सोनम वांगचुक ने कहा– मेरी रिहाई कोई मायने नहीं रखती, अगर लद्दाख नहीं जीतता
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 17 Mar 2026 5:49 PM
सोनम वांगचुक
Sonam Wangchuk : लद्दाख के लिए छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जे की मांग के लिए किए गए आंदोलन के दौरान लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित करने के आरोप में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी हुई थी. वे पूरे 170 दिनों तक जेल में रहने के बाद 14 मार्च को एनएसए हटाए जाने के बाद रिहा हुए हैं.
Sonam Wangchuk : लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने रिहाई के बाद कहा कि मैं आज बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं. मैं अपनी आवाज वापस पाने, अपने छोटे पंख फैलाने और खुद को नयी दिशा देने की ओर अग्रसर हूं.
सोनम वांगचुक ने कहा कि मेरे साथ और मेरी पत्नी के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ उसकी डरावनी कहानी बताने को मैं तैयार था. कैसे अचानक मेरे घर से मुझे, आप जानते हैं, कपड़े लपेटकर इस जेल में डाल दिया गया, बिना अपने परिवार या अपने वकीलों को कई दिनों तक फोन भी नहीं करने दिया गया. हालांकि जेल में सबकुछ अनुशासित था.
सरकार ने बातचीत के लिए हाथ बढ़ाया
170 दिनों तक जेल में रहने के बाद सोनम वांगचुक ने मीडिया के सामने कहा कि मैं थोड़ा लालची इंसान हूं. मेरे लिए एक जीत काफी नहीं है. मैं हमेशा एक विन–विन यानी जीत की तलाश में रहता हूं. सोनम ने कहा कि मेरी जीत का कोई मतलब नहीं है अगर जिन वजहों को वो रिप्रेजेंट करते हैं, वे नहीं जीतते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने भरोसा बनाने और मतलब की बातचीत को आसान बनाने के लिए हाल ही में हाथ बढ़ाया है. यह बहुत अच्छी बात है क्योंकि इस तरह लद्दाख भी जीतेगा और हमारी वजह भी जीतेगी. उन्होंने कहा कि एनएसए का दुरुपयोग ना हो इसपर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए.
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटाने पर हुई सोनम वांगचुक की रिहाई
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 मार्च को सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटा लिया, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी. सोनम वांगचुक पूरे 170 दिनों तक जोधपुर जेल में रहे. उनपर आरोप यह था कि उन्होंने आंदोलन के दौरान स्थानीय लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित किया.
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By Rajneesh Anand
राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.
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