शैक्षणिक पद भरे जाएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Aug 2018 6:47 AM (IST)
विज्ञापन

उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थानों में बड़ी तादाद में शिक्षकों के पदों का रिक्त होना चिंताजनक है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लगभग साढ़े पांच हजार तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में करीब 2800 से ज्यादा पद रिक्त हैं. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) तथा भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी […]
विज्ञापन
उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थानों में बड़ी तादाद में शिक्षकों के पदों का रिक्त होना चिंताजनक है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लगभग साढ़े पांच हजार तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में करीब 2800 से ज्यादा पद रिक्त हैं.
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) तथा भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइइएसटी) में शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या 1870 है. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) में भी 258 पद खाली हैं. इन्हें सरकार ने ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा दिया है. ‘नॉलेज इकोनॉमी’ यानी ज्ञानाधारित अर्थव्यवस्था में शोध-अनुसंधान तथा नवाचार के लिए आवश्यक ज्ञान-सृजन के संस्थानों में वांछित संख्या में शिक्षकों का न होना आर्थिक मोर्चे के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
पिछले माह लोकसभा में मंत्रालय ने कहा था कि खाली पदों के भरने का जिम्मा संस्थानों का है, क्योंकि वे स्वायत्त हैं. लेकिन, शिक्षकों के पदों का बड़ी तादाद में खाली होना अपने-आप में एक संकेत है कि समस्या बेहद गहरी है और संबद्ध प्रक्रियाओं के पालन में लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है.
उच्च शिक्षा के संस्थान इस बहाने की आड़ नहीं ले सकते हैं कि बहालियां इस वजह से नहीं हो पा रही हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में धन नहीं मिल रहा है. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के बाद से उच्च शिक्षा का बजट नौगुना बढ़ा है और इस बजट का अधिकतर केंद्रीय शिक्षा संस्थानों को हासिल होता है, जबकि उच्च शिक्षा हासिल कर रहे कुल छह फीसद विद्यार्थी ही इन संस्थाओं में पढ़ाई कर रहे हैं.
दुर्भाग्य की बात है कि शिक्षकों की कमी सिर्फ प्रतिष्ठित संस्थानों तक सीमित नहीं है. उच्च शिक्षा से संबंधित अखिल भारतीय सर्वेक्षण (2017-18) का एक निष्कर्ष है कि बीते तीन सालों में विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की संख्या में भारी कमी आयी है. देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की संख्या (अस्थायी शिक्षकों समेत) 2017-18 में 12.84 लाख थी, जबकि यह आंकड़ा 2016-17 में 13.65 लाख और 2015-16 में 15.18 लाख रहा था.
इस तरह से तीन साल में शिक्षकों की संख्या सवा दो लाख से भी ज्यादा घटी है. केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा के विकास के लिए हाल में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं, जैसे- निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इमिनेंस’ विकसित करना और राज्य स्तर केयोग्य शिक्षा संस्थानों को रणनीतिक जरूरतों की पूर्ति के लिए धन देने की 2013 के ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान’ को जारी रखना.
परंतु, इन कोशिशों का प्राथमिक लक्ष्य नये शिक्षा संस्थान खोलने या मौजूदा संस्थानों के विस्तार तक सीमित नहीं रहना चाहिए. विशिष्ट संस्थानों को समुचित संसाधन उपलब्ध कराने और उनके संचालन को बेहतर बनाने पर भी पूरा ध्यान दिया जाना जरूरी है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




