मजबूत हुई भारत-ब्राजील की रणनीतिक साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुला
India-Brazil : अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद आक्रामक टैरिफ नीतियों ने विकासशील देशों पर अतिरिक्त दबाव डाला है. भारत और ब्राजील, दोनों ने इन नीतियों के असर को गहरे तौर पर महसूस किया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है.
India-Brazil : ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासिओ लुला डा सिल्वा की भारत यात्रा को भारत-ब्राजील संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाना चाहिए. यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दो प्रमुख उभरती शक्तियों द्वारा अपने संबंधों को नयी दिशा देने का स्पष्ट संकेत थी. नयी दिल्ली में संपन्न एआइ इंपैक्ट समिट में लुला की भागीदारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक वार्ता ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि दोनों देश अपने सामरिक साझेदारी ढांचे को एक अधिक व्यापक, बहुआयामी और भविष्योन्मुख सहयोग में परिवर्तित करना चाहते हैं.
ब्राजील के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हुई, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता, संरक्षणवाद और आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधानों से जूझ रही है.
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद आक्रामक टैरिफ नीतियों ने विकासशील देशों पर अतिरिक्त दबाव डाला है. भारत और ब्राजील, दोनों ने इन नीतियों के असर को गहरे तौर पर महसूस किया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है. ऐसे परिदृश्य में द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य केवल आर्थिक महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि रणनीतिक जरूरत भी है. वर्ष 2025 में लगभग 15 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार इस बात का संकेत है कि आधार मजबूत है, लेकिन उसे संस्थागत और संरचनात्मक समर्थन की आवश्यकता है. गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने, व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत-मर्कोसुर (दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख व्यापारिक-आर्थिक गुट)वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते के विस्तार की प्रतिबद्धता इसी दिशा में उठाया गया कदम है.
लुला की भारत यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू खनिज और इस्पात क्षेत्र में सहयोग पर बनी सहमति रहा. भारत आज अपनी अवसंरचना और औद्योगिकीकरण की महत्वाकांक्षी योजनाओं के कारण इस्पात उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है. इसके लिए कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति जरूरी है. ब्राजील विश्व के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादकों में एक है और उसके पास महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं. दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग से भारत को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. इस संदर्भ में खनन और खनिज सहयोग समझौता केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भू-आर्थिक रणनीति का हिस्सा है. यह समझौता अन्वेषण, निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और इस्पात अवसंरचना के विकास जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के दीर्घकालिक हित साध सकता है.
डिजिटल सहयोग भारत-ब्राजील साझेदारी का एक और केंद्रीय स्तंभ बनकर उभरा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और डाटा संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल यह दर्शाती है कि भारत और ब्राजील केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते. एआइ के वैश्विक शासन पर संयुक्त राष्ट्र के तहत नियमन की आवश्यकता पर बल देते हुए लुला का दृष्टिकोण भारत की उस सोच से मेल खाता है, जिसमें तकनीकी प्रगति को विकासोन्मुख और समावेशी बनाया जाना चाहिए. दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता जतायी है, जिससे कि वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में उनकी भूमिका सुदृढ़ हो सके. आपसी रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लुला की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम रहा.
स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव में सहयोग और रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने की पहल बताती है कि दोनों देश सामरिक स्वायत्तता को महत्व देते हैं. रक्षा उत्पादन में सह-निर्माण और तकनीकी साझेदारी से न केवल पारस्परिक विश्वास बढ़ेगा, बल्कि यह दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता निर्माण में भी सहायक होगा. आतंकवाद के विरुद्ध संयुक्त रुख तथा आतंकी वित्तपोषण व अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ सहयोग ने इस साझेदारी को सुरक्षा आयाम में भी सुदृढ़ किया है.
स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में साझा सहयोग भी उल्लेखनीय है. दोनों देशों के नियामक संस्थानों के बीच समझौते से दवाओं की उपलब्धता, अनुसंधान सहयोग और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रति समर्थन और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य की पुनर्पुष्टि से स्पष्ट है कि भारत और ब्राजील स्वास्थ्य को वैश्विक सार्वजनिक संपदा के रूप में देखते हैं.
ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी व्यापक साझा सहमति बनी है. ब्राजील जैव ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है, जबकि भारत सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है. हाइड्रोजन उत्पादन, सतत विमानन ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग से हरित औद्योगिकीकरण की दिशा में ठोस प्रगति संभव है. बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय लुला की इस यात्रा का एक राजनीतिक संदेश रहा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के लिए पारस्परिक समर्थन लंबे समय से दोनों देशों की प्राथमिकता रही है.
वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत यह दर्शाती है कि भारत और ब्राजील केवल क्षेत्रीय शक्तियां नहीं हैं, बल्कि दोनों वैश्विक विमर्श को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावना पर चर्चा और डॉलर निर्भरता को संतुलित करने की सोच इस दिशा में एक सावधानीपूर्ण, पर महत्वपूर्ण कदम है. लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के प्रयास भी इस साझेदारी को स्थायित्व प्रदान करेंगे.
लुला की यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश थी कि भारत और ब्राजील बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित करने के लिए तैयार हैं. आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी, रक्षा समन्वय, स्वास्थ्य सुरक्षा और बहुपक्षीय सुधार के साझा एजेंडे ने इस संबंध को नयी ऊंचाई दी है. यदि इन समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह साझेदारी वैश्विक दक्षिण के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है. बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और ब्राजील का निकट आना अधिक संतुलित और समावेशी विश्व व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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लेखक के बारे में
By आनंद कुमार
आनंद कुमार नई दिल्ली स्थित विश्लेषक हैं, जिनकी विशेषज्ञता रणनीतिक मामलों, सुरक्षा मुद्दों और दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में है। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित थिंक टैंकों में कार्य किया है। वे चार पुस्तकों के लेखक और दो संपादित ग्रंथों के संपादक हैं। उनकी नवीनतम पुस्तक Strategic Rebalancing: China and US Engagement with South Asia है।
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