकर चर्चा में आ गए है. विष्णु गुप्ता ने हिंदू सेना की स्थापना हिंदू धर्म के उत्थान के लिए की है, ऐसा उनका दावा है. विष्णु गुप्ता का जन्म उत्तर प्रदेश के एटा में 10 अगस्त 1984 को हुआ है. हालांकि वे बचपन में ही पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए थे. 2011 में हिंदू सेना की स्थापना की और देशभर में इसकी शाखाएं स्थापित कीं. वे सात-आठ साल की उम्र में रामजन्मभूमि का हिस्सा बने थे. 2013 में उन्होंने नरेंद्र मोदी के समर्थन में बीजेपी के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी के घर के बाहर प्रदर्शन किया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं विष्णु गुप्ता

विष्णु गुप्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं और 2016 में उन्होंने ट्रंप की जीत के लिए हवन भी कराया था. उनका जन्मदिन मनाया था. विष्णु गुप्ता ने पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए भी प्रदर्शन किया है. वे बलूच समुदाय से एकजुटता का आह्वान करते हैं और उनकी स्वतंत्रता के लिए प्रदर्शन भी करते हैं. 2016 में इनकी सेना ने भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक वार्ता को समाप्त करने की मांग करते हुए दिल्ली के पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के क्षेत्रीय कार्यालय में तोड़-फोड़ की थी. 2015 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था क्योंकि उन्होंने पुलिस को यह झूठी सूचना दी थी कि केरला हाउस के कैंटीन में प्रतिबंधित मांस परोसा जा रहा है. 2014 में हिंदू सेना ने आम आदमी पार्टी के कार्यालय में तोड़फोड़ भी की थी. 2023 में हिंदू सेना की तरफ से यह कहा गया था कि वे इजरायल और हमास के बीच युद्ध में इजरायल के साथ हैं और हिंदू इजरायल के पक्ष में लड़ेंगे.

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का दरगाह

राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोइनुद्दीन की दरगाह है. इनके अनुयायियों की इनमें बहुत आस्था थी. बताया जाता है कि दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने उनकी दरगाह का निर्माण शुरू करवाया था, जिसे हुमायूं ने पूरा करवाया. चिश्ती के धर्म प्रचार के तरीके को भारत में स्वीकार किया गया और उनके प्रति लोगों की आस्था भी थी. आज भी उनके मजार पर हिंदू-मुसलमान दोनों समान श्रद्धा के साथ जाते हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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