फर्जी कंपनियों पर कड़ाई
Updated at : 13 Feb 2017 6:26 AM (IST)
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काला धन छुपाने, हवाला और कर चोरी जैसे अपराधों में फर्जी कंपनियों की बड़ी भूमिका होती है. नोटबंदी में रद्द करेंसी को बदलवाने में भी ऐसी कंपनियां सक्रिय रही हैं. सरकार ने एक विशेष दस्ता बनाकर इनकी जांच करने का निर्णय लिया है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में संबद्ध मंत्रालयों के अधिकारियों की बैठक में […]
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काला धन छुपाने, हवाला और कर चोरी जैसे अपराधों में फर्जी कंपनियों की बड़ी भूमिका होती है. नोटबंदी में रद्द करेंसी को बदलवाने में भी ऐसी कंपनियां सक्रिय रही हैं. सरकार ने एक विशेष दस्ता बनाकर इनकी जांच करने का निर्णय लिया है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में संबद्ध मंत्रालयों के अधिकारियों की बैठक में यह कड़ा कदम उठाया गया है. अभी 49 से अधिक कंपनियों पर धोखाधड़ी करने के आरोपों की जांच जारी है. इनके अलावा 559 लोगों पर हजारों करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है.
इस प्रक्रिया में अवैध लेन-देन में मदद देनेवाले 54 वित्तीय पेशेवर में जांच के घेरे में हैं. पुराने नोटों को बदलने में फर्जी और निष्क्रिय कंपनियों के खातों का भी इस्तेमाल हुआ है. वित्तीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार का यह कदम जरूरी है और उम्मीद है कि जल्दी जांच कर सजा देने का काम शुरू हो जायेगा ताकि ऐसी आपराधिक प्रवृत्तियों की रोकथाम हो सके. पर यह भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही हेराफेरी के मौके पैदा होते हैं. आंकड़ों के अनुसार, देश में पंजीकृत 15 लाख कंपनियों में से महज छह लाख कंपनियां ही अपने कारोबारी आय-व्यय का हिसाब जाहिर करती हैं.
इसका मतलब यह है कि आधी से अधिक कंपनियां बिना लेखा-जोखा बताये चल रही हैं.इन पर अवैध लेन-देन और लेखा-जोखा में हेरा-फेरी करने का संदेह है. यदि पहले से ही नियमों के तहत ऐसी कंपनियों को अपने रिटर्न नहीं भरने के लिए टोका जाता या उन पर कार्रवाई की जाती, तो आज यह नौबत नहीं आती. बजट में उल्लिखित सूचनाओं के मुताबिक, नोटबंदी के दौरान 1.09 करोड़ खातों में दो लाख से 80 लाख के बीच नकदी जमायी करायी गयी है जिसका औसत प्रति खाता पांच लाख से अधिक है.
इसी तरह, 1.48 लाख खातों में 80 लाख से अधिक रकम जमा की गयी थी जिसका औसत 3.31 करोड़ रुपया प्रति खाता है. इन खातों और कंपनियों की जांच से हवाला-तंत्र के खुलासे की उम्मीद है. पर, कानूनी पेंचों के चलते सरकार के सामने संदेहास्पद कंपनियों को फर्जी साबित करने की बड़ी चुनौती भी है.
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