Viral Video : एक मां कैसे बचाती है अपने बच्चे को हर मुसीबत से, ये वीडियो देख रो पड़ेंगे आप
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 11 Sep 2025 12:53 PM
अपने बच्चों को बारिश से सुरक्षित करती एक मुर्गी, एआई इमेज
Viral Video : एक मां चाहे वो इंसान हो या जानवर अपने बच्चे की रक्षा के लिए हर मुमकिन कोशिश करती है, फिर चाहे इसके लिए उसे कितनी भी परेशानियों का सामना करना पड़े. वायरल वीडियो मां के इसी रूप का वर्णन करना कर रहा है, जिसे देखकर कोई भी इंसान इमोशनल हो सकता है.
Viral Video : मां यानी अपने बच्चे को निस्वार्थ प्रेम करने वाली. मां यानी बच्चे के लिए कोई भी मुसीबत उठाने वाली. मां यानी अपने बच्चे की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने वाली, किसी से भी भिड़ जाने वाली. मां के इसी खूबसूरत रूप की याद आएगी, जब आप इस वायरल वीडियो को देखेंगे. इस वायरल वीडियो को शेयर किया है Nature is Amazing के एक्स हैंडल से. यह वीडियो इतना खृूबसूरत है कि देखने वाले हर इंसान को अपनी मां की और उसके आंचल की याद आएगी, जहां सबका बचपन बीता होता है.
बच्चों को ऐसे सुरक्षित करती हैं मुर्गियां
मुर्गी, पक्षी वर्ग की ही प्राणी है. वायरल वीडियो में यह दिख रहा है कि मां मुर्गी बारिश से अपने बच्चों को बचाने के लिए अपने पंख फैलाकर उनके लिए एक छत जैसी आकृति बना रही है, ताकि उसके बच्चे उसकी छांव में बारिश से बच सकें. मुर्गी अपने पंख को फैलाकर खड़ी है और उसके 7-8 चूजे उसकी पंख के नीचे छुपकर बारिश की बूंदों से बच रहे हैं. हालांकि एक शरारती चूजा उसकी पंख से बाहर उसकी पीठ पर खड़ा है. यह वायरल वीडियो एक मां की सोच और उसके उस प्रेम को दर्शा रहा है, जो वह अपने बच्चों से करती है.
Mommy protecting her babies from the rain.. pic.twitter.com/O0HJul7cRD
— Nature is Amazing ☘️ (@AMAZlNGNATURE) September 11, 2025
मुर्गी के पंख बहुत खास होते हैं
मुर्गी के पंख बहुत खास होते हैं, जो उसे उड़ने में मदद करते हैं. हालांकि मुर्गी या मुर्गे अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं, लेकिन उनके पंख बहुत खास होते हैं. पंख मुर्गियों को उसका आकार और रंग देते हैं, साथ ही पंख वे सर्दी में शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं और गर्मी की धूप से भी बचाते हैं. इतना ही नहीं मुर्गियां अपने पंखों की मदद से विपरीत लिंग को आकर्षित भी करती हैं. जब भी कोई खतरा दिखता है, तो मां मुर्गी अपने बच्चों को तुरंत अपने पंखों के अंदर समेट लेती है, ताकि चूजों को कोई नुकसान ना हो.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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