सहयोग के रास्ते पर भारत-कनाडा

प्रधानमंत्री मोदी के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी
India-Canada : भारत और कनाडा के बीच संबंधों की गर्मजोशी के कई आयाम हैं. इनमें से एक आयाम व्यापारिक है. दोनों देश इस वर्ष के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को जल्द अंतिम रूप देंगे.
–डॉ संजय भारद्वाज-
(प्रोफेसर, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जेएनयू)
India-Canada : ईरान पर इस्राइल-अमेरिका के हमले के कारण पश्चिम एशिया में गहराते संकट के दौरान भारत और कनाडा के बीच हुए समझौते आपसी सहयोग और भरोसे के बारे में बताते हैं. ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की नीति दूसरे देशों को सचेत कर रही है. भारत और कनाडा की नजदीकी के पीछे भी यह अमेरिका रवैया काम कर रहा है. ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने के साथ कनाडा पर भी टैरिफ बढ़ाया.
ऐसे में, दोनों देशों को साथ आने का अवसर मिला. अमेरिका के साथ संबंधों की अस्थिरता के कारण कनाडा अब अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में विविधता लाना चाहता है. कनाडा के निर्यातक अपने वस्तु निर्यात के लिए अमेरिकी बाजारों पर अत्यधिक निर्भर हैं. ऐसे में, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी नये बाजार की तलाश कर अमेरिका पर कनाडा की आर्थिक निर्भरता कम करने के प्रयास में लगे हैं. भारत-कनाडा के हित आपस में मिलते भी हैं और अमेरिकी टैरिफ आक्रामकता के दौर में दोनों ने अपने व्यापार को विस्तार और विविधता देने के बारे में सोचा है. कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के प्रति कनाडा की नीति भी बदली है.
भारत और कनाडा के बीच संबंधों की गर्मजोशी के कई आयाम हैं. इनमें से एक आयाम व्यापारिक है. दोनों देश इस वर्ष के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को जल्द अंतिम रूप देंगे. दोनों 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं. परमाणु क्षेत्र में सहयोग और यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए दोनों देशों ने 2.6 अरब डॉलर के एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये. इसके तहत कनाडा भारत को दस साल तक यूरेनियम की आपूर्ति करेगा. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी के बीच वार्ता के बाद यह फैसला लिया गया.
स्वच्छ ऊर्जा दरअसल दोनों देशों की प्राथमिकता है. यूरेनियम समझौते से भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए लंबे समय तक ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी. भारत और कनाडा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स और एडवांस्ड रिएक्टर्स पर भी मिलकर काम करेंगे. महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मजबूत आपूर्ति शृंखला बनाने की दिशा में भी दोनों देशों ने कदम उठाये हैं. कनाडा की नवाचार क्षमता और भारत की विस्तार क्षमता को मिलाकर बैटरी और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है.
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, एआइ के क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए एआइ इनोवेशन सैंडबॉक्स स्थापित किये जा सकते हैं. विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी-खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग-में कनाडा की तकनीक और भारत के पैमाने को जोड़कर वैश्विक मूल्य शृंखलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है. ऐसे ही, खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन और फूड टेस्टिंग लैब्स तेजी से विकसित हो रहे हैं. इसी तरह, कनाडा के पेंशन फंड भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं. दोनों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर भी सहमति जतायी है.
भारत-कनाडा सीइओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा जीवंत लोकतंत्र हैं, विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और साझा मूल्यों पर आधारित समाज हैं. लोकतंत्र, विविधता और विकास हमें स्वाभाविक साझेदार के रूप में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा, ‘यह केवल रिश्तों का नवीकरण नहीं है, बल्कि यह नयी महत्वाकांक्षा, ध्यान और दूरदर्शिता के साथ एक मूल्यवान साझेदारी का विस्तार है. यह दो आत्मविश्वासी देशों के बीच एक साझेदारी है, जो भविष्य के लिए अपना मार्ग स्वयं निर्धारित कर रहे हैं.’
भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी तो कनाडा में रहती ही है, अमेरिका द्वारा अपनी वीजा नीति सख्त किये जाने के बाद कनाडा भारतीय छात्रों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में भी उभर रहा है. प्रधानमंत्री कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि कनाडाई विश्वविद्यालय भारत में नयी टैलेंट पार्टनरशिप शुरू कर रहे हैं, जो छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान करेगी और प्रशांत क्षेत्र के दोनों देशों के विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों को और मजबूत बनायेगी. इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय और कनाडाई संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ाना और छात्रों को वैश्विक स्तर का अकादमिक एक्सपोजर देना है. इस पहल के तहत मैकगिल विश्वविद्यालय भारत में एआइ शिक्षा और शोध के लिए एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगा. इसके अतिरिक्त भारत और कनाडा के बीच रक्षा व सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर भी सहमति बनी है.
दोनों देश रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र की जागरूरता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेंगे. भारत और कनाडा, दोनों आतंकवाद और उग्रवाद का सामना करते आ रहे हैं. लेकिन इस मामले में दोनों के बीच फर्क है. वह यह कि कनाडा लंबे समय से खालिस्तानी उग्रवादियों की शरणस्थली रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री ट्रुडो अपने राजनीतिक लाभ के लिए खालिस्तानी तत्वों को प्रश्रय दिया करते थे. इसके अलावा, उनकी सरकार में भी भारत विरोधी सोच रखने वाले तत्व थे. सितंबर, 2023 में पूर्ववर्ती ट्रुडो सरकार द्वारा भारत पर यह आरोप लगाने से, कि भारतीय एजेंट खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल थे, दोतरफा संबंधों को करारा झटका लगा था.
भारत ने उस आरोप को बेतुका और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए दृढ़ता के साथ खंडन किया था. कार्नी सरकार का रवैया इस मामले में पूर्ववर्ती ट्रुडो सरकार से भिन्न है. फरवरी में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की कनाडा यात्रा के माध्यम से आपसी सुरक्षा सहयोग को मजबूती देने का काम हुआ. अब कनाडा में पनाह लेने वाले अपराधियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में भी भारत सरकार काम कर रही है. कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का जिक्र किये बगैर प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी रक्षा संबंधों के बारे में कहा कि हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता न केवल हमारे दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौतियां हैं. इन चुनौतियों के खिलाफ हमारा घनिष्ठ सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है. भारत कनाडा और यूरोपीय संघ से संबंध मजबूत करने सहित कई विकल्पों पर काम कर रहा है. यह भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में कारगर साबित होगा. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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