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परियोजनाओं में देरी

Updated at : 21 Nov 2023 9:12 AM (IST)
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परियोजनाओं में देरी

ऐसी सूचनाओं के अभाव में परियोजनाओं का फिर से मूल्यांकन करना आवश्यक हो जाता है. इस तरह की गैर-जरूरी कवायदों में भी धन और समय का नुकसान होता है.

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देश में 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक की 837 परियोजनाओं का काम देरी से चल रहा है तथा 411 परियोजनाओं की लागत बढ़ चुकी है. भारत में ऐसी 1,788 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक है. केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर में इन परियोजनाओं की लागत में 4.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है. परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा होने में देरी से खर्च का बढ़ना स्वाभाविक है. उल्लेखनीय है कि ऐसी 209 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनके शुरू होने तथा उनके पूरे होने की अनुमानित अवधि का ब्यौरा मंत्रालय को मुहैया नहीं कराया गया है.

ऐसी सूचनाओं के अभाव में परियोजनाओं का फिर से मूल्यांकन करना आवश्यक हो जाता है. इस तरह की गैर-जरूरी कवायदों में भी धन और समय का नुकसान होता है. ऐसी परियोजनाएं भी बड़ी संख्या में है, जिनकी प्रगति या खर्च बढ़ने के बारे में मंत्रालय को समय से सूचित नहीं किया जाता है या सही जानकारी नहीं मुहैया करायी जाती है. चिंताजनक बात यह है कि देरी से चल रहीं 837 परियोजनाओं के लंबित होने की औसत अवधि 36.94 महीने है. ऐसी स्थिति में यह आशंका पैदा होती है कि देरी और खर्च का हिसाब बढ़ सकता है. उल्लेखनीय है कि पांच वर्ष पूर्व लंबित परियोजनाओं की संख्या 358 थी और खर्च में बढ़ोतरी 3.37 लाख करोड़ रुपये होने का आकलन किया गया था.

उस समय 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक की कुल 1,361 परियोजनाएं चल रही थीं. देश के विकास की गति को तेज करने में इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख भूमिका होती है. इस पर सरकार ने विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जिसके कारण परियोजनाओं की संख्या में बीते पांच वर्षों में उत्साहजनक वृद्धि हुई है. लेकिन अगर परियोजनाओं पर काम समय से पूरा नहीं होता है, तो खर्च बढ़ने के अलावा उसके फायदे मिलने में भी देरी होती है. इस तरह की देरी निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं को भी हतोत्साहित करती है. महामारी से भी परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं. बढ़ती लागत का एक प्रमुख कारण महंगाई है. इससे निर्माण सामग्री, श्रम और अन्य लागतों में वृद्धि हुई है. भूमि अधिग्रहण में देरी, वन एवं पर्यावरणीय मंजूरी में देरी और ढांचागत समर्थन के अभाव जैसी समस्याओं ने भी लागत को बढ़ाया है. विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किये गये हैं, लेकिन अगर भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करना है, तो इस चुनौती पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है.

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