जैसी जनता, वैसे नेता!

अगर आप ईमानदार नेता हैं और किसी मोहल्ले में पैदल चल कर एवं मामूली कपड़े पहन कर वहां की जनसमस्याओं का समाधान करने या सुनने जाते हैं, तो उस मोहल्ले के लोग आप को पागल करार दे देंगे और साथ ही मजाक भी उड़ायेंगे. लेकिन अगर आप उसी मोहल्ले में महंगी गाड़ी और साथ में […]
अगर आप ईमानदार नेता हैं और किसी मोहल्ले में पैदल चल कर एवं मामूली कपड़े पहन कर वहां की जनसमस्याओं का समाधान करने या सुनने जाते हैं, तो उस मोहल्ले के लोग आप को पागल करार दे देंगे और साथ ही मजाक भी उड़ायेंगे.
लेकिन अगर आप उसी मोहल्ले में महंगी गाड़ी और साथ में दो-चार राइफलधारियों को ले कर पहुंच जायें, तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि आपको पागल कहनेवाले वही लोग तब आपको इज्जत से बैठने के लिए भी कहेंगे और जो आपको नहीं भी पहचानता होगा, वह भी नमस्कार करेगा.
अपने को सबके सामने आपका पुराना परिचित होने का दावा भी करेगा. आजकल हम लोग इसी को आदर्श नेतागीरी भी मानते हैं. अब ऐसे में कलियुगी नेता ठसक नहीं दिखायेंगे, तो उन्हें भाव कौन देगा और उनकी नेतागीरी चलेगी कैसे?
मनीष वैद्य, रांची
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