बंटवारे के बाद पाकिस्तान जाते वक्त इस महिला की कब्र पर आंसू बहाने गए थे मोहम्मद अली जिन्ना
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 14 Aug 2025 11:04 AM
जिन्ना और रतनबाई
Story Of Partition Of India 10 : पाकिस्तान के कायदे ए आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने अपनी जिद से देश का बंटवारा तो करवा दिया, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि देश का विभाजन इतना विनाशकारी होगा. उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा ने उनसे पाकिस्तान की डिमांड करवाई, लेकिन अलग देश का सुख वे ज्यादा दिनों तक भोग नहीं सके और आजादी के महज एक साल और कुछ दिनों के बाद ही मोहम्मद अली जिन्ना की मौत हो गई. जिन्ना जब पाकिस्तान जा रहे थे, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू नहीं बल्कि गम का साया था. पाकिस्तान के कायदे आजम जिन्ना भारत से रुखसती से पहले एक क्रब पर जाकर जार-जार रोए थे. वह कब्र थी ‘बंबई का फूल’ कही जाने वाली रतनबाई यानी रूट्टी की.
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Story Of Partition Of India 10 : पाकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ था, लेकिन जिस व्यक्ति ने पाकिस्तान की सबसे ज्यादा वकालत धर्म के नाम पर की, वह व्यक्ति जिन्ना इस्लाम के नियम कायदों से काफी अलग रहता था. उसे उर्दू नहीं आती थी, वह नमाज नहीं पढ़ता था. लेकिन पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के निजी जीवन पर पाकिस्तान में चर्चा ना के बराबर होती है. जैसे उनके निजी जीवन यानी उनकी पत्नी रतनबाई और बेटा दीना की बात करना कोई अपराध हो. जिन्ना ने सबसे पहले मुसलमानों के लिए अलग मुल्क की मांग की और देश का बंटवारा धर्म के आधार पर करवाया. उनका यह कहना था कि कांग्रेस मुसलमानों की उपेक्षा करती हैं और भारत जैसे हिंदू बहुल देश में मुसलमानों की कोई सुनने वाला नहीं है, इसलिए मुसलमानों का अलग मुल्क पाकिस्तान होना चाहिए. खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी बताने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को इश्क हुआ एक पारसी लड़की से जो उम्र में उनसे लगभग 24 साल छोटी थी. उनके इसी इश्क की वजह से पाकिस्तान में कट्टरपंथियों की आलोचना का सामना करना पड़ा.
कौन थी रतनबाई जिससे बेपनाह मोहब्बत करते थे मोहम्मद अली जिन्ना
रतनबाई मोहम्मद अली जिन्ना की दूसरी पत्नी थीं और मुंबई के एक संपन्न एक पारसी परिवार की बेटी थीं. उनकी सुंदरता और फैशन की चर्चा पूरे मुंबई में होती थी. रतनबाई या रूट्टी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी, वह जिन्ना से पागलों की तरह प्यार करती थी. उनके माता-पिता सर दिनशॉ पेटिट और दीनाबाई पेटिट थे. पाकिस्तानी लेखक अकबर अहमद ने अपनी किताब- Jinnah, Pakistan and Islamic Identity: The Search for Saladin में रतनबाई और जिन्ना के बारे में विस्तार से लिखा है. अकबर अहमद ने अपनी किताब में लिखा है कि पाकिस्तान के कट्टरपंथी अपने कायदे आजम की शादी एक काफिर से किए जाने के सख्त खिलाफ थे. यही वजह है कि पाकिस्तान में उनके निजी जीवन को रहस्य बनाकर रख दिया गया है. उनकी बेटी दीना वाडिया को लेकर भी लोगों में नाराजगी है, क्योंकि उसने एक ईसाई से शादी की और अपने पिता के साथ पाकिस्तान नहीं गई. दीना वाडिया ने एक पारसी लड़के नेविल वाडिया से शादी की जिसकी वजह से दीना और जिन्ना के बीच विवाद भी हुआ.
घरवालों की मर्जी के खिलाफ रतनबाई ने की जिन्ना से शादी

रतनबाई के माता-पिता यह बिलकुल भी नहीं चाहते थे कि उनकी एकमात्र संतान एक मुसलमान से शादी कर लें. इसकी वजह उनकी संस्कृति और रहन-सहन में अंतर था. लेकिन रतनबाई ने अपने माता-पिता की नहीं मानी और मोहम्मद अली जिन्ना से शादी कर ली. जिन्ना और रूट्टी की एक संतान दीना के जन्म के बाद उनका अलगाव भी हो गया था, हालांकि रूट्टी की बीमारी की वजह से दोनों एक बार फिर साथ आ गए थे. जिन्ना और रूट्टी की शादी से देशभर में हंगामा मच गया था, जिसकी वजह से बाद में रतनबाई ने इस्लाम कबूल कर लिया था, जिसकी वजह से वह मरियम जिन्ना कहलाईं.
