नये शहरों से नयी उम्मीदें
Updated at : 11 Jan 2017 6:45 AM (IST)
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शहरों में बढ़ती आबादी के पीछे रोजगार और विकास की स्वाभाविक आकांक्षा है. बेहतर भविष्य की उम्मीद में पलायन कर हर साल शहरों और कस्बों में पहुंचनेवाले लोगों की संख्या एक करोड़ से अधिक है. लेकिन, इतने बड़े पलायन को संभालने के लिए मौजूदा व्यवस्थागत तैयारी में अनेक खामियां हैं. लगभग 37 करोड़ से अधिक […]
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शहरों में बढ़ती आबादी के पीछे रोजगार और विकास की स्वाभाविक आकांक्षा है. बेहतर भविष्य की उम्मीद में पलायन कर हर साल शहरों और कस्बों में पहुंचनेवाले लोगों की संख्या एक करोड़ से अधिक है. लेकिन, इतने बड़े पलायन को संभालने के लिए मौजूदा व्यवस्थागत तैयारी में अनेक खामियां हैं. लगभग 37 करोड़ से अधिक लोग शहरों में रहते हैं और अगले एक दशक में 30 करोड़ और लोग शहरी आबादी का हिस्सा बन जायेंगे. दुनिया के किसी अन्य देश की तुलना में भारत में शहरीकरण तेजी से हो रहा है. यह भी सच है कि देश को शहरीकृत कर देना एक रात की कहानी नहीं है. लेकिन, इतना तो तय है कि नये शहरों के समुचित विकास बिना देश के तरक्की की कल्पना निराधार है.
देश की पहली स्मार्ट सिटी ‘गिफ्ट सिटी’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही कहा है कि नये भारत के सपना को पूरा करने में नये शहरों की भूमिका महत्वपूर्ण है. शहरी जीवन की बेहतरी के लिए आवास के मामले को मौजूदा पंचवर्षीय योजना में सरकार द्वारा प्रमुखता देना प्रशंसनीय है. स्मार्ट सिटी योजना भी शहरों के उत्थान में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है. लेकिन, साथ ही यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शहरी आबादी मूलभूत सुविधाओं से युक्त, झुग्गी-झोपड़ियों से मुक्त हो और निचले तबकों के लिए बेहतर जीवन की समान संभावनाएं मौजूद हों. एप आधारित सुविधाओं को उपलब्ध कराना, पब्लिक वाइ-फाइ और शहरों का सौंदर्यीकरण जैसे कार्य सराहनीय हैं, लेकिन इससे पहले आबादी के बोझ से कराहते शहरों में स्वच्छ जल, बिजली आपूर्ति और कचरा प्रबंंधन की व्यवस्था को सुनिश्चित करना होगा.
पर्यावरण जनित समस्याएं, मसलन- कचरा प्रबंधन, जल निकासी, सफाई की व्यवस्था नहीं होने से न केवल जन-जीवन प्रभावित होता है, बल्कि विषाणुजनित संक्रमण, डेंगू, अस्थमा आदि बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है. शहरीकरण को सफल बनाने की पहली शर्त है कि ढांचागत सुविधाओं के साथ स्वच्छ पर्यावरण के लिए जन भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाये. ग्लोबल कमीशन ऑन इकोनॉमी एंड क्लाइमेट के एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शहरी प्रबंधन के नियमों के विपरीत शहरी आबादी अनियंत्रित तरीके से बढ़ रही है.
पर्याप्त पेयजल, सुचारू यातायात, बिजली की आपूर्ति नहीं होने के साथ पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. विश्व स्वास्थ संगठन भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण पर पहले ही चिंता जाहिर कर चुका है. स्मार्टसिटी का सपना वास्तुगत सौंदर्य की कवायदों में नहीं, बल्कि मूलभूत सुविधाओं में निहित होना चाहिए, जहां स्वच्छता, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, आवास आदि जिंदगी का जरूरी हिस्सा हों.
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