मौलिक अधिकार है इंटरनेट

Updated at : 14 Jan 2020 7:31 AM (IST)
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मौलिक अधिकार है इंटरनेट

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् और केरल हाइकोर्ट के अनुसार इंटरनेट का प्रयोग हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. दुनियाभर के सभी विकसित देशों में इंटरनेट को अपने नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकार के दृष्टिकोण से ही देखा जाता है, परंतु तीसरी दुनिया के देशों में, जहां कई देशों में अतिवादी दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग […]

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् और केरल हाइकोर्ट के अनुसार इंटरनेट का प्रयोग हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. दुनियाभर के सभी विकसित देशों में इंटरनेट को अपने नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकार के दृष्टिकोण से ही देखा जाता है, परंतु तीसरी दुनिया के देशों में, जहां कई देशों में अतिवादी दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग सत्तासीन हुए हैं, वहां इंटरनेट का दुरुपयोग अपने शासन में कथित सांप्रदायिक अफवाह न फैलाने या आतंकवाद रोकने के बहाने जब चाहे तब लंबी समयावधि तक के लिए प्रायः बंद कर देते हैं. कश्मीर में महीनों तक इंटरनेट बंद रखा गया. नागरिकों से यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए.

निर्मल शर्मा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

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