बिरयानी के शौकीन हैं 'कैप्टन कूल' महेंद्र सिंह धोनी, लेकिन क्यों खा रहे हैं तंदूरी चिकन किया खुलासा
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 27 Oct 2023 2:00 PM
महेंद्र सिंह धोनी कहते हैं कि अगर आप कोलकाता जाते हैं, तो वहां बिरयानी का स्वाद एकदम अलग है, जब आप हैदराबाद जाते हैं तो वहां बिरयानी का स्वाद अलग होता है और वहीं जब आप तमिलनाडु आते हैं तो बिरयानी का स्वाद अलग होता है.
भारतीय क्रिकेट के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी बिरयानी के शौकीन हैं. वे अक्सर बिरयानी की तारीफ करते नजर आ जाते हैं. आज उन्होंने होम इंटीरियर कंपनी होमलेन के समिट में कहा कि उन्हें बिरयानी बहुत पसंद है लेकिन वे अभी तंदूरी चिकन मंगाएंगे खाने के लिए. उनसे जब पूछा गया कि वे बिरयानी को लेकर समझौता क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि समझौता नहीं लेकिन अपने देश में हर शहर में बिरयानी का स्वाद अलग है.

महेंद्र सिंह धोनी कहते हैं कि अगर आप कोलकाता जाते हैं, तो वहां बिरयानी का स्वाद एकदम अलग है, जब आप हैदराबाद जाते हैं तो वहां बिरयानी का स्वाद अलग होता है और वहीं जब आप तमिलनाडु आते हैं तो बिरयानी का स्वाद अलग होता है. होम इंटीरियर कंपनी होमलेन ने 2021 में ब्रांड एंबेसडर के रूप में क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के साथ तीन साल की रणनीतिक साझेदारी की है. धोनी होमलेन में इक्विटी के मालिक भी हैं हालांकि उनके निवेश का खुलासा नहीं किया गया है.

महेंद्र सिंह धोनी खाने-पीने के शौकीन हैं और वे अपने गृहनगर रांची में भी अक्सर खाते-पीते नजर आ जाते हैं. उनके बायोपिक में भी उन्हें अपने काॅलोनी के बाहर स्थित समोसा दुकान से समोसा खरीदते दिखाया गया है. महेंद्र धौनी अमिताभ बच्चन के भी बहुत बड़े फैन हैं, उनसे जब एक बार पूछा गया था कि वे एक से दस तक में किस-किस अभिनेता को रखते हैं, तो उन्होंने कहा था एक से 10 तक अमिताभ बच्चन.

ऐसी खबरें भी मीडिया में आई थीं कि 2014 में धोनी ने हैदराबाद में एक होटल सिर्फ इसलिए खाली कर दिया था क्योंकि उन्हें वहां अंबाती रायडू के घर से बनाकर लाया गया बिरयानी खाने नहीं दिया गया था. धोनी ने इसके लिए होटल प्रबंधन से आग्रह किया था, लेकिन जब उन्हें इजात नहीं मिली तो वे 180 कमरा खाली करवा कर दूसरे होटल चले गए थे.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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