आखिर कब सुधरेंगे हम ?

अखबार के पन्नों को पलटते ही हम हर रोज बलात्कार जैसी खबरों से दो-चार होते हैं. हर रोज कोई न कोई स्त्री, चाहे वह बच्ची हो, वृद्धा, युवती, इस जघन्य अपराध का शिकार होती है. पुलिस कार्रवाई करती है, अपराधी जेल भेजे जाते हैं, फिर छूट जाते हैं. पर उस लड़की का क्या, जो बिना […]
अखबार के पन्नों को पलटते ही हम हर रोज बलात्कार जैसी खबरों से दो-चार होते हैं. हर रोज कोई न कोई स्त्री, चाहे वह बच्ची हो, वृद्धा, युवती, इस जघन्य अपराध का शिकार होती है. पुलिस कार्रवाई करती है, अपराधी जेल भेजे जाते हैं, फिर छूट जाते हैं.
पर उस लड़की का क्या, जो बिना किसी कसूर के मर्दो की सामूहिक ‘मर्दानगी’ का शिकार होती है. हमारे देश में जहां एक ओर देवी के हर रूप की पूजा होती है, उसी देश में महिलाओं के सम्मान की धज्जियां उड़ रही हैं. घर से लड़की अकेली निकले या फिर किसी दूसरी लड़की के साथ, दोनों ही सूरतों में बलात्कार की शिकार होती है. तो क्या इसका मतलब यह है कि हम घर की गाय बन कर रह जायें? मैं भी एक लड़की हूं और जिस तेजी से हमारे गांव, शहर, देश में बलात्कारियों की संख्या बढ़ी है, अब डर लगने लगा है.
चंदा शाह, देवघर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










