आभासी दुनिया और रिश्तों की रासलीला

Published at :15 Feb 2014 4:01 AM (IST)
विज्ञापन
आभासी दुनिया और रिश्तों की रासलीला

सत्यप्रकाश पाठक,प्रभात खबर, रांची बचपन में सुनते थे कि दुनिया माया है. लेकिन, आज का सच आभासी दुनिया (वचरुअल वर्ल्ड) है जिसकी माया असली दुनिया से कहीं बढ़ कर है. फेसबुक, ट्विटर पर बन-बिगड़ रहे रिश्ते हमारी असल जिंदगी के रिश्तों को किस तरह तार-तार कर रहे हैं, पूछिए मत. कई जोड़े तो आभासी दुनिया […]

विज्ञापन

सत्यप्रकाश पाठक,प्रभात खबर, रांची

बचपन में सुनते थे कि दुनिया माया है. लेकिन, आज का सच आभासी दुनिया (वचरुअल वर्ल्ड) है जिसकी माया असली दुनिया से कहीं बढ़ कर है. फेसबुक, ट्विटर पर बन-बिगड़ रहे रिश्ते हमारी असल जिंदगी के रिश्तों को किस तरह तार-तार कर रहे हैं, पूछिए मत. कई जोड़े तो आभासी दुनिया की लाइक/कमेंट की माया में अपना रिश्ता तोड़ एकाकी जीवन जी रहे हैं. कहते हैं, अकेला कहां हूं, मेरे फेसबुक फ्रेंड्स, मेरे फॉलोवर्स हैं न! फेसबुक से लेकर वाट्सएप तक रोज कमरा बंद कर घंटों चैट करते हैं. अब कौन समझाये कि कमरा बंद कर घरवालों से तो छुप जाते हैं, लेकिन साइट खुलते ही आपकी प्राइवेसी रही कहां? पूरी दुनिया देखती है आपकी हर हरकत. सोशल नेटवर्किग साइटों के साइड इफेक्ट की कुछ बानगियां पेश कर रहा हूं :

रांची की एक 12 साल की बच्ची अपने नाना-नानी के साथ झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास पहुंचती है, बताती है कि मां का फेसबुक फ्रेंड ठीक नहीं है. उसे परेशान करता है. मां अपनी बेटी की बात पर यकीन नहीं कर रही. उसकी नजर में दोस्त सही है और अपनी बेटी गलत. पति से पहले ही अलग हो चुकी है. उधर, दिल्ली के एक इंस्टीटय़ूट की कैंटीन में पिछले तीन घंटे से बैठी शीला मोबाइल कॉल इग्नोर कर रोमा से बातचीत में मशगूल है. थोड़ी देर बाद फिर कॉल आया, तो बोल दिया कि क्लास में पढ़ाई कर रही हूं. रोमा हैरान. रहा नहीं गया, तो पूछ लिया, किसका कॉल था.. कैंटीन में है, तो क्लास क्यों बोल दिया? पता चला प्रेमी बदल गया है. पहलेवाले का कॉल था, तो उसे इग्नोर कर रही है. कहती है : मैं चाहती हूं कि इस उपेक्षा से परेशान हो कर वह खुद रिश्ता तोड़ ले.

पटना के एक इंटरनेट कैफे में बैठा 50 साल का अधेड़ अरुण किसी लड़की से चैट में मशगूल है- हाय.. माइसेल्फ रोहन.. 32 ईयर्स ओल्ड.. सिंगल.. लुकिंग फॉर ट्र लव.. वर्किग एट मुंबई. देखा, साहब कैसा चौका मार रहे हैं.. तो भइया ये है मोबाइल और सोशल नेटवर्किग की आभासी दुनिया की हकीकत. जमीनी सच्चई से कोसों दूर. लबार की दुकान. जिसको इसका चस्का लग गया, समझो उसकी हो गयी रासलीला (गोलियों की नहीं, गोली देने की). बिना जरूरत झूठ बोलते चलेंगे. घर में बैठे हैं और बोलेंगे- शॉपिंग मॉल से निकल रहे हैं. बगल गली से नेताजी फोन कर बोलते हैं : दिल्ली में हूं, जरा मेरी एक प्रतिक्रिया छाप दीजिए. घंटे भर बाद नेताजी घर में दिख गये. हद तो तब हो गयी, जब हमारे एक घाघ सहकर्मी ने लड़की के नाम से फरजी फेसबुक एकाउंट बनाया. प्रोफाइल में एक खूबसूरत बाला का फोटो चस्पां कर दिया. झांसे में आ गये ऑफिस के ही बनवारी बाबू. पोस्ट पर लाइक/कमेंट से बात ई-मेल चैटिंग तक पहुंच गयी. बात तब खुली जब उन्होंने लड़की को प्रपोज किया. खूब हंसाई हुई.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola