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VIDEO : राफेल और सुखोई में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू, कहा-अविस्मरणीय गर्व का अनुभव

Updated at : 29 Oct 2025 2:36 PM (IST)
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President Droupadi Murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

President Droupadi Murmu : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुखोई लड़ाकू विमान के बाद अब राफेल विमान से उड़ान भरी है. उनका यह कदम एक ओर जहां सेना का मनोबल बढ़ाने वाला है, वहीं यह संदेश भी देता है कि भारतीय वायुसेना कितनी समर्थ है. यह महिला सशक्तीकरण का भी सूचक है.

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President Droupadi Murmu : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को सुबह हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल में बैठकर उड़ान भरी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल की खासियत के बारे में वायुसेना के अधिकारियों से जानकारी भी ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान का उनका अनुभव अविस्मरणीय रहा और इस पहली उड़ान ने देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति उनमें गर्व की एक नयी भावना जागृत की है. राष्ट्रपति मुर्मू दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं. इससे पहले उन्होंने वर्ष 2023 में सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी. राष्ट्रपति मुर्मू ने वायुसेना की ड्रेस में राफेल की उड़ान भरी. यह पहली बार हुआ है कि राष्ट्रपति ने राफेल से उड़ान भरी है. उनके इस कदम को सेना का मनोबल बढ़ाने वाला बताया जा रहा है. उड़ान के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने हाथ हिलाकर उपस्थित लोगों का अभिवादन किया.

राष्ट्रपति भवन ने दी थी कार्यक्रम की जानकारी

राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल हरियाणा के अंबाला जाएंगी, जहां वह राफेल विमान में उड़ान भरेंगी. इससे पहले
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी. ऐसा करने वाली वह देश की तीसरी राष्ट्रपति बन गई थीं.पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने क्रमशः 8 जून, 2006 और 25 नवंबर, 2009 को पुणे के पास लोहेगांव वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी.

2020 में राफेल वायुसेना में हुआ था शामिल

फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था.पहले पांच राफेल विमानों को 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ में शामिल किया गया था. ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां पहुंचे थे. पहलगाम आतंकी हमले के बाद आॅपरेशन सिंदूर को अंजाम देने में राफेल लड़ाकू विमानों की अहम भूमिका है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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