Waqf Bill : वक्फ विधेयक को लेकर विपक्ष क्यों नहीं मोदी सरकार के साथ?

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 01 Apr 2025 8:25 AM

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वक्फ विधेयक का विरोध

Waqf Bill : संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा है कि सरकार वक्फ विधेयक पेश करने को पूरी तरह तैयार है. कुछ दल समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. जानें क्यों मोदी सरकार का साथ नहीं दे रहा विपक्ष?

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Waqf Bill: सरकार संशोधित वक्फ विधेयक को संसद में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह जानकारी संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने दी है. उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों पर समाज में अशांति फैलाने का आरोप लगाया है. इसके प्रावधानों को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी रीजीजू ने लगाया है. मंगलवार को संसद की बैठक फिर से शुरू होने वाली है. बिल पर हंगामा देखने को मिल सकता है.

वक्फ विधेयक को लेकर विपक्ष क्यों नहीं दे रहा साथ?

यदि सत्तापक्ष की बात करें तो उनका कहना है, वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे में आसानी होगी. वक्फ की संपत्ति का अच्छी तरह से इस्तेमाल हो सकेगा. मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद पहुंचेगी. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी 14 संशोधनों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर चुकी है. विपक्ष की ओर से प्रस्तावित किए गए 44 संशोधनों को जेपीसी खारिज कर चुकी है.

वक्फ बिल पर आपत्तियां क्या है?

1. वक्फ के किसी संपत्ति विवाद पर अब फैसले के लिए खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम माना जाता था.

2. अब दान किए बिना किसी संपत्ति पर वक्फ अपना अधिकार नहीं जता सकता. इससे पहले ठीक उलट था. दावे के साथ ही कोई भी संपत्ति वक्फ का अधिकार हो जाती थी.

3. वक्फ बोर्ड में महिला के अलावा अन्य धर्म से दो सदस्य होने चाहिए. पहले बोर्ड में ऐसा प्रावधान नहीं था.

4. कलेक्टर को वक्फ की संपत्ति के सर्वेक्षण का अधिकार मिलेगा. उसे संपत्ति का निर्धारण करने का अधिकार भी होगा.

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किरेन रीजीजू ने कहा कि विधेयक को पेश करने का समय संसद की बैठक के बाद विचार-विमर्श के पश्चात तय किया जाएगा, लेकिन वह चाहते हैं कि इसे जल्द से जल्द पारित किया जाए. संसद का चालू बजट सत्र चार अप्रैल को समाप्त होना है. इस विधेयक को कानून बनाने के लिए लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में पारित कराना होगा. 

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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