वादों का जमीन पर उतरना अभी बाकी

।। अरविंद कुमार सिंह।। (पूर्व सलाहकार, रेल मंत्रालय) रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में भारी हंगामें के बीच अपना पहला और यूपीए-2 का आखिरी रेल बजट पेश किया. खड़गे ने इस अंतरिम रेल बजट को बनाने में काफी मेहनत की थी, लेकिन संसद में पेश करने के दौरान अलग तेलंगाना के खिलाफ यूपीए के […]
।। अरविंद कुमार सिंह।।
(पूर्व सलाहकार, रेल मंत्रालय)
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में भारी हंगामें के बीच अपना पहला और यूपीए-2 का आखिरी रेल बजट पेश किया. खड़गे ने इस अंतरिम रेल बजट को बनाने में काफी मेहनत की थी, लेकिन संसद में पेश करने के दौरान अलग तेलंगाना के खिलाफ यूपीए के ही कुछ मंत्रियों और अन्य ने हंगामा किया, जिससे वे पूरा बजट भी नहीं पढ़ सके. हालांकि अपने बजट भाषण में उन्होंने रेलवे के लिए भावी योजनाओं के साथ ही कुछ आशाजनक नजरिया भी रखा. नीतियों में बदलाव की बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले की अपेक्षा अब भारतीय रेलवे बहिर्मुखी और यात्रियों पर केंद्रित हो गयी है.
इस रेल बजट से बहुत उम्मीद नहीं थी, इसलिए यह एक संतुलित लगा. अंतरिम रेल बजट होने के नाते इसमें किसी बड़ी घोषणा की गुंजाइश भी नहीं थी. आम चुनाव सिर पर है, इसलिए लोग इसे ‘चुनावी मेल’ की संज्ञा दे रहे हैं, लेकिन इसे बारीकी से देखें तो यह बजट सांसदों को संतुष्ट करने के साथ ही विकासोन्मुखी और जनोन्मुखी भी नजर आता है. इसमें 2014-15 के लिए अनुमानित आय और खर्च का ब्योरा पेश करने के साथ ही सदन में आगामी चार महीने के अनुमानित खर्च के लेखानुदान की मांग स्वीकृत कराने के लिए दस्तावेज रखे गये.
बजट में सरकारें स्वाभाविक रूप से अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यो का बखान करती हैं. इसलिए इस अंतरिम रेल बजट में भी ऐसा देखने को मिला. खास तौर पर चुनाव के मद्देनजर यात्री किराये या माल भाड़े का कोई बोझ जनता पर नहीं डाला गया है. अंतरिम रेल बजट में ऐसा करने से बचना भी चाहिए, क्योंकि आगे आनेवाली नयी सरकार इस पर विचार करेगी. रेल मंत्री ने कई रेल परियोजनाओं के साथ विभिन्न श्रेणी की 72 नयी रेलगाड़ियों का तोहफा आम लोगों को दिया है. 17 प्रीमियम ट्रेनें, 38 एक्सप्रेस और 10 पैसेंजर ट्रेनों के साथ ही कुल 72 नयी ट्रेनों और 6 ट्रेनों के विस्तार तथा उनके फेरे बढ़ाने की घोषणा यात्रियों के लिए काफी फायदेमंद कहा जा सकता है. इस तरह आमदनी और खर्च में तालमेल बिठाते हुए राजकोषीय अनुशासन का कड़ाई से पालन करने की दिशा के साथ ही इस बजट में मुसाफिरों का खासा ध्यान रखा गया है. रेलों की बुनियाद मजबूत करने के साथ ही 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए ठोस दिशा भी इस रेल बजट में दिखती है.
