किसी भी जाति का हो सकता है संघ प्रमुख, मोहन भागवत ने कहा

Updated at : 08 Feb 2026 12:19 PM (IST)
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RSS Pramukh Mohan Bhagwat

सरसंघचालक मोहन भागवत (Photo: PTI)

Mohan Bhagwat : सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन की फंडिंग, जाति व्यवस्था, भाषा विवाद, घर वापसी और अवैध प्रवासियों जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है. जानें उन्होंने क्या कहा.

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Mohan Bhagwat : मुंबई में आयोजित ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ प्रमुख के पोस्ट को लेकर अपनी राय रखी. जाति के सवाल पर भागवत ने कहा कि संघ में किसी भी जाति का व्यक्ति सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है.

संघ के एक्स हैडल से इस संबंध में पोस्ट किया गया. पोस्ट में लिखा गया कि मोहन भागवत ने कहा है कि संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता, कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का नहीं बन सकता, हां जो कोई भी बनेगा वह हिन्दू ही होगा.

पद छोड़ने के लिए तैयार हूं : भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे. संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है. भागवत ने कहा कि आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता. क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं. आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा. जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में और क्या कहा?

1. वीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ सम्मान मिलने से इस पुरस्कार की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी.

2. उम्मीद है कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता इस तरह किया गया है कि हमें कोई नुकसान न हो.

3. आरएसएस के ‘अच्छे दिन’ स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण ही संभव हो पाए.

4. समान नागरिक संहिता बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए; इससे मतभेद नहीं बढ़ने चाहिए.

5. अंग्रेजी से हमारा बैर नहीं है. जहां अंग्रेजी के बिना काम नहीं चलता वहां हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं. पर हमारा प्रयास रहता है कि अपनी मातृभाषा या फिर हिन्दी भाषा का ही प्रयोग करें.

6. हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए. जब ​​तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है.

7. भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है. उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो.

8. संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना.

9. हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं. अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है. इससे बचाव करना जरूरी है. प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए. आरएसएस जनसंपर्क अभियान चला रहा है.

10. भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है. उन्होंने कहा कि हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं. जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे. हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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