भ्रामक विज्ञापन मामले में Patanjali को सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी, बाबा रामदेव के माफीनामे को अस्वीकार किया
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Apr 2024 3:03 PM
supreme court ने आज बाबा रामदेव की कंपनी पंतजलि को कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि हम इतनी उदारता क्यों दिखा सकते हैं.
Patanjali Ayurved के विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया और पतंजलि द्वारा दायर माफी के हलफनामे को स्वीकार करने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे को अस्वीकार करते हुए कहा कि कोर्ट इतनी उदारता नहीं दिखा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है. कोर्ट ने माफीनामे को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह सिर्फ कागजी कार्रवाई है, इसलिए वे इसे स्वीकार नहींं कर सकते हैं.
उत्तराखंड लाइसेसिंग ऑथॉरिटी ने शपथपत्र दाखिल किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड लाइसेसिंग ऑथॉरिटी ने एक शपथपत्र दाखिल किया है, जिसमें यह बताया है कि भ्रामक विज्ञापन मामले में उसने पंतजलि के खिलाफ क्या कार्रवाई की. शपथपत्र को सुप्रीम कोर्ट ने मात्र खानापूर्ति बताया और कहा कि यह सिर्फ फाइल जमा करने जैसा है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार को भी फटकार लगाई और कहा कि जब उनके पास सारी जानकारी थी तो उन्होंने पतंजलि के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम जनता में यह संदेश जाना चाहिए कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है.
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बाबा रामदेव ने कोर्ट में कहा-गलती का अहसास है
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मंगलवार को बाबा रामदेव ने कहा था कि उन्हें अपने गलती का अहसास है, इसलिए उन्हें बिना शर्त माफी मांगी है. साथ ही बाबा रामदेव ने यह भी कहा था कि वे कोर्ट को आश्वस्त करना चाहते हैं कि भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं होगी. कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा अलग-अलग दायर माफीनामे पर कहा कि यह सिर्फ दिखावा है. माफीनामा कोर्ट के पास आने से पहले मीडिया के पास चला गया.
क्या है मामला
बाबा रामदेव को भ्रामक विज्ञापन मामले में पिछले कुछ दिनों से कोर्ट के सामने माफी मांगनी पड़ रही है. बाबा रामदेव के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका दाखिल की है. उनपर आरोप है कि उन्होंने कोरोना काल में एलोपैथ की दवाओं के खिलाफ गलत बयानबाजी की और आयुर्वेद की दवाओं का बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार किया. उन्होंने कुछ दवाओं को उस दौरान लाॅन्च भी किया था, जिसके जरिए कोरोना के इलाज का दावा किया गया था.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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