Ajit Pawar Death : महाराष्ट्र के इन होनहार नेताओं को किसकी लगी नजर, एक के बाद एक की हुई मौत
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता जिन्हें असमय आ गई मौत.
Ajit Pawar Death : प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे, विलासराव देशमुख और अब अजित पवार की मौत ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े किए हैं और आम जनता यह सोच रही है कि आखिर महाराष्ट्र की राजनीति के इन सितारों को किसकी नजर लगी कि वे असमय चले गए. इन नेताओं का कद बहुत बड़ा था और संभावना थी कि वे अपना कद और भी बड़ा कर सकते थे, लेकिन किसी ना किसी दुर्घटना ने इन्हें वह अवसर नहीं दिया.
Ajit Pawar Death : एनसीपी के नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी बुधवार को मौत हो गई. उनकी मौत एक विमान दुर्घटना में हुई है. उस वक्त वे बारामती जा रहे थे और लैंडिंग के वक्त हादसा हुआ. अजित पवार, शरद पवार के भतीजे हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में उनका कद बहुत बड़ा है. वे बारामती विधानसभा से छह बार चुनाव जीते हैं. उनकी आयु 66 वर्ष थी. उनकी मौत के बाद देश के लोग हैरान हैं, क्योंकि जिस तरह पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र के दिग्गजों की मौत हुई है, वह परेशान करती है.
प्रमोद महाजन को भाई ने मारी गोली
प्रमोद महाजन बीजेपी के कद्दावर नेता थे और काफी कम समय में ही उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली थी. उन्होंने मात्र दो लोकसभा चुनाव लड़ा था और एक में वे जीते थे और दूसरा चुनाव वे हार गए थे. उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला था. 2006 में पारिवारिक विवाद की वजह से उनके अपने भाई प्रवीण महाजन ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. उस वक्त उनकी उम्र महज 57 वर्ष थी.
गोपीनाथ मुंडे की सड़क दुर्घटना में हुई मौत
गोपीनाथ मुंडे भी बीजेपी के काफी चर्चित नेता थे. वे रिश्ते में प्रमोद महाजन के जीजा थे. उनका व्यक्तित्व काफी प्रभावशाली था और वे आम लोगों को जोड़ने में सक्षम थे. महाराष्ट्र की राजनीति पर उनका बहुत प्रभाव भी था. मुंडे की मौत 2014 में दिल्ली एयरपोर्ट जाने के दौरान हुई सड़क दुर्घटना में हुई थी. वे नरेंद्र मोदी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे. जिस वक्त गोपीनाथ मुंडे की मौत हुई, वे 65 साल के थे.
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विलासराव देशमुख की मौत मल्टी आर्गन फेल होने से हुई
विलासराव देशमुख कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और वे दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रहे थे. वे केंद्र में भी कैबिनेट मंत्री रहे थे. उनका निधन 2012 में हुआ था. उस वक्त वे 67 वर्ष के थे. उनकी मौत किडनी की बीमारी के वजह से मल्टी आर्गन फेल होने की वजह से हुई थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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