धोनी ने कहा, मैं कप्तान बना तो रिस्पेक्ट पाने की कोशिश की, क्रिकेटर की बजाय इस रूप में याद किया जाना चाहता हूं

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 31 Oct 2023 1:29 PM

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महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि मैं शुरुआत से चाहता हूं कि लोग मुझे सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर के रूप में याद नहीं करें, मैं यह चाहता हूं कि लोग मुझ एक बेहतर इंसान के रूप में याद करें और एक बेहतर इंसान के रूप में पहचान बनाने की कोशिश आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है.

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आईसीसी विश्व कप 2023 अपने उफान पर है, ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने अपने निजी जीवन के कई रोचक किस्सों का जिक्र किया और कुछ इमोशनल बातें भी कीं. महेंद्र सिंह धोनी ने इंटरव्यू में कहा कि भारतीय इमोशनल होते हैं. हमारे देश में इमोशन का बहुत महत्व है, यह बात मैंने समझी और कभी भी किसी खिलाड़ी के इमोशन से नहीं खेला. जब आप सबका उद्देश्य एक है तो अगर आप किसी व्यक्ति को 30-40 लोगों के बीच उसकी कमी बताएंगे तो वो बुरा मान जाएगा, वो अच्छी बात को भी नहीं सुनेगा. इसलिए मैंने वन टू वन लोगों से बात की और उनकी कमियों में सुधार के सुझाव दिये. प्रेशर सिचुएशन में कई बार खिलाड़ी हनुमान की तरह हो जाता है और अपनी स्ट्रेंथ को भूल जाता है, तब उसे उसकी स्ट्रेंथ बतानी पड़ती है.

लोग मुझ एक बेहतर इंसान के रूप में याद करें
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धोनी ने बताया कि मैं कूल रहता हूं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं खुद को एक्सप्रेस नहीं कर पाता हूं. मैं खुद में रहने वाला इंसान हूं. जो परिस्थितियां होती हैं, उनमें मैं क्या कर सकता हूं मैं करने की कोशिश करता हूं. टीम को मेरी कितनी जरूरत है उस हिसाब से काम करना चाहता हूं. महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि मैं शुरुआत से चाहता हूं कि लोग मुझे सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर के रूप में याद नहीं करें, मैं यह चाहता हूं कि लोग मुझ एक बेहतर इंसान के रूप में याद करें और एक बेहतर इंसान के रूप में पहचान बनाने की कोशिश आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है. मैंने यह कोशिश हमेशा की है कि मैं एक बेहतर इंसान बनूं और इसी कोशिश में जुटा हूं.

महेंद्र सिंह ने बताया वे टेक सेवी क्यों नहीं
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महेंद्र सिंह ने बताया कि वे टेक सेवी नहीं हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि उनके पास फोन नहीं है. लेकिन वे अपने फोन से चिपके नहीं रहते हैं. वे फोन का ज्यादा इस्तेमाल रात के वक्त करते हैं, जब उन्हें फोन पर अलार्म लगाना पड़ता है. धोनी ने बताया कि मैं सोशल मीडिया में इसलिए ज्यादा समय इसलिए नहीं देता कि क्योंकि आखिरकार मैं इंसान हूं और लोगों की बेतुकी बातों का असर मुझपर होता है. मैं जानता हूं कि कुछ लोग मुझे पसंद करते हैं कुछ नहीं, लेकिन बेमतलब के कमेंट कई बार प्रदर्शन पर असर डालते हैं इसलिए मैं फोन से दूर रहता हूं.

कप्तान बनने पर मेरा व्यवहार नहीं बदला
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महेंद्र सिंह धोनी ने बताया कि जब मैं कप्तान बना तो मैंने यह कोशिश की कि टीम के मेंबर मुझ पर विश्वास करें और उनका रिस्पेक्ट मुझे मिले. मेरे साथ टीम में सीनियर भी थे. मैंने 2004 में डेब्यू किया था और 2007 में कप्तान बना, तो मैंने कभी किसी पर हावी होने की कोशिश नहीं की. जब वे कप्तान बने तो उन्हें इसका भरोसा नहीं था, क्योंकि वे झारखंड से आते हैं और उन्हें नेशनल खेल ने की भी उम्मीद नहीं थी, ऐसे में कप्तान बनना उनके लिए सरप्राइज था. लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं किया और वैसे ही ड्रेसिंग रूम में रहे जैसे एक खिलाड़ी के तौर पर रहते थे.

पैसे समस्या भी खड़ी करते हैं
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महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि जीवन में पैसों का महत्व है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पैसे क्यों चाहिए. किसी को पैसे अपने बच्चों के लिए चाहिए, किसी को भाई-बहनों के लिए और किसी को माता-पिता के लिए. जब तक पैसे जरूरत के लिए कमाए जाते हैं वो अच्छी चीज है, लेकिन जब पैसे सिर्फ पैसे बढ़ाने के लिए कमाए जाते हैं, तो वो चीज समस्या खड़ी करती है. अगर कोई अपनी सुविधा के लिए 10 रुपये को 25 में बदल रहा है तो वो ठीक है, लेकिन पैसे कमाने की दूसरी वजह मुझे ठीक नहीं लगती है.

मेरी वाली अलग है, यह सोचना बेकार
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महेंद्र सिंह धौनी ने अपनी निजी जीवन के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि उसकी पत्नी या गर्लफ्रेंड अलग तरह की है तो वो गलतफहमी में है. सबकी एक ही तरह की होती है. धोनी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पत्नी को यह फर्क नहीं पड़ता कि आप टीम के कप्तान हो या पूर्व कप्तान हो. वो आपको घर में अपने हिसाब से ही जगह देती है. वो घर में हंगामा खड़ा करके यह बताती है कि हंगामे को कंट्रोल कैसे किया जाता है. फिर धोनी ने बहुत अच्छे से बताया कि यह मजाक की बातें हैं, दरअसल पत्नी हो या मां, हमारे घर को चलाती हैं. पूरा परिवार संभालती हैं. मैं एक मीडिल क्लास फैमिली से हूं और मैंने देखा है कि किस प्रकार पापा सैलरी लाकर मां को दे देते थे, उसके बाद यह उनकी जिम्मेदारी थी कि घर कैसे चलेगा. बच्चे को चाॅकलेट खाना है, तो वो उसी पैसे से आएगा, फिर मां घर के बजट को देखते हुए सारे इंतजाम करती थी. मैं अपने फ्रस्ट्रेशन कई बार घर में निकाल देता हूं, जिसे वो झेलती है. यह सही आदत नहीं है, पर होता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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