Pollution:दिल्ली सरकार ने पटाखों की बिक्री पर लगाया प्रतिबंध

New Delhi: A thick blanket of smog covers the Rashtrapati Bhavan, in New Delhi, Wednesday, Nov. 8, 2023. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI11_08_2023_000136B)
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बार पटाखों की बिक्री, उत्पादन और स्टोरेज पर रोक लगाने का फैसला लिया है. दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा और यह एक जनवरी 2025 तक जारी रहेगा.
Pollution:हर साल सर्दियों के मौसम में दिल्ली के हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है. इससे निपटने के दिल्ली सरकार ने एक बार पटाखों की बिक्री, उत्पादन और स्टोरेज पर रोक लगाने का फैसला लिया है. दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा और यह एक जनवरी 2025 तक जारी रहेगा. दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश का सख्ती से पालन करना होगा. दिल्ली पुलिस, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्व विभाग साथ मिलकर काम करेंगे. इस फैसले के सफल क्रियान्वयन के लिए जल्द ही विस्तृत दिशा निर्देश जारी किया जायेगा. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे जारी करेगा. दिल्ली में प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की समस्या होने लगती है. इसके कारण लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है.
वायु प्रदूषण बढ़ने पर लगती है कई तरह की पाबंदी
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने पर हर साल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाती है. इसके अलावा सड़कों पर पानी का छिड़काव भी किया जाता है. हर साल सरकार विंटर एक्शन प्लान बनाती है. इस बार दिल्ली सरकार ने 21 सूत्रीय एक्शन प्लान बनाने की बात कही है. वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 से 300 तक रहता है तो ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पहला चरण सरकार लागू करती है. इसे ‘खराब’ माना जाता है. एक्यूआई 301 से 400 तक रहता है तो उसे ‘बहुत खराब’ माना जाता है और ग्रैप का दूसरा चरण लागू किया जाता है. एक्यूआई 401 से 450 तक रहने को गंभीर माना जाता है और ग्रैप का तीसरा चरण लागू होता है. प्रदूषण से निपटने के लिए हाल ही में दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखकर कृत्रिम वर्षा कराने के प्रस्ताव पर केंद्रीय एजेंसियों और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों के साथ बैठक कराने की मांग की है. पिछले साल भी दिल्ली सरकार के समक्ष आईआईटी विशेषज्ञों ने कृत्रिम वर्षा को लेकर प्रेजेंटेशन दिया था, लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह संभव नहीं हो पाया था.
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