पंचायती राज से महिलाओं को मिला सम्मान, नेतृत्व क्षमता से नया विहान: रुचिरा कंबोज

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :04 May 2024 1:34 PM (IST)
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पंचायती राज से महिलाओं को मिला सम्मान, नेतृत्व क्षमता से नया विहान: रुचिरा कंबोज

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज. फोटो: सोशल मीडिया

Panchayati Raj: रुचिरा कंबोज ने भारत के 21 राज्यों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि आज, 30.10 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 10.40 लाख से अधिक महिलाएं हैं.

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Panchayati Raj: संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था पर भारत को गर्व है. इस पंचायती राज व्यवस्था से भारत की ग्रामीण महिलाओं को सम्मान दिया और उनमें एक अद्भुत नेतृत्व क्षमता विकसित हुई. इसका परिणाम यह निकला कि ग्रामीण क्षेत्र में एक नया विहान हुआ. वे न्यू यॉर्क में भारत की ओर से आयोजित सीबीडी 57 कार्यक्रम में पंचायती राज व्यवस्था में महिला नेतृत्व में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर चर्चा कर रही थीं.

ग्रामीण शासन की अनूठी व्यवस्था है पंचायती राज

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने अपने संबोधन में आगे कहा कि ग्रामीण शासन की अनूठी व्यवस्था को पंचायती राज के नाम से जाना जाता है. यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर सत्ता के विकेंद्रीकरण का प्रतीक है. रुचिरा कंबोज सीपीडी57 कार्यक्रम में ‘एसडीजी का स्थानीयकरण: भारत में स्थानीय प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी’ विषय पर संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि पंचायती राज प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो ग्रामसभा के माध्यम से पंचायत के सभी निवासियों की सक्रिय भागीदारी की सुविधा प्रदान करता है.

1992 में ही महिलाओं को एक तिहाई दिया गया था आरक्षण

उन्होंने सत्ता के विकेंद्रीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अनूठा पहलू इसे दुनिया में अन्य जगहों पर पाए जाने वाले पारंपरिक नगरपालिका प्रशासन मॉडल से अलग करता है, जो इसे समावेशी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए एक मॉडल बनाता है. लैंगिक समानता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 1992 में संवैधानिक संशोधन के साथ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया था, जिसके तहत स्थानीय शासन में सभी निर्वाचित भूमिकाओं में से कम से कम एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य था. यह संवैधानिक प्रावधान जमीनी स्तर पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था.

भारत के 21 राज्यों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण

रुचिरा कंबोज ने भारत के 21 राज्यों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि आज, 30.10 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 10.40 लाख से अधिक महिलाएं हैं. महिलाओं की भागीदारी में यह वृद्धि शासन और सामुदायिक विकास में महिलाओं के योगदान को पहचानने और महत्व देने की दिशा में व्यापक सामाजिक बदलाव को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज प्रणाली के भीतर स्थानीय नियोजन प्रक्रिया महिलाओं को सशक्त बनाने पर प्राथमिक ध्यान देने के साथ सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के साथ सावधानीपूर्वक चिह्नित की गई है. उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसी पहलों का प्रभाव परिवर्तनकारी रहा है. उन्होंने कहा कि विकास योजना में लैंगिक विचारों को एकीकृत करके पंचायती राज प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि महिलाओं की जरूरतों और प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जाए, जिससे अधिक समावेशी और टिकाऊ परिणाम प्राप्त होंगे.

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सकारात्मक बदलाव लाने में महिलाओं की भूमिका अहम

पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने में महिला नेताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कंबोज ने शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और आजीविका को बढ़ाकर समुदायों में क्रांति लाने में उनकी भूमिका पर जोर दिया. पंचायती राज संस्थानों में महिला नेताओं ने गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और अनुभवों का लाभ उठाते हुए जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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महिलाओं के नेतृत्व के सामने चुनौती

नेतृत्व में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कंबोज ने लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए सहायक कानूनी ढांचे, मजबूत क्षमता निर्माण पहल और सहयोगी भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया. भारत का यह अनुभव महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाने और बनाए रखने पर अमूल्य अंतर्दृष्टि और सबक प्रदान करता है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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