सियासत के वेलेंटाइन सीजन में बौराये प्रेमी

Published at :12 Feb 2014 4:37 AM (IST)
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सियासत के वेलेंटाइन सीजन में बौराये प्रेमी

।।जावेद इस्लाम।। (प्रभात खबर, रांची) अभी सियासत का वेलेंटाइन सीजन चल रहा है. सभी दल व नेतागण वोटरों से प्रेम जताने में लगे हैं. प्यार और इजहार के इस बसंती मौसम में भला कौन प्रेमी होगा जो भाग-दौड़ नहीं करेगा! अब नरेंद्र मोदी को ही लीजिए. दलितों के प्रति प्यार जताने वे केरल तक चले […]

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।।जावेद इस्लाम।।

(प्रभात खबर, रांची)

अभी सियासत का वेलेंटाइन सीजन चल रहा है. सभी दल व नेतागण वोटरों से प्रेम जताने में लगे हैं. प्यार और इजहार के इस बसंती मौसम में भला कौन प्रेमी होगा जो भाग-दौड़ नहीं करेगा! अब नरेंद्र मोदी को ही लीजिए. दलितों के प्रति प्यार जताने वे केरल तक चले गये. अछूत समङो जाने का अपना राजनीतिक दर्द बयां कर दलितों का दिल जीतने की कोशिश की. यहां तक कि रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के लिए जस्टिस रंगनाथ मिश्र को कोस डाला. इसके दो दिन पहले ही वे मुसलिम प्रेम में अहमदाबाद मुसलिम ट्रेड फेयर में थे, मुसलमानों को देश के विकास की गाड़ी के दो पहियों में से एक बता रहे थे.

उनकी इस स्नेहिल वाणी से मेरे जैसों को पहली बार भान हुआ कि विकास की गाड़ी में असल में दो पहिया ही है, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या छकड़ा गाड़ी की तरह! सिर्फ नमो ही वेलेंटाइन डे नहीं मना रहे. कभी के पीएम इन वेटिंग रहे द्वितीय लौहपुरुष यानी लाल कृष्ण आडवाणी उनसे मिलने पहुंच गये. नमो-प्रेम जताया और लगे हाथ तारीफ भी कर डाली, ‘नमो जैसी रैली तो कभी देखने को नहीं मिली थी’. समझ में आ गया न गुरुजी कि चतुर चेला चीनी कैसे बन गया! राहुल बाबा झारखंड आ कर आदिवासी-अल्पसंख्यकों के प्रति प्रेम जता गये.

उनकी कांग्रेस तो मुसलिम अकलियतों के प्रति मोहब्बत में सबसे ज्यादा लालायित रहती है. इसके लिए जितने भी लांछन-उलाहने सुनने पड़ें, सुन लेती है. इस वेलेंटाइन डे के मौके पर संसद में सांप्रदायिक हिंसा निवारण बिल पर दिल थामे बैठी है. इस कांग्रेसी बिल के विरोध में एक दिन के लिए ही सही, वाम दल दक्षिण भाजपा व ढुलमुल सपा ‘वेलेंटाइनी’ मूड में एक साथ दिखे. यह अलग बात है कि एक दिन पहले ही वे कांग्रेस-भाजपा के विरोध में फेडरल फ्रंट बनाने बैठे थे. इन 11 दलों में वेलेंटाइन भाव अभी तो मौजूद है, लेकिन कल क्या होगा, किसको पता! क्योंकि यही सपा है जिसने यूपीए-वन के प्रति वामपंथ के समर्थन वापसी के समय कांग्रेस के साथ जाकर खड़ी होकर सरकार को और भारत-अमेरिकी न्यूक्लियर डील को बचाया था. इस सपा के साथ मिल कर येचुरी व वर्धन किस तरह का तीसरा मोरचा बना पायेंगे?

नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के प्रति मुलायम-नीतीश की नीति और व्यवहार जगजाहिर है. और अभी मुजफ्फरनगर दंगों में मुलायम-अखिलेश ने साबित कर दिया कि असल में वे कैसे सेक्युलर हैं. तो क्या नमो की गुजरात सरकार की ही तरह है अखिलेश की यूपी सरकार? इधर वामपंथियों की अगुवाई में ये फेडरल फ्रंट वेलेंटाइन मना रहे हैं तो उधर चंद्रबाबू नायडू, ममता दीदी से मिल कर एक अलग फ्रंट वेलेंटाइन का आयोजन करने में लगे हैं. लालू जी जेल से निकल कर अभी तक 10 जनपथ के बाहर बैठे भजन गा रहे हैं, ‘तेरे दर पे आया हूं, कुछ कर के जाऊंगा या मर के जाऊंगा..’ बहन मायावती जी, आपका वेलेंटाइन प्लान क्या है?

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