राष्ट्रपति धनबाद न ही आते तो ठीक था!

इस बार मैं भी आइएसएम के दीक्षांत समारोह मे भाग लेने अपने परिवार के साथ धनबाद गयी थी. मन में इस बात की खुशी थी की राष्ट्रपति इस समारोह के मुख्य अतिथि हैं, पर यहां आकर पता चला की राष्ट्रपति के आगमन के कारण सिर्फ मुङो समारोह में भाग लेना है और मेरे परिवारवाले एक […]
इस बार मैं भी आइएसएम के दीक्षांत समारोह मे भाग लेने अपने परिवार के साथ धनबाद गयी थी. मन में इस बात की खुशी थी की राष्ट्रपति इस समारोह के मुख्य अतिथि हैं, पर यहां आकर पता चला की राष्ट्रपति के आगमन के कारण सिर्फ मुङो समारोह में भाग लेना है और मेरे परिवारवाले एक सभागार में लाइव टेलीकास्ट देखेंगे.
वहां की व्यवस्था इतनी लचर थी कि न पीने का पानी था, न बैठने की जगह. दूरदराज से आये परिजन अपने बेटे-बेटियों के जीवन के सबसे बड़े पल मे उनके साथ न होने का अफसोस मना रहे थे. वहीं जिनके लिए यह आयोजन था, उनको सभागार में सबसे पीछे की सीट दी गयी थी. मुङो इसका बहुत अफसोस है. अगर राष्ट्रपति जी धनबाद न ही आते, तो अच्छा होता! कम से कम हम अपने परिजनों के साथ समारोह में भाग ले पाते और राज्य के बड़े नेताओं की किरकिरी भी न हुई होती.
डॉ प्रियंका कुमारी, कोलकाता
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