विश्व युद्ध की बाइक
Author Prabhat khabar digital desk
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार [email protected] वह कंपनी बताती है कि उस विश्व युद्ध में उसकी बाइकों का अहम रोल था. यानी वह बाइक आप इसलिए ले लें कि वह उस विश्व युद्ध की तैयारियों में दौड़ी थी. विश्व युद्ध के नाम पर ले लो. अभी एक इश्तेहार देखकर मुझे धक्का लगा. इस इश्तेहार में हमारी […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
वह कंपनी बताती है कि उस विश्व युद्ध में उसकी बाइकों का अहम रोल था. यानी वह बाइक आप इसलिए ले लें कि वह उस विश्व युद्ध की तैयारियों में दौड़ी थी. विश्व युद्ध के नाम पर ले लो. अभी एक इश्तेहार देखकर मुझे धक्का लगा. इस इश्तेहार में हमारी श्रेष्ठ महिला खिलाड़ियों-पीवी सिंधू, मैरी काॅम और साईना नेहवाल के फोटो थे, साथ में प्लास्टिक की तीन बोतलों के फोटो थे, जिनके ऊपर भागती हुई मोटरसाइकिलें दर्ज थी.
आशय यह था कि इस बोतल में बंद लिक्विड से मोटरसाइकिलें स्पीड से दौड़ सकती हैं. पर इस लिक्विड का पीवी सिंधू के बैडमिंटन खेल में या मैरी काॅम के बाक्सिंग हुनर में या साईना नेहवाल के बैडमिंटन प्रदर्शन में क्या योगदान है, यह समझ न आया. क्या साईना नेहवाल कोई बाइक चलाती हैं, जिसमें यह लिक्विड डालती हैं, फिर बैडमिंटन खेलती हैं, तो उनकी परफाॅरमेंस बेहतरीन हो जाती है? अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत ही अवैज्ञानिक बात है. किसी भी खिलाड़ी की परफाॅरमेंस उसकी अपने खेल के प्रति लगन, निष्ठा, प्रैक्टिस से आती है, लिक्विड से नहीं.
विश्व युद्ध में कोई बाइक दौड़ी, अब विश्व युद्ध के नाम पर वह बाइक क्यों लें. विश्व युद्ध का वक्त और था. भरी व्यस्त सड़कों पर भी एकाध बाइक दिखती थी. अब तो व्यस्त सड़क पर चलना ही विश्व युद्ध जितना खतरनाक काम है. विश्व युद्ध के नाम पर बाइक क्यों बेच रहे हो भाई, यह बताओ कि लेटेस्ट हालात के हिसाब से डिजाइन बाइक लें. तमाम आइटम बेचने की तमाम वजहें बतायी जा रही हैं, कई बार वे समझ से बाहर होती हैं. बड़े बुजुर्ग लोग बताते हैं तो कन्फ्यूजन हो जाता है.
अभिनेता ऋषि कपूर ने बताया कि कब्ज खत्म करने के लिए उस दवा का से��न करें. उनका गहन सम्मान करता हूं. ऋषि कपूर की छवि रोमांटिक हीरो की रही है. वह अब कब्ज विमर्श कर रहे हैं- यह देख थोड़ा कल्चरल शाक लगता है. उनकी एक पुरानी हिट फिल्म बाॅबी का हिट गीत है- झूठ बोले कौवा काटे… ऋषि कपूर कब्ज के लिए जिस दवा की सिफारिश कर रहे हैं, वह सच ही बोल रहे होंगे, क्योंकि उनसे ज्यादा कौन जान सकता है कि झूठ बोले कौवा काटे. वैसे पुराने कौवे और ऋषि कपूर के बाॅबी-कालीन कौवे तो अब काटने की अवस्था में भी न होंगे.
कन्फ्यूजन विकट हो जाता है, मैं अमिताभ बच्चन की भी बहुत इज्जत करते हैं. वह कब्ज के इलाज के तौर किसी और कंपनी के चूर्ण को प्राथमिकता देते हैं.
मैं ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन दोनों को ही बहुत मानता हूं, पर इनमें से किसकी मानूं, यह कन्फ्यूजन है. मेरे जैसे लाखों प्रशंसकों के लिए कन्फ्यूजन है, जो ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन दोनों की ही बहुत इज्जत करते हैं और कन्फ्यूजन और बढ़ा देते हैं काॅमेडियन राजू श्रीवास्तव, जो कब्ज विमर्श में एक नया आयाम जोड़कर किसी और आइटम की वकालत करते हैं. ये सारे सम्मानित लोग हैं, आपस में मिल बैठकर तय कर लें और सबको बता दें. वरना तो कन्फ्यूजन बना रहेगा.
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