संसद को अराजक होने से बचायें

लोकतंत्र में जनमत ही सर्वोच्च होता है. पर, उसकी अभिव्यक्ति के रूप एक से ज्यादा हैं. एक रूप है संसद, जो अपनी प्रकृति में सांस्थानिक और तयशुदा प्रक्रियाओं पर आधारित है. दूसरा रूप है जनांदोलन, जिसका उभार तात्कालिक होता है और बहुधा इसमें सुस्पष्ट विचार कम और भावनाओं का उबाल ज्यादा होता है. अन्ना आंदोलन […]
लोकतंत्र में जनमत ही सर्वोच्च होता है. पर, उसकी अभिव्यक्ति के रूप एक से ज्यादा हैं. एक रूप है संसद, जो अपनी प्रकृति में सांस्थानिक और तयशुदा प्रक्रियाओं पर आधारित है. दूसरा रूप है जनांदोलन, जिसका उभार तात्कालिक होता है और बहुधा इसमें सुस्पष्ट विचार कम और भावनाओं का उबाल ज्यादा होता है.
अन्ना आंदोलन के बाद फिर सवाल उठा कि जनमत के किस रूप को सर्वोच्च माना जाये-संसद को या जनांदोलनों को? व्यवस्था के भीतर निदान देखनेवाले बुद्धिजीवियों के बड़े तबके ने संसद को सर्वोच्च माना और जनांदोलनकारी रूप को अराजक बताया. मसलन, दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने रामलीला मैदान में जनलोकपाल बिल पास कराने की बात कही या दिल्ली पुलिस के प्रति शिकायतों के इजहार के लिए धरने पर बैठे, तो उन्हें अराजक करार दिया गया.
पर, अजब देखिये कि 15वीं लोकसभा के आखिरी संसद-सत्र में बीते दो दिनों की घटनाओं ने व्यवस्था बनाम अराजकता या फिर संसद बनाम सड़क के भेद को भुला दिया है. एक दिन पहले रेलमंत्री अंतरिम रेल-बजट का भाषण तेलंगाना मुद्दे पर सांसदों-मंत्रियों के भारी शोर के बीच पूरा नहीं पढ़ पाये, तो अगले दिन संसदीय कार्यवाही ने फ्रीस्टाइल कुश्ती का रूप ले लिया. तेलंगाना बिल को पेश करने के तुरंत बाद छीना-झपटी मची, फिर एक सांसद ने काली मिर्च पाउडर का स्प्रे कर दिया.
इससे खांसी व जलन से बेदम हुए कुछ सांसद अस्पताल में हैं. एक सांसद चाकू से शीशा तोड़ते भी पाये गये. तर्क कुंद हो जाये या न सुना जाये तो क्रोध का रूप ले लेता है और क्रोध ने ज्ञात इतिहास में ज्यादातर हिंसा का ही काम किया है.
आंध्र के एक हिस्से को तेलंगाना राज्य बनाने से असहमत सांसदों के तर्क कुंद हो चले हैं, उनका हिंसाचार इसी बात को साबित करता है. पर, इससे भी बड़ी बात यह है कि उनके मन में जनता के प्रति अविश्वास भरा है. अविश्वास यह कि उनके तर्को को कहीं जनता नकार न दे. संसद और जनता, दोनों से नकारे जाने का यही भय उन्हें मिर्च और चाकू के रास्ते पर ले जा रहा है. ऐसे समय में, जब संसद की मौजूदा स्थिति स्वयं अराजकता का परिचय दे रही है, फिर से सोचने की जरूरत है कि संसद को कैसे जनमत की अभिव्यक्ति का स्वस्थ माध्यम बनाये रखा जाये.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










