Viral Video : चील को यूं ही नहीं कहा जाता शिकारी पक्षी, अगर आप कमजोर दिल के हैं, तो इस वीडियो को ना देखें
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 17 Aug 2025 10:42 PM
चील एक ताकतवर पक्षी
Viral Video : चील सी नजर है, ये कहावत तो आपने भी सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों कहा जाता है. चील ऐसा पक्षी है जो आसमान की ऊंचाई से जमीन परअपने शिकार पर नजर रखता है और फिर जो कुछ होता है, वो इस वीडियो में आप साफ देख सकते हैं.
Viral Video : सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को अबतक 8 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है और यह शेयर भी किया जा रहा है. इस वीडियो की खासियत है, प्रकृति. चील एक ऐसा पक्षी है, जो बड़े आकार का होता है और जिसकी ताकत इतनी है कि वह किसी बड़े जानवर को भी अपने कब्जों में कर उड़ान भर सकता है. इस वायरल वीडियो में वह एक हिरण के बच्चे को जो उससे आकार में काफी बड़ा है, अपना शिकार बनाता है.
चील काफी ऊंचाई से भी अपने शिकार को भांप लेता है
चील एक शिकारी पक्षी है और इस वायरल वीडियो में यह नजर आ रहा है कि वह ऊंचाई से गोता लगाते हुए नीचे आता है और पहाड़ पर घूम रहे, एक हिरण के बच्चे को अपनी गिरफ्त में ले लेता है और फिर आकार की ऊंचाई में उड़ जाता है. इस वीडियो को देखने वाले चौंक जाते हैं कि चील कैसे इतने बड़े जानवर को आकाश की ऊंचाई से नीचे आकर अपना शिकार बनाता है. यह वीडियो देखने वालों की चीख निकल जाती है, जब चील उतने बड़े हिरण को लेकर फिर हवा में उड़ने लगता है.
चील एक ताकतवर पक्षी है
चील एक्सीपिट्रिडे (Accipitridae) समुदाय का पक्षी है, जो आमतौर पर शिकारी पक्षी होते हैं. जैसे चील, बाज, गिद्ध, गरुड़ आदि. चील एक बहुत ही ताकतवर और बड़े आकार का पक्षी होता है. यह अपनी ताकत और पंजों की मजबूती से बड़े शिकार जैसे खरगोश, हिरन के बच्चे और बकरियों को भी पकड़ लेता हैं. इसकी खासियत है इसके मजबूत पंजे, मुड़ी हुई चोंच और ऊंचाई से देखने की क्षमता, जिसकी वजह से ये अपने शिकार को आसानी से दबोच लेते हैं
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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