सेब के मुकाबिल केला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jun 2019 6:55 AM
विज्ञापन
सुरेश कांत वरिष्ठ व्यंग्यकार drsureshkant@gmail.com भले ही आम फलों का राजा हो, पर स्वास्थ्य के मामले में जो लोकप्रियता सेब की है, वह आम की नहीं. लगता है, उसने अपनी बिक्री बढ़ाने का काम किसी विज्ञापन-एजेंसी को दिया था. एजेंसी ने पहला काम किया, एक बढ़िया नारा बनाने का, क्योंकि नारा है तो सब-कुछ है. […]
विज्ञापन
सुरेश कांत
वरिष्ठ व्यंग्यकार
drsureshkant@gmail.com
भले ही आम फलों का राजा हो, पर स्वास्थ्य के मामले में जो लोकप्रियता सेब की है, वह आम की नहीं. लगता है, उसने अपनी बिक्री बढ़ाने का काम किसी विज्ञापन-एजेंसी को दिया था. एजेंसी ने पहला काम किया, एक बढ़िया नारा बनाने का, क्योंकि नारा है तो सब-कुछ है. नारा भी बनाया अंग्रेजी में, क्योंकि अंग्रेजी भी तो सब-कुछ है.
लोग तो उसके पीछे अपनी मातृभाषा भी कुर्बान करने को तैयार रहते हैं और दूसरे की भी, बल्कि दूसरे की कुर्बान करने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं, भले ही इस चक्कर में अपनी भी कुर्बान हो जाये. अंग्रेजी में स्लोगन बना- ‘एन एप्पल ए डे कीप्स डॉक्टर्स अवे.’ इस स्लोगन ने चमत्कार किया. परिणाम यह हुआ कि सुबह नाश्ते की मेज पर बाकी सारे फल पड़े के पड़े रह जाते हैं, लोग सेब पर ही हाथ साफ करते हैं.
पपीता तो बीमारों के फल के रूप में बदनाम है ही, अंगूर भी सेब के सामने कहीं नहीं टिकता. रहा केला, तो जैसे स्त्री दलितों में भी दलित है, केला उपेक्षितों में भी उपेक्षित रहा.
लेकिन वही केला अब सेब से टक्कर लेने की तैयारी में दिखता है. ताजा शोध यह है- दो केले खाइए, रक्तचाप और तनाव भगाइए. जरूर केले ने भी किसी विज्ञापन-एजेंसी का सहारा लिया है, वरना ऐसा मर्मस्पर्शी नारा न बनता. यह तो दुखती राग पर हाथ रखने जैसा हो गया. जैसी कि परंपरा है, पहले चूहों पर केले का असर परखा गया. चूहे वैसे कितने भी खुराफाती हों, इस मामले में मानवता के खूब काम आते हैं.
पता चला, केला खाने से चूहों का रक्तचाप कम हो गया. पके हुए केले का असर ज्यादा होता है. फिर ऐसे ही प्रयोग रक्तचाप के रोगी मनुष्यों पर किये गये. अंतत: निश्चित हो गया कि केले से रक्तचाप दूर होने के मामले में मनुष्य भी चूहों से कम नहीं हैं, तो इसकी घोषणा कर दी गयी.
लगता है ये शोधकर्ता दवाओं के कारोबार में अरबों-खरबों रुपये की संपत्ति वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बर्बाद करने पर तुले हैं. केला रक्तचाप और तनाव दूर कर देगा, तो इन बीमारियों की महंगी-महंगी दवाएं बेचनेवाली कंपनियों का क्या होगा? भला केला फल है या दवाई? पर नहीं, उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरफ से मैं व्यर्थ ही चिंता कर रहा हूं. ताज्जुब नहीं होगा, अगर जल्दी ही किसी दिन किसी पश्चिमी देश की किसी लेबोरेटरी द्वारा प्रसारित यह खबर सुनने में आ जाये कि केला खाने से व्यक्ति एचआइवी पॉजिटिव यानी एड्स का शिकार हो जाता है.
ये दवा कंपनियां ऐसे भारतीय शोधों से डरने वाली नहीं हैं, बल्कि हो सकता है, कल वे केले का पेटेंट ही अपने नाम करवा लें और हम उनके दावों की काट में अपने पुराने ग्रंथों के उन साहित्यिक उद्धरणों का हवाला देते ही रह जाएं, जिनमें नायिकाओं की जांघों की उपमा कदली वृक्ष के तनों से दी गयी है. और क्या पता, वे कंपनियां नीम और लहसुन की तरह केले के भी कैप्सूल बाजार में उतार दें! जो भी हो, वे कुछ करेंगी जरूर. भारतीय बाजार की उन्हें बड़ी चिंता है. उस चिंता से ही उनकी तिजोरियां भरती हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