इस समय भारतीय रेल विकास के भारी-भरकम एजेंडे के साथ ही कठिन चुनौतियों से होकर गुजर रही है. इन चुनौतियों के बीच भी भारतीय रेल का परिचालन अनुपात पहले की तुलना में न केवल सुधरा है, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन हुआ है. रेल मंत्रालय की एक अहम उपलब्धि 2013-14 के दौरान 1047 मिलियन टन माल लदान होने जा रही है. बीते साल भारतीय रेल 1007 मिलियन टन माल ढोते हुए अमेरिका, चीन और रूस के साथ एक बिलियन टन के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गयी. माल भाड़ा ही रेलवे की आधारशिला है. चालू वित्तीय वर्ष में माल भाड़े से आय बढ़ कर 94,000 करोड़ होने जा रही है. यही वजह है कि बजट अनुमान 2014-15 में 1101 मिलियन टन माल लदान के साथ 1,60,775 करोड़ के सकल यातायात प्राप्तियों का लक्ष्य रखा गया है. इसमें यात्री यातायात से होनेवाली आय 45,255 करोड़ होगी. संचालन व्यय करीब 1.10 लाख करोड़ होगा, जो 13,589 करोड़ रुपये ज्यादा है. पेंशन भुगतान में रेलवे को 27,000 करोड़ खर्च करने होंगे. यह संतोष की बात है कि रेलवे की वित्तीय स्थिति फिलहाल ठीक-ठाक है, पिछले दो सालों में सुधार आया है, लेकिन इतनी चुनौतियां हैं कि कुशल प्रबंधन के बिना उसका संचालन थोड़ा मुश्किल है. इसलिए वादों और योजनाओं को जमीन पर उतारना बेहद जरूरी है.
वर्तमान में चल रही 12वीं पंचवर्षीय योजना में यात्री और माल व्यवसाय के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करना है. इसके लिए रोलिंग स्टाक की क्षमता, तकनीकी उन्नयन तथा उन्नत प्रौद्योगिकी पर भारी निवेश की जरूरत है. गौरतलब है कि मौजूदा योजना में रेलवे ने पीपीपी के जरिये तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. इस काम में राज्य सरकारों से भी सहयोग लेने की भी कोशिश है. माल में भागीदारी बढ़ाने के लिए खदान क्षेत्रों और बंदरगाहों से संपर्क बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
रेलवे की चुनौतियों में ट्रेनों की सुरक्षा और संरक्षा प्रमुख है, जिसे लेकर हमेशा से सवाल उठाये जाते रहे हैं. रेल मंत्री ने इस पर फोकस करते हुए माना है कि ट्रेनों में अगलगी का बढ़ना चिंता का विषय है, क्योंकि इससे यात्रियों की सुरक्षा का मामला जुड़ा हुआ है. इसलिए उन्होंने घोषणा की कि सारे मानव रहित समपारों पर या तो चौकीदारों की तैनाती होगी या उनको समाप्त किया जायेगा. इसके साथ ही अग्निरोधी उपायों सहित कई कदम भी उठाये जायेंगे. हालांकि बड़ी चुनौती यह है कि इस समय रेलवे में तकरीबन ढाई लाख रिक्तियां हैं, जिनमें से तकरीबन डेढ़ लाख संरक्षा कोटि की रिक्तियां हैं. इनकी भरती के लिए कोई भी उपाय नहीं सुझाया गया है. इसी तरह आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी की शुरुआत के तहत 160 से 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली गाड़ियों के कम लागत विकल्प पर कोशिशें जारी हैं, लेकिन यह सिर्फ अभी कोशिश भर ही है.
जहां तक यात्रियों की सुविधाओं का सवाल है तो इस दिशा में कई ठोस कदम उठाये गये हैं. आगामी जुलाई से मुंबई के स्थानीय यात्री एसी इएमयू का आनंद उठा सकेंगे जो देश में पहली बार होगा. इसी तरह दिल्ली-मुंबई खंड पर एसी प्रीमियम ट्रेन के अनुभवों से सबक लेते हुए रेलवे ने जो नये कदम उठाये हैं, उससे भी उसकी आय में बढ़ोतरी होगी. हाल में कश्मीर घाटी को जम्मू से जोड़ने के बाद कई नयी पहल हुई जिसकी दुनिया भर में सराहना हुई. ऊधमपुर-कटरा रेल लाइन का काम भी पूरा हो गया है और ट्रायल रन शुरू है. इस बीच कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाना रेल मंत्रलय की बड़ी उपलब्धि है.
कुल मिला कर यह अंतरिम रेल बजट चुनौतियों के बीच बहुत ही संतुलित बजट रहा. भले ही संसद में रेल बजट अलग से पेश किया जाता है, लेकिन इसकी आमदनी और खर्च को भारत सरकार की कुल आमदनी और खर्च का हिस्सा माना जाता है. देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभानेवाली भारतीय रेल को देश की जीवनरेखा कहना उचित होगा. रेलवे की तमाम उपलब्धियों और योजनाओं के बाद भी अभी इसके कई क्षेत्रों में सुधार बहुत जरूरी है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










