H-1B visa : निशाने पर भारतीय

Published by : संपादकीय Updated At : 22 Sep 2025 6:06 AM

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एच-1बी वीजा पर लागू की गयी भारी फीस

H-1B visa :अमेरिका में लगभग तीन लाख उच्च कुशल भारतीय कर्मचारी हैं. इनमें से ज्यादातर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में रहते हैं. एच-1बी वीजा की वजह से ही भारतीय-अमेरिकी अमेरिका में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और सबसे ज्यादा कमाने वाले लोगों में से हैं.

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H-1B visa : ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा पर लागू की गयी भारी फीस हैरान करने वाली है. सिर्फ यही नहीं कि अमेरिका द्वारा कुल जारी किये जाने वाले एच-1बी वीजा का 70 फीसदी भारतीय पेशेवरों को मिलने के कारण ट्रंप प्रशासन का यह ताजा कदम भारत को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि भारी टैरिफ और ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह पर लगाये गये प्रतिबंध के बाद अमेरिका द्वारा भारत को दिया गया यह तीसरा जबरदस्त झटका है.

अमेरिका हर साल लॉटरी सिस्टम से 85,000 पेशेवरों को एच-1बी वीजा देता है, जिनमें 70 फीसदी भारतीय होते हैं. यह वीजा अमेरिका में भारतीयों के लिए तरक्की का जरिया भी है. अमेरिका में लगभग तीन लाख उच्च कुशल भारतीय कर्मचारी हैं. इनमें से ज्यादातर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में रहते हैं. एच-1बी वीजा की वजह से ही भारतीय-अमेरिकी अमेरिका में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और सबसे ज्यादा कमाने वाले लोगों में से हैं.

अपने परिवारों के साथ अमेरिका में रहने वाले भारतीय अमेरिकियों की आबादी का एक चौथाई हिस्सा एच-1बी वीजाधारक हैं. इस वीजा से भारतीय कंपनियों को भी फायदा होता रहा है, क्योंकि यह भारतीय कंपनियों को अपने नये इंजीनियरों को अमेरिका भेजने में मदद करता था. अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियां भी ज्यादातर युवा भारतीय टैलेंट को अमेरिका ले जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करती हैं. पहले एच-1बी वीजा की फीस 215 डॉलर थी. साथ ही, 750 डॉलर और लगते थे. कुछ मामलों में यह फीस 5,000 डॉलर (करीब 4.5 लाख रुपये) से ज्यादा हो जाती थी, लेकिन अब कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मियों की नियुक्ति के लिए एक लाख डॉलर यानी 88 लाख रुपये देने होंगे.

जाहिर है, नयी फीस कई गुना ज्यादा है. यह फैसला एच-1बी वीजा कार्यक्रम को खत्म कर सकता है, क्योंकि यह शुल्क औसत वेतन से भी ज्यादा है. चूंकि अधिकतर टेक कंपनियां मिड लेवल प्रोफेशनल्स को एक लाख डॉलर से कम वेतन देती हैं, ऐसे में, वीजा पर एक लाख डॉलर खर्च करना कंपनियों पर बोझ बन सकता है. भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा. हालांकि यह फैसला भारत के लिए अवसर भी बन सकता है. जी-20 के पूर्व शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीइओ अमिताभ कांत का कहना है कि अमेरिका से लौटने वाले उच्च कुशल भारतीयों को नौकरी पर रखकर भारतीय कंपनियां नवाचार को नयी ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं, लेकिन फिलहाल तो ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता का ही कारण है.

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