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रतनबाई के पिता के मित्र थे मोहम्मद अली जिन्ना
जिन्ना रतनबाई के पिता के अच्छे मित्र थे और उनसे उम्र में महज तीन साल छोटे थे. वे अक्सर उनके घर आया-जाया करते थे. यहीं से जिन्ना और रतनबाई की पहचान हुई, लेकिन उनके बीच इश्क दार्जिलिंग में पनपा. उनके बीच उम्र का जो अंतर था उसकी वजह से कई बार जिन्ना परेशानी में भी आ जाते थे, लेकिन वे रतनबाई से बहुत प्यार करते थे. जिन्ना ने जब अपने मित्र यानी रतनबाई के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, तो वे आक्रामक हो गए थे और उन्हें घर से निकाल दिया था. लेकिन वे अधिक दिनों तक इस शादी को नहीं रोक पाए. शादी की उम्र होते ही रतनबाई ने अपनी मर्जी से एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जिन्ना के साथ विवाह की घोषणा की और सारे रिश्तेदारों से नाता तोड़कर जिन्ना की हो गईं.
बेटी की जन्म के बाद जिन्ना का हो गया था अलगाव

रतनबाई की मौत युवावस्था में ही हो गई थी. वह महज 29 साल की थीं, जब एक बीमारी ने उनकी जान ले ली. पेरिस में उनका इलाज हुआ, उस दौरान जिन्ना भी उनके साथ थे, जबकि बेटी के जन्म के बाद दोनों में अलगाव हो गया था. Jinnah, Pakistan and Islamic Identity में बताया गया है कि रूट्टी उन्हें जैसे पत्र लिखती थी, उसमें उसकी चाहत थी कि उसकी मौत के वक्त जिन्ना साथ हों और उनका प्रेम बना रहे. रूट्टी की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार इस्लामिक रीति से हुआ था. जब दफन करने के लिए उसे कब्र में उतारा गया तो जिन्ना बच्चों की तरह बिलखने लगे थे. रूट्टी की मौत के बाद जिन्ना इस कदर टूटे कि उन्होंने खुद को सिर्फ मुसलमानों के लिए समर्पित कर दिया और उनके जीवन में कुछ भी शेष नहीं था.
पाकिस्तान जाने से पहले रतनबाई की कब्र पर गए थे जिन्ना
Jinnah, Pakistan and Islamic Identity के लेखक लिखते हैं कि भारत के विभाजन के बाद जब जिन्ना पाकिस्तान जाने लगे तो वे मुंबई में रतनबाई के कब्र पर गए और वहां फूल चढ़ाने के बाद वे वापस आए, तो उनका चेहरा सर्द था. वे अपनी बहन के साथ विमान पर बैठकर कराची चले गए. कराची में लाखों लोग उनके इंतजार में थे, लेकिन जब प्लेन उतरा तो जिन्ना के चेहरे पर उन्हें देखकर खुशी नहीं थी, क्योंकि वे रतनबाई को हमेशा के लिए छोड़कर आ गए थे. पाकिस्तान में उनकी तस्वीरें भी नहीं मिलती हैं, क्योंकि उन्हें काफिर माना गया था.
जिन्ना की पहली शादी मात्र 16 साल में हुई थी
मोहम्मद अली जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना ने अपनी किताब माई ब्रदर में लिखा है कि जिन्ना को पढ़ाई के लिए लंदन जाना था. लेकिन उनकी मां इसके लिए तैयार नहीं थी. काफी मनाने के बाद जब जिन्ना की मां उन्हें लंदन भेजने के लिए राजी हुईं, तो उन्होंने एक शर्त रखी कि इंग्लैंड जैसे देश में कुंवारे लड़के को भेजना मुनासिब नहीं है, इसलिए उनकी शादी करा दी जाए. इस बात पर मोहम्म अली जिन्ना के पिता भी राजी हो गए और जिन्ना की शादी एमीबाई से हो गई जो उस वक्त बच्ची थीं. शादी के बाद जिन्ना लंदन चले गए और महज एक साल के अंदर ही उनकी पत्नी की मौत हो गई.
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जिन्ना की पत्नी रतनबाई किस धर्म की थी?
जिन्ना की पत्नी रतनबाई पारसी समुदाय की थीं.
जिन्ना की बेटी बंटवारे के बाद उनके साथ पाकिस्तान गई थीं या नहीं?
नहीं
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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